West Bengal: 'पैसे की बात छोड़िए, किसी से एक कप चाय तक नहीं ली', TMC पर लग रहे आरोपों के बीच ममता का बड़ा बयान
West Bengal: ममता बनर्जी की यह टिप्पणी तब सामने आई है, जब राशन आपूर्ति घोटाले की जांच के सिलसिले में पिछले महीने ईडी द्वारा वरिष्ठ मंत्री ज्योति प्रिय मलिक की गिरफ्तारी को लेकर बवाल मचा हुआ है। पार्टी के अन्य नेताओं को भी केंद्रीय एजेंसियों ने भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया था।
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष की ओर से तृणमूल कांग्रेस को चोर बताने पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्होंने एक भी पैसा नहीं लिया है और न ही किसी से एक कप चाय ली है। बनर्जी भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहीं थीं।
उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती वाम मोर्चा सरकार भ्रष्ट थी, क्योंकि 2011 में गठबंधन को हराकर तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद एक करोड़ फर्जी राशन कार्डों का पता चला था और बाद में उन्हें रद्द कर दिया गया था।
उनकी यह टिप्पणी तब सामने आई है, जब राशन आपूर्ति घोटाले की जांच के सिलसिले में पिछले महीने ईडी द्वारा वरिष्ठ मंत्री ज्योति प्रिय मलिक की गिरफ्तारी को लेकर बवाल मचा हुआ है। पार्टी के अन्य नेताओं को भी केंद्रीय एजेंसियों ने भ्रष्टाचार के मामलों में उनकी कथित संलिप्तता के लिए गिरफ्तार किया था।
विपक्षी भाजपा तृणमूल कांग्रेस शासन और पार्टी नेताओं को चोर बता रही है। उन्होंने कहा, कुछ लोगों द्वारा समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन हमने सात-आठ वर्षों तक सिस्टम को साफ करने में बहुत प्रयास किए। क्या हमने दूसरे के पैसे से एक कप चाय ली है? मैंने एक पैसा भी नहीं लिया है। मैं (सांसद) 1.25 लाख रुपये मासिक पेंशन नहीं लेती।
यह दावा करते हुए कि फर्जी राशन कार्डों को खत्म करने के टीएमसी सरकार के कदम से कोविड महामारी के दौरान भुखमरी से कोई मौत नहीं हुई, बनर्जी ने कहा कि लोगों को माकपा के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे के शासन के दौरान राज्य के दक्षिणी हिस्से में जंगलमहल क्षेत्र में आबादी द्वारा कथित तौर पर झेली गई भूख की तुलना करनी चाहिए।
टीएमसी सुप्रीमो ने कहा, जब मैं विपक्ष के सांसद के रूप में बीरपहाड़ी गई थी तो मैं यह जानकर दंग रह गई थी कि लोग बीरपहाड़ी में चींटियां खाते हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि उनकी सरकार जनहितैषी है, जिन लोगों ने टाटा की छोटी कार परियोजना के लिए सिंगूर में खेत दिया था और इसे वापस पाने के बाद भी इसे जोतने में असमर्थ थे, उन्हें अभी भी चावल के अलावा मासिक भत्ते के रूप में 2,000 रुपये मिल रहे हैं।