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Gujarat: 'मिक्सोपैथी' प्रस्ताव का गुजरात आईएमए ने किया विरोध; कहा- इससे लोगों के स्वास्थ्य को 'गंभीर खतरा' है

Tue, 31 Dec 2024 05:44 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Tue, 31 Dec 2024 05:44 PM IST
सार

कई निर्वाचित प्रतिनिधियों को संबोधित एक पत्र में, आईएमए ने कहा, 'हम आपसे कई चिकित्सा प्रणालियों के बीच पवित्रता और सद्भाव को बनाए रखने और मिक्सोपैथी या चिकित्सा शिक्षा और अभ्यास में शॉर्टकट की अवधारणा का समर्थन करने से बचने का आग्रह करते हैं।' पत्र में कहा गया है कि मिक्सोपैथी, कई चिकित्सा प्रणालियों को एक ही अभ्यास में मिलाना, हमारे नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

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Gujarat IMA opposes 'mixopathy' proposal; says it poses 'severe risks' to people's health
IMA - फोटो : IMA।

विस्तार

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के गुजरात शाखा ने मंगलवार को कहा कि 'मिक्सोपैथी' नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए 'गंभीर खतरा' पैदा करती है, और सांसदों से अनुरोध किया कि वे गुजरात के लोगों के स्वास्थ्य पर ऐसे निर्णयों के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करें।
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क्या है 'मिक्सोपैथी'?
'मिक्सोपैथी' का अर्थ है रोगियों के उपचार के लिए एलोपैथी या आधुनिक चिकित्सा जैसी कई चिकित्सा प्रणालियों को होम्योपैथी और आयुर्वेद के साथ मिलाना। यह राज्य के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ गुजरात मेडिकल काउंसिल, गुजरात आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा प्रणाली बोर्ड और गुजरात होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली परिषद आदि के प्रतिनिधियों की बैठक बुलाने के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें आयुर्वेद में प्रशिक्षित डॉक्टरों को एलोपैथी का अभ्यास करने की अनुमति देने के मुद्दे पर चर्चा की गई।
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स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 27 दिसंबर को जारी और आईएमए गुजरात की तरफ से साझा किए गए पत्र के अनुसार, प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी की अध्यक्षता में बैठक 3 जनवरी, 2025 को बुलाई गई है। हालांकि, आईएमए ने इस विचार का विरोध किया है।
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'मिक्सोपैथी बढ़ावा देने से हो सकते हैं खतरनाक परिणाम'
आईएमए गुजरात के पत्र में कहा गया है कि इस तरह का दृष्टिकोण प्रत्येक चिकित्सा पैथी की अखंडता और विशेषज्ञता को कमजोर करता है, जिससे रोगी की देखभाल से समझौता होता है और संभावित सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट होता है। आईएमए ने सरकार से सुरक्षित और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया, क्योंकि मिक्सोपैथी की अनुमति देने या बढ़ावा देने से 'गलत निदान, अनुचित उपचार और गंभीर, प्रतिकूल घटनाओं समेत खतरनाक परिणाम हो सकते हैं,' इसमें कहा गया है।

आईएमए गुजरात के अध्यक्ष ने की नेताओं से अपील
आईएमए गुजरात के अध्यक्ष डॉ. मेहुल शाह और अन्य पदाधिकारियों की तरफ से हस्ताक्षरित पत्र में कई निर्वाचित प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया है कि वे 'गुजरात के लोगों के स्वास्थ्य पर ऐसे निर्णयों के दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करें।' इसमें कहा गया है, 'हम आपसे आग्रह करते हैं कि आप प्रत्येक चिकित्सा अनुशासन के शैक्षिक और व्यावसायिक मानकों को मजबूत करने और सभी प्रणालियों के बीच सामंजस्य स्थापित करने की वकालत करें, न कि उन्हें समामेलन के माध्यम से कमजोर करें।' 


'मिक्सोलॉजी' की प्रथा को बताया 'गैरकानूनी'
आईएमए गुजरात के अधिकारियों ने कहा कि 'इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर गहराई से विचार करने और सहयोगात्मक रूप से ऐसे समाधान तलाशने की आवश्यकता है जो सुनिश्चित करेंगे कि गुजरात के नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।' स्वास्थ्य, चिकित्सा सेवा और चिकित्सा शिक्षा आयुक्त हर्षद पटेल को लिखे पत्र में गुजरात आईएमए ने 'मिक्सोलॉजी' की प्रथा को 'गैरकानूनी' बताया। इसमें कहा गया है, 'अगर इसे तुरंत नहीं रोका गया, तो इससे व्यापक स्वास्थ्य आपदाएं पैदा होंगी।
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