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Ban Ki-Moon: बान की मून बोले- भारत में रहता है मेरा आधा दिल, वो तीन साल मेरे जीवन का सबसे रोमांचकारी समय
Sun, 21 Nov 2021 06:04 PM IST
Amit Mandal
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Sun, 21 Nov 2021 06:04 PM IST
सार
किताब में बान की मून लिखते हैं कि अब भी लगभग पचास साल बाद मैं भारतीयों से कहता हूं कि मेरा आधा दिल उनके देश में है। वह कहते हैं, भारत में उनका काम एक युवा राजनयिक के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन आकर्षक था।
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Ban Ki Moon
- फोटो : PTI
विस्तार
संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव बान की-मून की पहली राजनयिक पोस्टिंग भारत में थी। इस दौरान उन्होंने एक ऐसा खास संबंध विकसित किया कि 50 साल बाद भी वे भारतीयों को बताते हैं कि उनका आधा दिल भारत में है। बान ने अपनी आत्मकथा में इस बात का उल्लेख किया है कि भारत में उनके तीन साल उनके जीवन का रोमांचकारी समय था।
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बचपन की यादों का किया ताजा
हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित "रिजॉल्व्ड: यूनाइटिंग नेशंस इन ए डिवाइडेड वर्ल्ड" में बान ने वर्णन किया है कि कैसे वह 'युद्ध वाले बच्चे' से एक 'शांति वाले व्यक्ति' में तब्दील हो गए। संयुक्त राष्ट्र से ठीक एक साल पहले 1944 में जन्मे बान की शुरुआती यादें उनके कोरियाई गांव पर बम गिरने की आवाज और आग के दृश्य रहे हैं।
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छह साल के लड़के के रूप में वह अपने परिवार के साथ भाग गए थे। मिट्टी से लथपथ जूतों के साथ मीलों तक दौड़ते रहे, ये बच्चा लगातार भूख से पीड़ित था और सोच रहा था कि कैसे बचेगा। लेकिन तभी संयुक्त राष्ट्र ने उन्हें बचा लिया। बाद में युवा बान इस उदारता को चुकाने के लिए दृढ़ संकल्पित हुए।
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मेरा आधा दिल भारत में रहता है
भारत में अपने दिनों के बार में वे लिखते हैं- भारत में मेरी पहली राजनयिक पोस्टिंग थी और सून-ताक (पत्नी) और मैं अक्टूबर 1972 में दिल्ली पहुंचे। मैंने वहां लगभग तीन वर्षों तक सेवा की। पहले कोरियाई महावाणिज्य दूतावास के उप महावाणिज्यदूत के रूप में और दिसंबर 1973 में कोरिया और भारत के बीच एक पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद मैंने कोरियाई दूतावास के दूसरे सचिव के रूप में कार्य किया।
उनकी बेटी सियोन-योंग उस समय सिर्फ आठ महीने की थी और उनके इकलौते बेटे वू-ह्यून का जन्म 30 अक्टूबर 1974 को भारत में हुआ था। इस किताब में बान लिखते हैं- मैं भारतीय लोगों के साथ मजाक करता था कि भारत के साथ मेरी बैलेंस शीट सही है क्योंकि मेरा बेटा भारत में पैदा हुआ था और मेरी सबसे छोटी बेटी ह्यून-ही की शादी एक भारतीय व्यक्ति से हुई है। अब भी लगभग पचास साल बाद मैं भारतीयों से कहता हूं कि मेरा आधा दिल उनके देश में है। उनका कहना है कि भारत में उनका काम एक युवा राजनयिक के लिए चुनौतीपूर्ण लेकिन आकर्षक था।
भारत ने दोनों कोरिया को दी मान्यता
वह कहते हैं- हमारा पहला लक्ष्य गुटनिरपेक्ष समूह के नेता भारत से पूर्ण राजनयिक मान्यता प्राप्त करना था, जो हमने दिसंबर 1973 में किया था। कोरियाई और कई अन्य राजनयिकों ने महसूस किया कि कांसुलर संबंधों को राजदूत स्तर तक बढ़ाना राजनयिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। भारत सबसे बड़े गुटनिरपेक्ष देशों में से एक था जिसने दोनों कोरिया को मान्यता दी।