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खाली जेब और तेंदुए के भय के बीच बैंक के बाहर रात गुजार रहे लोग
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 11 Dec 2016 02:46 AM IST
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- फोटो : getty
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नोटबंदी के बाद से नकदी की किल्लत कुछ इस तरह छाई है कि गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के संखदा गांव और उसके आसपाल के लोग कड़ाके की ठंड और शेर व तेंदुए के आने के भय के बीच एसबीआई की स्थानीय शाखा के बाहर रात गुजारने को मजबूर हैं। नोटबंदी के बाद से जेब खाली है। ऐसे में आसपास के गांवों के लोगों नकदी की आस में एसबीआई की संखदा शाखा के बाहर रात से ही लाइन में लग जा रहे हैं, जिससे कि सुबह बैंक खुलने पर उन्हें पैसे मिल जाएं।
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इलाके में दूसरा कोई बैंक नहीं है। इसलिए यहां कड़ाके की ठंड के बावजूद भारी भीड़ उमड़ रही है। वैसे बैंक के बाहर लोगों को सिर्फ सर्दी की मार ही नहीं झेलनी पड़ रही है, बल्कि उन्हें पूरी रात शेर व तेंदुए के आने का भय भी सताता रहता है। एक सप्ताह पूर्व एक तेंदुआ रास्ता भटक कर इस इलाके में आ गया था और तब से वह इसी इलाके में है। गांव के सरपंच संतूभाई गोहील ने बताया कि बैंक के बाहर कतार में लगे लोगों और ग्रामीणों ने तेंदुओं को जंगल की खदेड़ने का प्रयास किया था, लेकिन इससे पहले उसने गाय के एक बछड़े को अपना निवाला बना डाला।
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गौरतलब है कि यह गांव गिर शेर अभयारण्य के काफी करीब है। एसबीआई की इस शाखा में 20 गावों के लोगों का खाता है। सरपंच ने बताया कि आरबीआई ने एक सप्ताह में 24000 रुपये निकालने की अनुमति दी है, लेकिन नकदी की कमी की वजह से बैंक से लोगों को मात्र 2000 रुपये ही मिल पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि नोटबंदी के बाद शुरुआती दिनों में दुकानदारों ने उधार सामान दिए, लेकिन अब वे भी उधार देने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में लोगों को पैसे की नितांत आवश्यकता है।
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इसी वजह से लोग पूरी रात बैंक के बाहर लाइन लगा रहे हैं। गोहील ने बताया कि सर्दी और तेंदुए से मुकाबले को लोग कंबल और लट्ठ लेकर बैंक पहुंचते हैं। सरपंच ने बताया कि बैंक के बाहर रात को कतार में रहने वाले लोगों के लिए उन्होंने बिस्कुट और पानी की व्यवस्था कर रखी है। निकटवर्ती ऊना कस्बे के रहने वाले फारूख राजा ने कहा कि बैंक से 2000 के नोट मिल रहे हैं, जिसे दुकानदार आसानी से लेने को तैयार नहीं हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग 2000 के नए नोट स्वीकार करने के लिए 200 रुपये का कमीशन ले रहे हैं।