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कामयाबी: गुजरात के वैज्ञाानिकों ने उगाया डेढ़ लाख रुपये किलो का मशरूम, कैंसर के इलाज में भी कारगर

Thu, 20 May 2021 05:09 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकोट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजकोट Published by: प्रशांत कुमार Updated Thu, 20 May 2021 05:09 PM IST
सार

गुजरात के वैज्ञानिकों ने एक विशेष प्रकार का मशरूम उगाकर इतिहास रचा है। इस मशरूम की कीमत डेढ़ लाख रुपये प्रति किलो बताई जा रही है। यह मशरूम खाने के अलावा कैंसर की दवाओं में भी विशेष रूप से उपयोगी है। 

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Gujarat scientists grow one of costliest mushroom price 1.5 lakh/kg
विशेष प्रकार का मशरूम - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अब तक आपने बाजार से मशरूम यूं ही कोई 400 या 500 रुपये किलो तक खरीदा होगा। इसका स्वाद आपके जायके को जानदार बना देता है, लेकिन आज हम आपको ऐसे मशरूम की कहानी बयां करने जा रहे हैं, जिसे पढ़कर या सुनकर आप भी चौंक जाएंगे। देखने में यह मशरूम भले ही आपको सामान्य लग रहा हो, लेकिन यह दुनिया का सबसे महंगा मशरूम है। सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि दवाओं में भी इसका काफी महत्व है। खासकर कैंसर की दवाओं में इस मशरूम का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।  

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90 दिनों में तैयार हुआ मशरूम
कच्छ स्थित गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ डेजर्ट इकोलॉजी के वैज्ञानिकों ने विशेष मशरूम कोर्डिसेप्स मिलिटरिस की खेती कर नई कामयाबी हासिल की है। इस विशेष मशरूम की कीमत 1.50 लाख रुपये प्रति किलो है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक निश्चित तापमान में 35 जार में मशरूम को 90 दिनों के भीतर तैयार किया है। 
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कैंसर की दवाओं में इस्तेमाल
दरअसल, विशेष मशरूम कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस का इस्तेमाल दवाओं में भी किया जाता है। स्तन कैंसर के लिए बनने वाली दवाओं में इस मशरूम का इस्तेमाल होता है। चीन और तिब्बत हर्बल दवाओं में इसका ज्यादा उपयोग करते हैं।

हिमालयी सोना है कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस - संस्थान
संस्थान के डायरेक्टर वी विजय कुमार ने कहा कॉर्डिसेप्स मिलिटेरिस को हिमालयी सोना कहा जाता है। इसमें स्वास्थ्य के कई फायदे हैं और शायद जीवनशैली से जुड़ी कई बीमारी को रोकने की अद्भुत क्षमता है। संस्थान ने इस मशरूम के एंटीट्यूमर पहलू का अध्ययन किया है। शुरुआती जांच से पता चला है कि इस मशरूम का अर्क गजब के नतीजे दे सकता है।


संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक कार्तिकेयन के मुताबिक लोगों पर मेडिकल ट्रायल करने के लिए नियामक मंजूरी मांगी गई है। उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रोस्टेट कैंसर पर इसके प्रभाव के बारे में शोध किए जा रहे हैं, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से फिलहाल इसे रोका गया है। 

संस्थान लोगों को देगा खेती करने का प्रशिक्षण
गाइड संस्थान ने सफलतापूर्वक विशेष प्रजाति के मशरूम उगाने के बाद कारोबारियों को प्रशिक्षण देने का फैसला किया है। संस्थान का मानना है कि प्रशिक्षण देने के बाद लोग बड़े पैमान पर इसके जरिए रोजगार पा सकते हैं। हालांकि लैब सतह पर मशरूम की खेती के प्रशिक्षण की कीमत काफी महंगी है। एक सप्ताह के प्रशिक्षण के लिए एक लाख रुपये देने होंगे, लेकिन संस्थान सामान्य शुल्क पर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है।

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