{"_id":"65b926344ac79ff1810101cb","slug":"gujarat-govt-to-high-court-ready-to-notify-norms-framed-by-education-regulators-to-curb-ragging-2024-01-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gujarat: 'मानदंडों को अधिसूचित करने के लिए तैयार', रैगिंग रोकने को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दिया जवाब","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Gujarat: 'मानदंडों को अधिसूचित करने के लिए तैयार', रैगिंग रोकने को लेकर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दिया जवाब
Tue, 30 Jan 2024 10:11 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Tue, 30 Jan 2024 10:11 PM IST
सार
गुजरात सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट से कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में रैंगिग को रोकने, रैंगिग के मामले से जुड़े अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने के लिए नियमों को अधिसूचित करने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन
अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पिछले साल अहमदाबाद स्थित मेडिकल कॉलेज में रैगिंग से संबंधित स्वत: संज्ञाान जनहित याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। गुजरात सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट से कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में रैंगिग को रोकने, रैंगिग के मामले से जुड़े अधिकारियों पर जवाबदेही तय करने के लिए नियमों को अधिसूचित करने के लिए तैयार हैं।
अदालत ने महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी द्वारा दी की गई यूजीसी, एमसीआई (वर्तमान में एनएमसी) और एआईसीटीई द्वारा बनाए गए नियमों की प्रतियां रिकॉर्ड में ले लीं। मामले से जुड़े आदेश में अदालत ने कहा कि राज्य प्रतिवादी की ओर से यह प्रस्तुत किया गया है कि सरकारी विनियमन(जीआर) जारी करके गुजरात के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमों को अधिसूचित करने के लिए तैयार हैं, जिसमें अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जा सके।
पीठ ने मंगलवार को गांधीनगर स्थित गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) में एक समलैंगिक छात्र के उत्पीड़न और उसके बैचमेट द्वारा एक महिला छात्र के साथ दुष्कर्म की कथित घटनाओं से संबंधित एक मामले की भी सुनवाई की। हाईकोर्ट ने जीएनएलयू को निर्देश दिया कि वह छात्रों की शिकायतों को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सामने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या किसी बाहरी दबाव की संभावना के सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का हलफनामा में खुलासा करें।
विज्ञापन
अदालत ने स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि एक छात्र को केवल उसके समलैंगिक होने के कारण किए गए उत्पीड़न के कारण मानसिक आघात पहुंचा है और एक महिला छात्र ने अपने बैचमेट द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाया है। बता दें एक रिपोर्ट में कहा गया था कि विश्वविद्यालय का आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) मौजूद नहीं था। छात्रों से औपचारिक शिकायतें न मिलने के बारे में जीएनएलयू प्रवक्ता की प्रतिक्रिया का हवाला दिया गया था। अदालत के निर्देश के बाद संस्थान ने एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की स्थापना की थी।
विज्ञापन
अदालत ने महाधिवक्ता कमल त्रिवेदी द्वारा दी की गई यूजीसी, एमसीआई (वर्तमान में एनएमसी) और एआईसीटीई द्वारा बनाए गए नियमों की प्रतियां रिकॉर्ड में ले लीं। मामले से जुड़े आदेश में अदालत ने कहा कि राज्य प्रतिवादी की ओर से यह प्रस्तुत किया गया है कि सरकारी विनियमन(जीआर) जारी करके गुजरात के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमों को अधिसूचित करने के लिए तैयार हैं, जिसमें अधिकारियों पर जवाबदेही तय की जा सके।
विज्ञापन
पीठ ने मंगलवार को गांधीनगर स्थित गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (जीएनएलयू) में एक समलैंगिक छात्र के उत्पीड़न और उसके बैचमेट द्वारा एक महिला छात्र के साथ दुष्कर्म की कथित घटनाओं से संबंधित एक मामले की भी सुनवाई की। हाईकोर्ट ने जीएनएलयू को निर्देश दिया कि वह छात्रों की शिकायतों को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के सामने बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या किसी बाहरी दबाव की संभावना के सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों का हलफनामा में खुलासा करें।
विज्ञापन
अदालत ने स्वत: संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि एक छात्र को केवल उसके समलैंगिक होने के कारण किए गए उत्पीड़न के कारण मानसिक आघात पहुंचा है और एक महिला छात्र ने अपने बैचमेट द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाया है। बता दें एक रिपोर्ट में कहा गया था कि विश्वविद्यालय का आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) मौजूद नहीं था। छात्रों से औपचारिक शिकायतें न मिलने के बारे में जीएनएलयू प्रवक्ता की प्रतिक्रिया का हवाला दिया गया था। अदालत के निर्देश के बाद संस्थान ने एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की स्थापना की थी।