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Gujarat Results 2022: 20 साल की तैयारी के बाद BJP ने कांग्रेस से छीना आदिवासी बेल्ट, AAP ने ऐसे की मदद
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गुजरात चुनाव 2022
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर अपने गढ़ गुजरात पर कब्जा जमा लिया है। पार्टी इस बार पहले से ज्यादा बहुमत और ताकत के साथ प्रदेश की सत्ता पर काबिज होगी। भाजपा ने न केवल इस बार के चुनाव में नया रिकार्ड बनाया, बल्कि कांग्रेस के गढ़ में भी सेंधमारी करने में सफल रही। आदिवासी बेल्ट की आधा दर्जन सीटों को छोड़कर भाजपा ने सभी पर भगवा फहरा दिया है। दाहोद, छोटा उदयपुर, पंचमहल, तापी-डांग, व्यारा सहित कई आदिवासी बहुल सीटों पर प्रदर्शन भाजपा के लिए जश्न मनाने जैसा है।
दरअसल, भाजपा कांग्रेस के इस गढ़ में सेंधमारी के लिए 2002 के विधानसभा चुनाव से प्रयास कर रही है। लेकिन पार्टी को सफलता 20 साल बाद मिली है। 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने गुजरात में एसटी आरक्षित 27 सीटों में से 15 सीटें हासिल की थी। जबकि भाजपा को महज 8 सीट हासिल हुई थी। इसके अलावा छोटू भाई वसावा की भारतीय ट्राइबल पार्टी दो और अन्य को एक सीट हासिल हुई। जबकि 2022 के चुनाव नतीजों में भाजपा को अच्छी सफलता मिली है। आदिवासी क्षेत्र की 30 सीटों में से भाजपा को 24 सीट, कांग्रेस को 5 और आम आदमी पार्टी को 1 सीट जीत हासिल हुई है।
प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्र में कांग्रेस की हार का सबसे बड़ा कारण आम आदमी पार्टी रही। आप ने कांग्रेस के वोट को प्रभावित किया और भाजपा को फायदा पहुंचाया। कई आदिवासी सीटों पर आप उम्मीदवारों ने कांग्रेस का वोट काटकर भाजपा का फायदा करवा दिया। जबकि चुनाव से पहले कांग्रेस के कई दिग्गज आदिवासी नेता भाजपा में शामिल हो गए। इसे भाजपा ने भुनाया और उन्हें टिकट दिया। इससे भी कांग्रेस को चुनाव में नुकसान हुआ।
अपने गढ़ में महज इतनी सीटे ही बचा पाई कांग्रेस
कांग्रेस को 2022 के विधानसभा चुनावों में नवसारी जिले की एसटी सीट वांसदा, अहमदाबाद जिले की एससी सीट दाणी लिमडा, बनासकांठा जिले की एसटी सीट दांता, साबरकांठा जिले की एसटी सीट खेडब्रह्मा, बनासकांठा जिले की एससी सीट वडगाम सीट पर जीत हासिल हुई है। जबकि आम आदमी पार्टी ने भी पहले ही चुनाव में नर्मदा जिले की एसटी सीट डेडियापाडा विधानसभा सीट पर कब्जा जमाया है। डेडियापाडा सीट पर 2017 के चुनाव में कांग्रेस और भाजपा को पछाड़ते हुए भारतीय ट्राइबल पार्टी ने इस सीट पर अपना कब्जा कर लिया था। बीटीपी के वसावा महेश भाई छोटू भाई को 83,026 मत प्राप्त हुए थे।
पंचमहल, नर्मदा, खेड़ा, तापी, छोटा उदयपुर, दाहोद, बाटोद, भरुच, डांग, कच्छ, साबरकांठा,अमरेली, आनंद,अमरेली और बनासकांठा जैसे जिलों की पहचान प्रदेश की राजनीति में आदिवासी क्षेत्र के रूप में होती है। पिछले कई चुनावों की तुलना में भाजपा ने 2022 के चुनावों में जबरदस्त प्रदर्शन किया हैं। दाहोद, डांग, तापी, कच्छ, पंचमहल, छोटा उदयपुर, अमरेली और भरूच जैसे जिलों की सभी सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। कभी यही क्षेत्र कांग्रेस के गढ़ कहे जाते थे।
आदिवासी को साधने के लिए भाजपा ने किए ये वादे
2022 के चुनावों में आदिवासी क्षेत्र पर कब्जा जमाने के लिए भाजपा कई चुनावी वादों के साथ मैदान में उतरी। आदिवासी मतदाताओं को खुश करने के लिए पार्टी ने आदिवासी सीटों पर कई जनजातीय सम्मेलन आयोजित किए। इसमें आदिवासी समाज के नेताओं को देशभर से बुलाया गया। इसके अलावा भाजपा के आदिवासी नेताओं ने इस सीटों पर प्रवास और प्रचार किया। पार्टी ने चुनावों में आदिवासी समृद्धि कॉरिडोर बनाने का वादा भी जनजाति समुदाय से किया है। इसके अलावा आदिवासी समाज को वन बंधु कल्याण योजना 2.0 के तहत एक लाख करोड़ रुपए आवंटित करने का वादा किया। टॉप रैंकिंग संस्थान में प्रवेश मिलने पर आदिवासी छात्र को 50 छात्र का अनुदान की बात कहीं है। आदिवासी क्षेत्रों में 8 मेडिकल व 10 नर्सिंग पैरामेडिकल कॉलेज की स्थापना। इसके अलावा अंबाजी से उमरगाम तक बिरसा मुंडा आदिवासी समृद्धि कॉरिडोर बनाकर प्रत्येक जिले को 4 से 6 लाइन हाईवे से जोड़ने का वादा भी किया है।
आदिवासी इलाकों में बढ़ा मतदान प्रतिशत,फायदा भाजपा को
दक्षिण गुजरात के आदिवासी बहुल सीटों पर मतदान का प्रतिशत 65 से 74 प्रतिशत के बीच रहा। व्यारा, निजार, डांग, डेडियापाडा और झगड़िया जैसे प्रमुख क्षेत्रों के मतदाताओं ने कांग्रेस और भारतीय ट्राइबल पार्टी को खारिज कर दिया है। पार-तापी-नर्मदा नदी जोड़ने वाली परियोजना, बेरोजगारी, स्टैच्यू आफ यूनिटी परियोजना में आदिवासियों की मूल्यवान जमीन खोने
जैसे मुद्दों से भाजपा को कोई नुकसान नहीं हुआ।