Gyanvapi Case: ज्ञानवापी केस से BJP को मिल सकता है फायदा, लोकसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने की होगी कोशिश
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विस्तार
अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन का कार्यक्रम 22 जनवरी को प्रधानमंत्री मोदी के हाथों होना है। भाजपा ने इसे लेकर जिस तरह का कार्यक्रम बनाया है, माना जा सकता है कि वह इसे हिंदू अस्मिता के प्रतीक के तौर पर पेश करेगी और उससे बड़ा चुनावी फायदा लेने की कोशिश करेगी। भाजपा के इस दावे को ज्ञानवापी केस की वर्तमान स्थिति से भी मजबूती से मिल सकती है, जिसमें मुस्लिम पक्ष के सभी दावों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने जिला अदालत से इस मामले की सुनवाई छह महीने में पूरा करने का आदेश दिया है। यदि समय से यह प्रक्रिया संपन्न हुई, तो ज्ञानवापी विवाद का निर्णय भी लोकसभा चुनाव के आसपास आ सकता है।
भाजपा और संघ के कुछ करीबी मानते हैं कि ज्ञानवापी मामले में भी कई साक्ष्य उसे हिंदू मंदिर के रूप में प्रमाणित करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं, माना जा सकता है कि इसका निर्णय भी अयोध्या विवाद की तरह हिंदुओं के पक्ष में आ सकता है। यदि ऐसा होता है तो इसका लाभ भी भाजपा को हो सकता है। इस विवाद को उठाने और अंतिम परिणाम तक पहुंचाने में भाजपा की प्रत्यक्ष तौर पर कोई भूमिका नहीं रही है, लेकिन जिस तरह प्रधानमंत्री मोदी ने काशी में बाबा विश्वनाथ के मंदिर का जीर्णोद्धार कराया है, माना जा रहा है कि इसका लाभ भी भाजपा के खाते में जुड़ सकता है। भाजपा सहित तमाम हिंदू संगठनों के नेता इसे हिंदू गौरव की वापसी के तौर पर प्रचारित करने लगे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के नजरिए से सकारात्मक बात यह हुई है कि इसी दौरान मथुरा विवाद में भी सर्वे करने का आदेश जारी हो चुका है। इस आदेश में भी इसे रोकने का मुस्लिम पक्ष की तमाम कोशिशें असफल साबित हुई हैं। जल्द ही इसका सर्वे हो सकता है। यह मामला भी भाजपा अपने पक्ष में प्रचारित कर सकती है और उसे इसका लाभ मिल सकता है। विशेष कर उसे इसका लाभ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एरिया में हो सकता है जो भाजपा के लिए अभी तक परेशानी का कारण बना हुआ है।
राजस्थान में हुआ था असर
राजनीतिक विश्लेषक संजय कुमार ने अमर उजाला से कहा कि राजस्थान के विधानसभा चुनाव परिणाम बताते हैं कि वहां के मतदाताओं पर कन्हैयालाल हत्याकांड का बड़ा असर हुआ। अशोक गहलोत सरकार के बहुत अच्छे कामकाज के बाद भी मतदाताओं ने उसे नकार दिया। सरकार ने सामाजिक सुरक्षा की तमाम योजनाओं की शुरुआत की थी, जिसका उसे लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी, लेकन मतदाताओं ने लोकलुभावनी योजनाओं को नकारते हुए अपनी सुरक्षा को ज्यादा अहमियत दी।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने चुनाव में जिस तरह हिंदू मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करने का प्रयास किया था, वह काफी हद तक सफल साबित हुआ। अब जबकि लोकसभा चुनाव होने हैं और इसमें सीधे प्रधानमंत्री मोदी चेहरे के रूप में मौजूद होंगे, भाजपा उन्हें हिंदू संस्कृति और हिंदू स्वाभिमान का वापसी कराने वाले नेता के रूप में प्रचारित करने की कोशिश करेगी। भाजपा को इसका चुनावी लाभ मिल सकता है।