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Gujarat Information Commission: आयोग ने कहा- निजी विश्वविद्यालय सार्वजनिक प्राधिकरण, RTI के दायरे में भी आएंगे

Wed, 25 Jun 2025 08:23 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद। Published by: ज्योति भास्कर Updated Wed, 25 Jun 2025 08:23 PM IST
सार

गुजरात में राज्य सूचना आयोग ने अहम फैसला लिया है। सूचना आयोग ने कहा है कि निजी विश्वविद्यालयों को भी सार्वजनिक प्राधिकरण माना जाएगा। ये संस्थान सूचना का अधिकार कानून (RTI) के दायरे में भी आएंगे। आयोग ने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार से अनुशंसा की है कि गुजरात प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2009 के तहत स्थापित सभी विश्वविद्यालयों में RTI कानून को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए जरूरी आदेश जारी किया जाए। जानिए क्या है पूरा मामला

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Gujarat Information Commission private universities public authority under purview of RTI know all
सूचना का अधिकार (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात सूचना आयोग (GIC) ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। आयोग ने प्रोफेसर देवदत्त राणा की अपील पर पारित आदेश में कहा, निजी विश्वविद्यालय भी सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में आते हैं क्योंकि ये संस्थाएं 'लोक या सार्वजनिक प्राधिकरण' (Public Authority) की श्रेणी में शामिल हैं। प्रोफेसर राणा ने वडोदरा के पारुल विश्वविद्यालय के खिलाफ अपील दायर की थी।

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गुजरात सरकार को 16 साल पुराने कानून के तहत प्रक्रिया शुरू करने की अपील
राज्य सूचना आयोग ने 16 जून को पारित आदेश में कहा, सरकार को गुजरात प्राइवेट यूनिवर्सिटीज एक्ट, 2009 के तहत स्थापित सभी विश्वविद्यालयों में RTI कानून को लागू कराने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। पारुल विश्वविद्यालय के खिलाफ अपील करने वाले प्रोफेसर देवदत्त राणा अहमदाबाद के एक कॉलेज में पढ़ाते हैं।
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RTI कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार
राणा ने पिछले साल GIC का दरवाजा खटखटाया था। पारुल विश्वविद्यालय ने RTI कानून के तहत मांगी गई जानकारी देने से इनकार कर दिया था। विश्वविद्यालय ने तर्क दिया था कि निजी संस्था होने के आधार पर वह RTI अधिनियम के दायरे में नहीं आता। ना ही उसे सरकार से कोई आर्थिक सहायता मिलती है।
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दोनों पक्षों की दलीलों पर एक नजर
पारुल विश्वविद्यालय की इस दलील पर प्रोफेसर राणा ने कहा, पारुल विश्वविद्यालय गुजरात विधानसभा से पारित कानून के आधार पर स्थापित संस्था है। इसलिए संस्था RTI अधिनियम की धारा 2 के तहत 'लोक या सार्वजनिक प्राधिकरण' की श्रेणी में आता है।


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राज्य सूचना आयुक्त ने किसकी दलील को सही माना?

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद GIC के मुख्य सूचना आयुक्त डॉ. सुभाष सोनी ने राणा की दलील को सही ठहराया। उन्होंने साफ किया कि कोई भी संस्था जो संसद या राज्य विधानसभा के कानून के तहत स्थापित होती है, उसे RTI कानून के मुताबिक लोक प्राधिकरण माना जाएगा।


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सूचना आयोग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की वेबसाइट पर प्रकाशित सूचना का हवाला देते हुए कहा, यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी विश्वविद्यालय और कॉलेज जो संसद या राज्य सरकार की तरफ से बनाए गए कानून के माध्यम से स्थापित हुए हैं, वे सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में आते हैं। आयोग ने वर्ष 2020 में राज्य शिक्षा विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना का भी उल्लेख किया। इसमें संस्था के आरटीआई के दायरे में आने को लेकर भी इसी प्रकार का निर्देश दिया गया था।

गुजरात सूचना आयोग (जीआईसी) ने पारुल विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को भी निर्देश दिया। अपने आदेश में जीआईसी ने कहा, यूनिवर्सिटी RTI अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाए। जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी की नियुक्ति की जाए। अधिकारियों की जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर भी अपडेट करना का निर्देश दिया गया है। आयोग ने विश्वविद्यालय को आदेश दिया कि वह प्रोफेसर राणा को अपने ऑफ-कैंपस केंद्रों से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराए।

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