Gujarat: इस्लामिक स्टेट से जुडे़ दो आतंकियों को 'अंतिम सांस' तक कारावास, हमलों की योजना बनाने में थे शामिल
Gujarat: गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर की सत्र अदालत ने आईएसआईएस से जुड़े दो आतंकवादियों को अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई है। इन्हें साल 2017 में गिरफ्तार किया गया था।
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गुजरात के भरूच जिले के अंकलेश्वर की सत्र अदालत ने आईएसआईएस से जुड़े दो आतंकवादियों को अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई है। इन्हें साल 2017 में गिरफ्तार किया गया था। दोनों पर हमलों की योजना बनाने और आंतकी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी युवाओं की भर्ती करने का आरोप था।
सरकारी वकील परेश पांड्या ने शनिवार को बताया कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वीजे कलोत्रा की अदालत ने उबेद अहमद मिर्जा और मोहम्मद कासिम स्टिम्बरवाला को उनकी 'अंतिम सांस' तक कैद की सजा सुनाई।
गुजरात एटीएस ने अक्तूबर 2017 में इस्लामिक स्टेट के दोनों ऑपरेटिव्स को गिरफ्तार किया था और उन पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 17, 18, 19 और 38 और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 121-ए (राजद्रोह) और 125 (भारत के साथ जुड़कर किसी एशियाई ताकत के खिलाफ युद्ध छेड़ना) के तहत आरोप लगाए थे।
स्टिम्बरवाला अंकलेश्वर के एक अस्पताल में प्रयोगशाला तकनीशियन के रूप में काम करता था, जबकि मिर्जा सूरत जिला अदालत में वकील था। पांड्या ने कहा कि गिरफ्तारी से पहले वे 2014 से एटीएस की निगरानी में थे। पांड्या ने कहा कि कुल 75 गवाहों, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन, लैपटॉप, निगरानी डेटा और डिजिटल सबूतों को अदालत ने सबूत के रूप में माना, जिससे यह साबित हुआ कि दोनों ने सीरिया भागने से पहले आतंकवादी गतिविधियों की योजना बनाई थी।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, स्टिम्बरवाला और मिर्जा ने अहमदाबाद में एक यहूदी उपासनागृह सहित कुछ ठिकानों की रेकी की थी और वे कट्टरपंथी युवाओं को आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए भारत से बाहर भेजने की योजना बना रहे थे। उन्होंने हमलों को अंजाम देने और आईएसआईएस के लिए युवाओं की भर्ती के लिए हथियारों की व्यवस्था करने के लिए हैदराबाद, बेंगलुरु और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों का भी दौरा किया था।
पांड्या ने कहा, 'उन्होंने इस उद्देश्य के लिए चार नाबालिगों की भर्ती भी की थी, जिन्हें कोलकाता से गिरफ्तार किया गया था और बाद में अभियोजन पक्ष के गवाह बन गए थे।' एटीएस ने आरोपपत्र में कहा कि स्टिम्बरवाला और मिर्जा इस्लामिक स्टेट की जेहादी विचारधारा से अत्यधिक प्रेरित थे और यहूदियों पर हमलों की योजना बना रहे थे। जमैका में रहने वाले कट्टरपंथी उपदेशक अब्दुल्ला अल फैसल और आईएस के संदिग्ध हैंडलर शफी अरमार को आरोपपत्र में फरार आरोपी के तौर पर दिखाया गया है।
आरोपपत्र में यह भी कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए दो लोगों में से एक के अज्ञात सहयोगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या के बारे में बात की थी। मिर्जा और उसके सहयोगी के बीच व्हाट्सएप चैट के अनुसार, 10 सितंबर, 2016 को मिर्जा ने पिस्तौल खरीदने के बारे में बात की थी।