Gujarat Election: किला कब्जाए रखने के लिए भाजपा ने की चारों दिशाओं में किलेबंदी, इस रणनीति से जीत की तैयारी!
Gujarat Election: पार्टी ने क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए गुजरात को चार भागों में बांटा है। प्रदेश की 182 सीटों के हिसाब से सौराष्ट्र, मध्य, पश्चिम और उत्तर गुजरात के रूप में बांटा गया है। एमपी के नेताओं के हिस्से दाहोद, आनंद, पंचमहाल, महिसागर, मेहसाणा, बड़ौदा नगर व ग्रामीण क्षेत्रों की सीटें हैं...
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इस साल के आखिर में गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। गुजरात 24 साल से भाजपा का अपराजेय किला बना हुआ है। पार्टी ने फिर से राज्य पर कब्जा बरकरार रखने के लिए चारों दिशाओं में मोर्चाबंदी कर दी है। जातीय और भौगोलिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की 182 सीटों को चार हिस्सों (सौराष्ट्र, उत्तर, पश्चिम, मध्य क्षेत्र) में बांट दिया है। सौराष्ट्र में उत्तर प्रदेश, पश्चिम में महाराष्ट्र, उत्तर में राजस्थान और मध्य क्षेत्र में मध्यप्रदेश के भाजपा नेताओं की ड्यूटी लगाई है। इन चारों क्षेत्रों में इन राज्यों के मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और संघ पृष्ठभूमि के नेताओं को तैनात किया है।
दक्ष नेता और कार्यकर्ताओं की ड्यूटी
मध्यप्रदेश के सीमावर्ती और मध्य गुजरात के सात जिलों की 37 सीटों का प्रभार पूर्व विधायकों व संगठन मंत्री रह चुके नेताओं को सौंपा गया है। मध्य प्रदेश से जुड़ी गुजरात की कुछ विधानसभा सीटें आदिवासी बाहुल हैं। चुनावी रणनीति के हिसाब से हर सीट पर मध्यप्रदेश के दो—दो नेताओं को तैनात किया गया है। ये सभी लोग गुजरात प्रदेश इकाई के साथ दिल्ली हाईकमान को भी हर दिन की प्रोग्रेस रिपोर्ट साझा करेंगे। मध्य गुजरात की 37 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा ने इंदौर के नेता और पूर्व विधायक जीतू जिराती को इन सभी सीटों के समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है। मध्यप्रदेश भाजपा से जुड़े सूत्रों ने अमर उजाला से कहा, इन चुनावों में कांग्रेस के साथ-साथ आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में है। इसलिए पार्टी ने चुनावी प्रबंधन में दक्ष नेता और कार्यकर्ताओं की ड्यूटी लगाई है।
पार्टी ने क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए गुजरात को चार भागों में बांटा है। प्रदेश की 182 सीटों के हिसाब से सौराष्ट्र, मध्य, पश्चिम और उत्तर गुजरात के रूप में बांटा गया है। एमपी के नेताओं के हिस्से दाहोद, आनंद, पंचमहाल, महिसागर, मेहसाणा, बड़ौदा नगर व ग्रामीण क्षेत्रों की सीटें हैं। जानकारी के अनुसार, मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह चौहान के कैबिनेट से डॉ. नरोत्तम मिश्रा को बनासकांठा जिले का प्रभारी नियुक्त किया गया। इसके साथ ही मध्यप्रदेश के दो अन्य कैबिनेट मंत्रियों में अरविंद सिंह भदौरिया को भरूच और इंद्र सिंह परमार को खेड़ा जिले का प्रभारी नियुक्त किया गया है।
प्रवासी राजस्थानियों को लुभाएंगे राजस्थान के नेता
जबकि उत्तर गुजरात के क्षेत्र की 9 जिलों की 43 विधानसभा सीटों पर प्रवासी राजस्थानियों की संख्या अच्छी खासी है। ऐसे में इन सीटों पर भाजपा के पक्ष में मतदान का जिम्मा राजस्थान के नेताओं को दिया जाएगा। इन 9 जिलों में कच्छ, भुज, गांधी शहर और ग्रामीण, बनासकांठा, पाटन, अहमदाबाद उत्तर और दक्षिण, मोडासा, मेहसाणा, साबरकांठा शामिल है। इन सीटों के लिए राजस्थान के पूर्व मंत्री और राजस्थान भाजपा में प्रदेश महामंत्री सुशील कटारा को संयोजक बनाया गया है। यहां भी हर सीट पर 2-2 और उसके बाद हर जिले में भी 2-2 प्रभारी लगाए हैं। इसके अलावा इन सभी के ऊपर प्रदेश स्तर के तीन नेताओं को प्रभारी बनाया गया। इसकी पूरी जिम्मेदारी सुशील कटारा के पास है। गुजरात में 18 से 20 फीसदी वोटर ऐसा है जो राजस्थानी है। या फिर राजस्थानियों से व्यापार या अन्य दृष्टिकोण से जुड़ा हुआ है। इसलिए ऐसे मतदाताओं को साधने के लिए राजस्थान से प्रभारी लगाए गए हैं।
यूपी के इन नेताओं को मिली ये जिम्मेदारी
गुजरात के चुनावी रण में योगी सरकार के तीन वरिष्ठ मंत्रियों और प्रदेश के दो राज्यसभा सदस्यों को कमल खिलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गुजरात की जिन विधानसभा सीटों की कमान इन नेताओं को सौंपी है। उनमें से अधिकांश पर कांग्रेस काबिज है। जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को कच्छ जिले की अबडासा, मांडवी, भुज, अंजार, गांधीधाम (एससी) और रापर विधानसभा सीट का प्रभारी बनाया गया है। वर्तमान में गांधीधाम, भुज, अंजर, मांडवी सीट भाजपा के पास है जबकि अबडासा और रापर में कांग्रेस काबिज है। राज्यसभा सदस्य लक्ष्मीकांत बाजपेयी को जूनागढ़ जिले का प्रभारी बनाया है। 2017 के विधानसभा चुनाव में जूनागढ़ की माणावदर, जूनागढ़, विसावदर, मांगरोल में कांग्रेस ने चुनाव जीता था। जबकि भाजपा के हिस्से एकमात्र केशोद सीट आई थी।
सहकारिता राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर को महिसागर जिले की बालासिनोर, लुणावाडा और संतरामपुर (एसटी) सीट का प्रभारी बनाया है। 2017 में संतरामपुर में भाजपा, बालासिनोर में कांग्रेस, लुनावाडा में निर्दल प्रत्याशी जीता था। प्रदेश उपाध्यक्ष एवं परिवहन राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार दयाशंकर सिंह को राजकोट जिले की राजकोट ग्राम्य (एससी), जसदण, गोंडल, जेतपुर, धोराजी विधानसभा का प्रभारी बनाया है। राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर को सोमनाथ जिले की सोमनाथ, तलाला, कोडीनार (एससी) व उना सीट की जिम्मेदारी मिली है। 2017 में ये सभी चार सीटें कांग्रेस की झोली में गई थी।
इस बार राज्य में त्रिकोणीय मुकाबला
पिछले 24 साल से गुजरात में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। 12 साल 227 दिन नरेंद्र मोदी खुद मुख्यमंत्री रहे। इनसे पहले केशुभाई पटेल तीन साल 216 दिन मुख्यमंत्री रहे, जबकि मोदी के बाद आनंदीबेन पटेल, विजय भाई रूपाणी भी सीएम रह चुके हैं। अभी भूपेंद्र भाई पटेल मुख्यमंत्री हैं। इन 24 साल में कांग्रेस हमेशा विपक्ष में ही रही है। इस बार आम आदमी पार्टी ने भी पूरी ताकत झोंक दी है। पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल यहां डेरा डाल चुके हैं। ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि, जो सर्वे अभी तक सामने आए हैं, उसके अनुसार मुख्य मुकाबला अभी भी भाजपा और कांग्रेस के बीच ही है।