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EXCLUSIVE: नितिन पटेल बोले- मैंने खुद चुनाव लड़ने से मना किया, अगर लड़ता तो तीन गुना ज्यादा अंतर से जीतता

Sun, 20 Nov 2022 07:41 PM IST
Ashish Tiwari आशीष तिवारी
Updated Sun, 20 Nov 2022 07:41 PM IST
सार

गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री नितिन भाई पटेल ने अमर उजाला डॉट कॉम से की विशेष बातचीत। कहा कि चुनावी मैदान में नहीं हूं इसका कोई मलाल नहीं, यह फैसला मेरा खुद का था।

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Had I contested the election, the margin of victory would have been three times more than the last time
नितिन पटेल। - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर पाटीदार नेता नितिन पटेल ने जब गुजरात में टिकट बंटवारे से पहले पत्र लिखकर चुनाव ना लड़ने की घोषणा की तो गुजरात ही नहीं बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में सियासी चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। पटेल खुद मानते हैं कि यह चर्चा का विषय तो है ही। क्योंकि वह छह बार से लगातार विधायक हैं। मंत्री रहे और उपमुख्यमंत्री जैसा पदभार संभाला। अहमदाबाद में नितिन पटेल ने अमर उजाला डॉट कॉम से हुई विशेष बातचीत में कहा कि उनकी पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है।बल्कि, चुनाव ना लड़ने का फैसला उनका खुद का था। पार्टी ने कोई दबाव नहीं डाला था। हालांकि, वह कहते हैं अगर इस बार चुनाव लड़ते तो उनकी जीत का अंतर पिछले चुनाव से तीन गुना ज्यादा होता। गुजरात की राजनीति से लेकर चुनाव ना लड़ने तक के तमाम मुद्दों पर नितिन भाई पटेल ने आशीष तिवारी से विस्तार से बातचीत की। पेश हैं उसके अंश।
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सवाल: घुमा फिरा के कुछ पूछने से बेहतर है आप सीधे-सीधे बताइए कि चुनाव में ना लड़ने का फैसला आपका था या पार्टी ने दबाव बनाया था।
जवाब: यह मेरा खुद का फैसला था। पार्टी का कोई ना दबाव था ना ऐसे कोई दिशा निर्देश थे। दिल्ली में जब गुजरात के विधानसभा चुनावों के टिकट की घोषणा होनी थी उससे पहले ही मैंने अपने प्रदेश अध्यक्ष से मिलकर चुनाव ना लड़ने की जानकारी दे दी।
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सवाल: लेकिन आप के चुनाव ना लड़ने की घोषणा से सियासी गलियारों में यही चर्चा रही कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री समेत कई मंत्रियों को चुनाव लड़ने से पार्टी आलाकमान ने मना किया है। इसीलिए आप लोगों ने टिकट वितरण से ठीक पहले कहा की चुनाव नहीं लड़ेंगे।
जवाब: मैं छह बार का विधायक हूं। नौ विभागों का मंत्री रह चुका हूं। गुजरात राज्य का उपमुख्यमंत्री रहा। गुजरात के सभी बड़े मुख्यमंत्रियों के साथ काम किया है। लाखों लोग मेरे चाहने वाले हैं। तो इस बार चुनाव ना लड़ने से चर्चाएं तो होनी ही थीं।
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सवाल: आप गुजरात के बड़े पाटीदार नेताओं में शुमार किए जाते हैं। आप इस बार परोक्ष रूप से चुनाव में नहीं है। तो क्या यह माना जाए कि अब आप जैसे बड़े पाटीदार नेताओं का रिप्लेसमेंट हो रहा है। 
जवाब : देखिए रिप्लेसमेंट की जो प्रक्रिया है वह है भी और नहीं भी। अब हमको बदला जा रहा है यह सत्य है। नए लोग आए यह भी सत्य है। लेकिन हमारे यहां जो अनुभवी और बड़े नेता हैं उनको हमेशा आगे भी किया जाता है। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल भी पाटीदार नेता है। सरकार बन रही है, और वह एक बार फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे। व्यक्ति बदला जाता है। लेकिन पाटीदार समुदाय का महत्व भारतीय जनता पार्टी में बिल्कुल कम नहीं हुआ है।

सवाल: एक सीधा सवाल और सीधा जवाब आपसे चाहिए। आपको कोई नाराजगी तो नहीं है भारतीय जनता पार्टी से कि आप को टिकट नहीं दिया गया क्या आपने खुद टिकट लेने से मना कर दिया।
जवाब: नहीं बिल्कुल नाराजगी नहीं है। यह हमारा खुद का फैसला था।

सवाल: मैं गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के सभी जिलों में होकर आया हूं। आपकी विधानसभा सीट मेहसाणा भी गया। लोग आपकी चर्चा करते हैं कि आप चुनावी मैदान में नहीं है।
जवाब: यह बात बिल्कुल तय है अगर मैं इस बार विधानसभा का चुनाव लड़ता तो 2017 में जितने मतों के अंतर से जीता था उस से तीन गुना ज्यादा अंतर से इस बार मैं विजयी होता। लेकिन मैंने कहा ना कि चुनाव ना लड़ने का फैसला मेरा था। मैं इस बार चुनाव में लड़कर पूरे गुजरात में प्रत्येक विधानसभा सीट पर जाकर प्रत्याशियों को जिताने के लिए मैदान में हूं।

सवाल: इस चुनाव में आम आदमी पार्टी भी मजबूती के साथ पूरे गुजरात में चुनाव लड़ रही है। आपको क्या लगता है इस बार आप का सीधा कंपटीशन कौन सी पार्टी से है।
जवाब: गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का किसी पार्टी से कोई कंपटीशन नहीं है। अगर थोड़ा बहुत करीब 10 फीसदी के बराबर का कहीं कंपटीशन है भी तो वह सिर्फ कांग्रेस पार्टी से है। क्योंकि गुजरात में कांग्रेस बड़ी पार्टी है। पुरानी पार्टी है और यहां पर वर्षों तक कांग्रेस ने शासन भी किया है।

सवाल: इस बार चुनावी मैदान में तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी भी गुजरात में ताल ठोक रही है। मुस्लिम वोटरों में सेंधमारी की तैयारी है। कहा जाता है कि ओवैसी भाजपा की बी पार्टी है।
जवाब: भारतीय जनता पार्टी अपने विचारों के साथ आगे बढ़ती है इसलिए बी पार्टी जैसी तो कोई चीज ही नहीं होती है। रही बात ओवैसी के चुनावी मैदान में आने की तो वह मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में कुछ जगह पर चुनाव लड़ रहे हैं।

सवाल: 2017 के विधानसभा चुनावों में गुजरात में आरक्षण को लेकर बड़े आंदोलन चल रहे थे। पाटीदार वोट बैंक में सेंध मारी हुई थी। पिछला चुनाव ज्यादा कठिन है या इस बार का चुनाव ज्यादा कठिन है। 
जवाब: निश्चित तौर पर पिछला चुनाव ज्यादा कठिन था। पिछली बार आरक्षण आंदोलन को लेकर नाराजगी जरूर थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने मिलकर न सिर्फ पूरे मसले को हल किया बल्कि इस चुनाव में हम दुगने उत्साह के साथ मैदान में हैं।

सवाल: पिछली बार तो आरक्षण मुद्दे को लेकर आंदोलन करने वाले पाटीदार नेता हार्दिक पटेल भी आपकी पार्टी में आ गए हैं। और भी कई नेता आपकी पार्टी से चुनाव लड़ रहे हैं। तो क्या यह राह आसान उन्हीं आंदोलनकारी चेहरों को चुनाव में उतारने के बाद हुई है।
जवाब: गुजरात में 182 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। हार्दिक पटेल भी उन्हीं में से एक है। भारतीय जनता पार्टी लोगों से सतत संपर्क में रहने वाली पार्टी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन सबका साथ सबका विकास के माध्यम से ही गुजरात में एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने वाली है।

सवाल: आखिरी सवाल। इस बार भारतीय जनता पार्टी को सीटें कितनी मिलने वाली हैं।
जवाब: भारतीय जनता पार्टी इस बार अपने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे ज्यादा सीटें पाएगी।
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