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Gujarat Election: इसुदान गढ़वी को ही AAP ने क्यों बनाया CM का उम्मीदवार, भाजपा-कांग्रेस पर इसका क्या होगा असर?

Fri, 04 Nov 2022 04:26 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Fri, 04 Nov 2022 04:26 PM IST
सार

इसुदान के नाम का एलान होते ही हर कोई उनके बारे में जानने की कोशिश करने लगा है। सवाल यह है कि आखिर इसुदान गढ़वी को ही क्यों आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है? गढ़वी की उम्मीदवारी से आप को क्या फायदा हो सकता है? भाजपा और कांग्रेस पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं...
 

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Gujarat Election: Why AAP made Isudan Gadhvi the CM candidate, what will be its effect on BJP-Congress?
इसुदान गढ़वी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आम आदमी पार्टी (AAP) ने इसुदान गढ़वी को गुजरात में पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुद इसका एलान किया। इसुदान गुजरात के गढ़वी समाज से आते हैं। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि आप के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल इटालिया को सीएम का फेस बनाया जा सकता है। आप ने पंजाब की तरह यहां भी सीएम पद के उम्मीदवार के लिए सर्वे कराया था। सर्वे में गढ़वी को 73 फीसदी लोगों का वोट मिला।
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इसुदान के नाम का एलान होते ही हर कोई उनके बारे में जानने की कोशिश करने लगा है। सवाल यह है कि आखिर इसुदान गढ़वी को ही क्यों आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया है? गढ़वी की उम्मीदवारी से आप को क्या फायदा हो सकता है? भाजपा और कांग्रेस पर इसका क्या असर पड़ेगा? आइए जानते हैं...
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पहले इसुदान गढ़वी के बारे में जान लीजिए
इसुदान गढ़वी (Isudan Gadhvi) ने पत्रकारिता से राजनीति में कदम रखा है। गढ़वी का जन्म गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले के पिपलिया में हुआ। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जाम खंभालिया में पूरी की। कॉमर्स से स्नातक करने के बाद 2005 में गढ़वी ने गुजरात विद्यापीठ से पत्रकारिता की पढ़ाई की। इसके बाद दूरदर्शन से जुड़ गए और वहां पर एक शो करने लगे। इसुदान ने पोरबंदर की एक स्थानीय चैनल में बतौर रिपोर्टर काम किया। 

2015 में इसुदान अहमदाबाद आए और यहां वह एक गुजराती चैनल के एडिटर बन गए। उस वक्त इसुदान की उम्र महज 32 साल थी। इसुदान ने इस दौरान 'महामंथन' नाम से एक कार्यक्रम की शुरुआत की। इसकी वह एंकरिंग करते थे। गुजराती भाषा में होने वाले इस कार्यक्रम ने इसुदान को काफी पहचान दिलाई। खासतौर पर किसानों के बीच इसुदान काफी लोकप्रिय हो गए। 

अपने इस कार्यक्रम में गढ़वी किसानों के मुद्दों को उठाते थे। सौराष्ट्र में इस कार्यक्रम को सबसे ज्यादा देखा जाता था। इसुदान खुद किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता खेराजभाई गढ़वी अभी भी खेती करते हैं। इसुदान ने पत्रकार रहते हुए वापी, पोरबंदर, जामनगर, अहमदाबाद और गांधीनगर में काम किया।

पिछले साल जब आदमी पार्टी ने गुजरात में संगठन विस्तार की कवायद शुरू की तो इसुदान पत्रकारिता छोड़कर राजनीति में आ गए। इसुदान गढ़वी ने जून 2021 की शुरुआत में नौकरी से इस्तीफा दे दिया और कहा कि वे पत्रकारिता छोड़कर जनता के लिए काम करेंगे। जून में जब अरविंद केजरीवाल गुजरात पहुंचे तो इसुदान आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। 
 

गढ़वी को ही क्यों बनाया सीएम का उम्मीदवार? 
इसे समझने के लिए हमने गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार वीरांग भट्ट से बात की। उन्होंने कहा, 'इसुदान ओबीसी वर्ग से आते हैं। गुजरात में करीब 48 प्रतिशत से ज्यादा ओबीसी वोटर हैं। इसुदान की जाति गढ़वी है। गुजरात के राजकोट, जामनगर, कच्छ, बनासकांठा, जूनागढ़ समेत कुछ अन्य जिलों में गढ़वी समाज की अच्छी संख्या है।'

वीरांग आगे कहते हैं, 'टीवी कार्यक्रम के जरिए गढ़वी ने किसानों के बीच अच्छी लोकप्रियता हासिल की है। वह किसानों के मुद्दों को लेकर आक्रामक रहे हैं। हाल ही में पशुपालकों ने सरकार के कुछ नियमों के खिलाफ हड़ताल की थी, इसकी पूरी रूपरेखा गढ़वी ने ही तैयार की थी। ऐसे में गढ़वी के जरिए आम आदमी पार्टी को किसानों का साथ मिल सकता है।'

वीरांग के अनुसार, इसुदान सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव हैं। मुखर होकर वह आम लोगों के मुद्दों को उठाते रहे हैं। ऐसे में सरकार विरोधियों के बीच भी उनकी अच्छी लोकप्रियता है। गढ़वी समाज का वोट परंपरागत तौर से कांग्रेस को मिलता है। गढ़वी को चेहरा बनाकर आप कांग्रेस के वोटबैंक में सेंध लगाने की कोशिश करेगी। 
 
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गोपाल को क्यों नहीं बनाया उम्मीदवार? 
वीरांग के अनुसार, गोपाल इटालिया कुछ वक्त पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां पर किए आपत्तिजनक बयानों की वजह से चर्चा में आए थे। ऐसे में अगर इटालिया मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाए जाते तो भाजपा इस मुद्दे पर आप के घोर सकती थी। 2017 में कांग्रेस के मणिशंकर अय्यर के बयान का नुकसान उनकी पार्टी को उठाना पड़ा था। इस वजह से भी आप जोखिम नहीं लेने से बच गई। 

वहीं, गोपाल इटालिया पाटिदार नेता हैं। पाटिदार वोटर्स भाजपा के साथ माना जाता है। 2017 पाटीदार आंदोलन के बाद भी पाटिदार समाज का काफी वोट भाजपा मिला था। ऐसे में इटालिया को चेहरा बनाने का आप को शायद कम फायदा होता। 
 

गढ़वी समाज का इतिहास
गढ़वी समाज के लोग मुख्यरूप से खेती-किसानी और पशुपालन से जुड़े हुए हैं। जब राजशाही के दौर में इस समाज के लोग गायन में काफी सक्रिय थे। अभी भी गुजरात में गढ़वी समाज के काफी गायक हैं जो डायरो (कवि सम्मेलन) करते हैं। इसमें स्थानीय भाषा में प्रस्तुति दी जाती है। इसमें गायन के साथ जोक्स और हास्य के कार्यक्रम होते हैं। कीर्तिदान गढ़वी गुजरात के बड़े गायक हैं। वहीं, राजनीतिक तौर पर गढ़वी समाज की भागीदारी काफी कम रही है। बीजेपी से पूर्व में पुष्पदान गढ़वी और वीके गढ़वी मंत्री, विधायक और सांसद बने हैं, लेकिन यह पहला मौका है जब गढ़वी समाज के किसी व्यक्ति को किसी पार्टी ने मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया है।
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