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गुजरात हाईकोर्ट: अशांत क्षेत्र कानून के तहत बेदखल परिवार को अंतरिम राहत, डिप्टी क्लेक्टर के आदेश पर लगाई रोक

Sun, 10 Mar 2024 03:01 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: आदर्श शर्मा Updated Sun, 10 Mar 2024 03:01 PM IST
सार

अशांत क्षेत्र कानून के तहत बेदखली का सामना कर रहे परिवार को गुजरात हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी है।

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Gujarat High Court grants interim relief to family facing eviction under Disturbed Areas Act
गुजरात हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अशांत क्षेत्र कानून के तहत बेदखली का सामना कर रहे परिवार को गुजरात हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने परिवार को बेदखल करने के डिप्टी कलेक्टर के आदेश पर रोक लगा दी है।
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डिप्टी कलेक्टर के आदेश पर कोर्ट ने लगाई रोक
न्यायमूर्ति वैभवी नानावती ने याचिकाकर्ता, पुरुषोत्तम उमरेडकर को अंतरिम राहत दी, जिन्होंने उस परिवार को घर बेच दिया था जिसे बेदखल करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने एक मार्च को पारित आदेश में राज्य सरकार, जिला और सूरत के डिप्टी कलेक्टरों को भी नोटिस जारी किया। उमरेडकर ने अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत प्रावधानों के कथित उल्लंघन के लिए डिप्टी कलेक्टर द्वारा पारित सात नवंबर, 2023 के बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए अदालत का रुख किया।
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क्या है कानून
गुजरात अचल संपत्ति के हस्तांतरण पर प्रतिबंध और अशांत क्षेत्रों में परिसर से बेदखली से किराएदारों की सुरक्षा के प्रावधान अधिनियम, 1991 के तहत, अधिसूचित क्षेत्र में कोई भी अचल संपत्ति अधिकारियों की अनुमति के बिना खरीदी या बेची नहीं जा सकती है। दो अलग-अलग समुदायों के खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संपत्तियों के हस्तांतरण की बारीकी से जांच की जाती है और अनुमति देने से पहले पड़ोसियों की राय मांगी जाती है।
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'डिप्टी कलेक्टर के आदेश के खिलाफ कोर्ट का किया था रुख'
याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने अपना घर रजिया खटीक को बेचने का फैसला किया और अधिनियम के तहत इसके लिए आवेदन किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि जब अधिकारी आवेदन का जवाब देने में विफल रहे, तो उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया और अदालत के निर्देश के आधार पर डिप्टी कलेक्टर ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर आवेदन पर निर्णय लेने का आदेश दिया।


याचिकाकर्ता ने कहा कि पड़ोसी द्वारा उठाई गई कुछ आपत्तियों और पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट रिपोर्ट नहीं होने के कारण आवेदन खारिज कर दिया गया। उमरेडकर ने कहा कि उन्हें अपनी पत्नी के इलाज के लिए पैसे की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने घर को बेचने का फैसला किया है।
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