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Gujarat Results: सातवीं बार गुजरात में भाजपा सरकार, आठ कारण जिससे गुजरात में अपराजेय बन गए पीएम मोदी
सार
आइए आठ बिंदुओं में समझने की कोशिश करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में अपराजेय क्यों बन गए हैं?
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गुजरात में भाजपा का प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुजरात की जनता भाजपा को लगातार सातवीं बार राज्य की बागडोर सौंपती दिखाई पड़ रही है। अब तक के आंकड़ों को देखते हुए लगता है कि भाजपा एक नए रिकॉर्ड के साथ गुजरात विधानसभा में पहुंचने की तैयारी कर चुकी है। भाजपा की इस जीत के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र की करिश्माई छवि ने बड़ी भूमिका निभाई है। आइए आठ बिंदुओं में समझने की कोशिश करते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात में अपराजेय क्यों बन गए हैं?
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विकास पुरुष की छवि
हाल ही में हुए एक सर्वे में भाजपा को वोट देने वाले 41 फीसदी मतदाताओं ने माना था कि वे भाजपा को इसलिए वोट देते हैं, क्योंकि वह विकास के कार्य करती है। यह थोड़े आश्चर्य की बात हो सकती है कि इसी सर्वे में भाजपा को वोट देने के लिए केवल 11 फीसदी लोगों ने एक नेता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कारण बताया था। चूंकि, 2002 से गुजरात में भाजपा का पर्याय प्रधानमंत्री मोदी ही बन गए हैं। माना जाता है कि विकास के इस पैमाने में उनके द्वारा राज्य के लिए किए गए कार्य ही सर्वप्रमुख हैं। यानी यदि नरेंद्र मोदी गुजरात के लोगों की पहली पसंद बने हैं तो इसके पीछे चुनावी तिकड़म नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों को श्रेय दिया जा सकता है।
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गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने गांधीनगर, अहमदाबाद, सूरत, भरुच, पाटनपुर, मेहसाणा और केवड़िया की छवि बदलकर रख दी। निवेश के लिए राज्य में उचित माहौल बनाना, विदेशी निवेशकों को आकर्षित करना, सड़कों को चौड़ा करना, पार्कों का विकास करना, स्कूल-कॉलेज खोलना उनके ऐसे ही कार्य हैं, जिन्होंने न केवल गुजरात में रोजगार पैदा किया, बल्कि इससे राज्य की सूरत भी बदल गई। यदि गुजरात चुनाव में बेरोजगारी कोई मुद्दा नहीं बन पाया तो इसका श्रेय भाजपा के विकास कार्यों को दिया जा सकता है। दूसरे राज्यों का हाल देख रहे गुजराती मतदाता विकास कार्यों के कारण नरेंद्र मोदी को विकास पुरुष की तरह देखते हैं और वे राज्य में अपराजेय से बन गए दिखाई पड़ते हैं।
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महिलाओं के लिए काम
महिलाएं भाजपा की बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। पार्टी पुरुषों की बजाय महिलाओं के बीच ज्यादा लोकप्रिय है। इसका कारण है कि मोदी ने सत्ता संभालने के साथ ही विकास योजनाओं के केंद्र में महिलाओं को रखा। महिलाओं के नाम भूमि की रजिस्ट्री कराने पर टैक्स में छूट, राशन कार्ड बनवाने में महिलाओं के नाम को प्रमुखता, उज्जवला गैस कनेक्शन और महिलाओं के लिए सीधी आर्थिक सहायता देना महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में बड़ा कारण बनकर उभरा है। यही कारण है कि महिलाएं भाजपा और नरेंद्र मोदी की बड़ी समर्थक बन गई हैं। मोदी के अपराजेय बनने के पीछे यह वोट बैंक अहम भूमिका निभाता है। महिलाओं के नाम बैंक खाते खुलने और केंद्र-राज्य की आर्थिक सहायता का बिना किसी भ्रष्टाचार के सीधे उन तक पहुंचने के काम ने मोदी को महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय कर दिया है।
किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार
गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के साथ ही नरेंद्र मोदी ने विकास की प्राथमिकता में गांवों को सबसे ऊपर रखा। उन्होंने गुजरात के गांव-गांव तक पक्की सड़कों का विकास किया। कृषि कार्य के लिए हर गांव तक बिजली उपलब्ध कराने वाली विशेष लाइन स्थापित कराई और ग्रामीणों को अपना पैसा पाने के लिए गांवों से बाहर न जाना पड़े, इसके लिए हर गांव तक सहकारी, सरकारी और निजी बैंकों का जाल बिछाने में मदद की।
आज गुजरात के किसानों की आर्थिक स्थिति देश के अन्य हिस्सों के किसानों से कहीं ज्यादा बेहतर है। गांवों में विकसित की गईं डेयरियों ने भी किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का काम किया है। दूध विक्रेता किसानों को हर हफ्ते सीधे उनके बैंक खाते में पैसे मिल जाने से एक पारदर्शी व्यवस्था बनी है जिसके कारण किसानों को अपने पैसे के लिए, या केंद्र द्वारा भेजी गई आर्थिक सहायता के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता। इन कार्यों से गुजरात के किसानों के बीच नरेंद्र मोदी की छवि विकास पुरुष की बन गई।
मजबूत पार्टी संगठन
गुजरात में भाजपा के अविश्वसनीय तरीके से मजबूत होने के पीछे उसका पार्टी संगठन भी प्रमुख माना जाता है। गुजरात के हर गांव-ब्लॉक स्तर पर भाजपा के कार्यकर्ता मौजूद हैं जो लोगों को सरकार के विकास कार्यों की न केवल जानकारी देते है, बल्कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ पाने में लोगों की मदद भी करते हैं। ये कार्यकर्ता चुनाव के समय लोगों से अपनी पार्टी के पक्ष में मतदान करने के लिए कहते हैं तो स्वाभाविक तौर पर मतदाता उनकी बात सुनते हैं। यह भी एक बड़ा कारण है जिसके कारण भाजपा गुजरात में बड़ी राजनीतिक शक्ति बन गई।
कमजोर विपक्ष
भाजपा के गुजरात में बड़ी ताकत बनने के पीछे विपक्ष की कमजोरी को भी अहम कारण माना जाता है। गुजरात में राजनीति हमेशा दो राजनीतिक दलों के बीच आमने-सामने की लड़ाई बनी रही। पिछले तीन दशकों से भाजपा और कांग्रेस के बीच गुजरात में सीधी टक्कर देखने को मिली है। कांग्रेस ने लंबे समय तक गुजरात के मतदाताओं को अपने से जोड़कर रखा, लेकिन पिछले दो दशकों से वह लगातार कमजोर होती गई है। अब उसके पास अहमद पटेल जैसे लोगों से जुड़े नेता भी नहीं रह गए हैं। कांग्रेस की इस कमजोरी का लाभ भाजपा को हुआ और वह राज्य में अपराजेय ताकत बनती चली गई।
गुजराती अस्मिता के प्रतीक
नरेंद्र मोदी ने बहुत कुशलता से स्वयं को गुजरात की अस्मिता के प्रतीक के तौर पर उभारना शुरू किया। मुख्यमंत्री रहने पर उन्होंने राज्य में उद्योगपतियों को आकर्षित कर विकास कार्यों को पंख लगाने की कोशिश की तो विदेशों में बसे गुजरातियों को अपना ब्रांड अंबेसडर की तरह स्थापित करना शुरू किया। गुजरात के लोगों की बड़ी संख्या दुनिया के अनेक देशों में निवास करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान यह वर्ग उन्हें अपने से जुड़ा महसूस करता है और उनके कारण वह विदेशों में स्थानीय तौर पर भी ज्यादा गौरवांन्वित महसूस करता है। ये गुजराती जब अपने गांवों में आते हैं तो नरेंद्र मोदी को एक करिश्माई नेता के तौर पर पेश करते हैं। प्रधानमंत्री की यह छवि उन्हें गुजरात में अपराजेय बनाने में मदद करती है।
हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक ध्रुवीकरण
भाजपा पर सांप्रदायिक राजनीति करने के आरोप हैं। कांग्रेस का आरोप रहा है कि वह राममंदिर आंदोलन के समय से ही गुजरात में मतदाताओं को धार्मिक आधार पर बांटती रही। 2002 में यह ध्रुवीकरण अपने चरम पर पहुंच गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा स्वयं को एक हिंदू मतावलंबी नेता के तौर पर पेश करते हैं। इससे भी उनकी छवि हिंदू मतदाताओं के बीच ज्यादा स्वीकार्य बनती है। गुजरात की जनता को धर्मपरायण स्वभाव की माना जाता है। ऐसे में मोदी की हिंदूवादी छवि उन्हें गुजरात के लोगों के बीच ज्यादा स्वीकार्य बनाती है।
जनता से सीधा संपर्क
नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत उनका जनता से सीधा संपर्क स्थापित करना है। अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा में वे लगातार जनता से सीधे संपर्क में रहते हैं। इससे वे न केवल लोगों की समस्याओं को सीधे तौर पर समझ पाते हैं, बल्कि लोगों को उनसे स्वयं को जोड़ने में भी मदद मिलती है। प्रधानमंत्री बनने के बाद कड़ी सुरक्षा में होने के बाद भी वे बीच-बीच में सीधे जनता से संवाद स्थापित करते हैं। जबकि इसके पहले दूसरे नेता सुरक्षा कारणों से जनता से कट जाते थे जिससे वे लोगों के दिलों में उतनी गहराई से नहीं उतर पाते थे। पीएम के लोकप्रिय होने का एक बड़ा कारण उनका जनता से सीधा संपर्क स्थापित करना भी है।