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गांधी के ऐतिहासिक स्कूल पर तेज़ हुई चुनावी सियासत, कांग्रेस ने बताया बापू का अपमान

Mon, 27 Nov 2017 03:26 AM IST
अतुल सिन्हा/अमर उजाला, राजकोट
अतुल सिन्हा/अमर उजाला, राजकोट Updated Mon, 27 Nov 2017 03:26 AM IST
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Gujarat Elections: Electoral politics risen on the historical school of Mahatma Gandhi

गुजरात में पटेलों की राजनीति के नाम पर सरदार पटेल को बेशक फिर से जीवित कर दिया गया हो, लेकिन इस खेल में गांधी जी हाशिये पर चले गए हैं। राजकोट शहर के बीचो बीच बना ऐतिहासिक अल्फ्रेड स्कूल वह स्कूल रहा है जहां गांधी जी ने कई साल पढ़ाई की, बाद में इसका नाम भी मोहनदास गांधी हाईस्कूल कर दिया गया। 

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लेकिन अब प्रदेश की भाजपा सरकार और राजकोट नगरपालिका ने इस ऐतिहासिक स्कूल को बंद कर दिया है, यहां पढ़ रहे बच्चों को जबरन स्कूल से बाहर कर दिया है। कुछ बच्चों को किसी और स्कूल में भेज दिया गया है। अब इस स्कूल को संग्रहालय बनाया जाएगा। कांग्रेस ने इसे गांधी जी का अपमान बताया है साथ ही इस बेहतरीन स्कूल को गुजरात का गौरवशाली स्कूल बनाने की जगह बंद करने के मुद्दे को चुनावी मुद्दा बना लिया है।
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कांग्रेस नेता और पार्टी घोषणापत्र समिति के मुखिया सैम पित्रोदा ने अल्फ्रेड स्कूल को बंद करने के मुद्दे को अपने घोषणापत्र में जोड़ दिया है और राजकोट के लोगों से वादा किया है कि सत्ता में आने पर इस स्कूल को फिर से इसका पुराना गौरव वापस दिलाया जाएगा। 

वहीं भाजपा इसे मुद्दा नहीं मानती और कहती है कि यह एक ऐतिहासिक धरोहर है और इसे सहेजकर संग्रहालय बनाने का फैसला गांधी जी का अपमान नहीं, बल्कि सम्मान है। गौरतलब है कि इस स्कूल की एक नई इमारत का शिलान्यास अक्टूबर 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों हुआ था। लेकिन आज यही स्कूल बंद किया जा रहा है।

सत्ता आने पर स्कूल को फिर से पुराना गौरव वापस मिलेगाः कांग्रेस

Gujarat Elections: Electoral politics risen on the historical school of Mahatma Gandhi
राहुल गांधी

कांग्रेस ने इस चुनाव में गुजरात से जुड़े और राजीव गांधी के बहुत करीब रहे सैम पित्रोदा को अपने तरीके से प्रचार की कमान सौंपी है और फिलहाल पित्रोदा दूसरी बार राजकोट, जामनगर, सूरत बडोदरा जैसे शहरों का धुआंधार दौरा कर रहे हैं। उन्होंने राजकोट के इस स्कूल के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है और मानते हैं कि शहर के लोग इस स्कूल की ऐतिहासिक इमारत के साथ साथ इसके गौरव को इस तरह बरबाद होते नहीं देख सकते।

 उधर प्रशासन ने स्कूल में बच्चों की कम होती संख्या और गिरते स्तर का हवाला देकर इस स्कूल को संग्रहालय बनाने का ठेका एक निजी कंपनी को 15 करोड़ में दे दिया है। कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है कि किस तरह सरकार नैनो कार बनाने के लिए 30 हजार करोड़ का ठेका देती है और साबरमती रिवर फ्रंट के नाम पर 4 हजार करोड़ का ठेका निजी कंपनी को देती है। 

यह स्कूल 164 साल पुराना है और गांधीजी ने 1887 में यहां से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी। 1853 में बने इस स्कूल का नाम राजकोट हाई स्कूल था और यह सौराष्ट्र इलाके का पहला अंग्रेजी मीडियम स्कूल था। इसकी मौजूदा इमारत 1875 में जूनागढ़ के नवाब ने बनवाई थी और प्रिंस अल्फ्रेड के नाम पर इसका नाम रखा था अल्फ्रेड हाई स्कूल। आजादी के बाद इसे मोहनदास गांधी हाईस्कूल का नाम दे दिया गया।

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