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Gujarat Election: ‘औकात’, मोरबी से पेपर लीक तक, गुजरात चुनाव में अब तक हुई इन पांच मुद्दों की सबसे ज्यादा बात

Fri, 25 Nov 2022 11:13 AM IST
हिमांशु मिश्रा इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Fri, 25 Nov 2022 11:13 AM IST
सार

गुजरात चुनाव में अब तक कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है। इसके बाद भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें राजनीतिक दल उठा रहे हैं। आज हम आपको ऐसे ही पांच मुद्दों के बारे में बताएंगे। किसी को प्रधानमंत्री मोदी उठा रहे हैं तो कोई मुद्दा राहुल गांधी। आइए इन मुद्दों के बारे में जानते हैं...

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Gujarat Election: 'Aukat',Morbi to paper leak, five issues have been talked about the most in Gujarat election
गुजरात चुनाव 2022 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज से ठीक छठवें दिन गुजरात की 89 विधानसभा सीटों पर पहले चरण का मतदान होना है। इसके लिए राजनीतिक दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल तक चुनाव प्रचार में जुटे हैं। विपक्षी दलों के नेता जहां सरकार की खामियां गिना रहे, वहीं सत्ता पक्ष अपनी सरकार के काम गिना रहा है। इसके साथ ही दोनों ओर से आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। 
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गुजरात चुनाव में अब तक कोई बड़ा चुनावी मुद्दा नहीं बन सका है। इसके बाद भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिन्हें राजनीतिक दल उठा रहे हैं। आज हम आपको ऐसे ही पांच मुद्दों के बारे में बताएंगे। किसी को प्रधानमंत्री मोदी उठा रहे हैं तो कोई मुद्दा राहुल गांधी। आइए इन मुद्दों के बारे में जानते हैं...
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1.  मधुसूदन मिस्त्री का ‘औकात’ वाला बयान
कांग्रेस ने 12 नवंबर को गुजरात चुनाव के लिए अपना घोषणा पत्र जारी किया। इस दौरान एक टीवी चैनल से बात करते हुए कांग्रेस नेता मधुसूदन मिस्त्री ने कहा कि मोदी कभी पटेल नहीं बन सकते। इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करते हुए ‘औकात’ शब्द का जिक्र किया। करीब दस दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी रैली में मिस्त्री के बयान पर पलटवार किया। मोदी ने कहा, “वो कहते हैं औकात दिखा देंगे। मैं कहता हूं मेरी कोई औकात नहीं है। हमारी औकात बस सेवा देने की है। वो राज खानदान से हैं और हम सेवादार हैं।” भाजपा इस बयान को चुनावी मुद्दा बनाने में लगी हुई है।  
 

2. शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली 
 शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली को भी चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश हो रही है। आम आदमी पार्टी सत्ता में आने पर दिल्ली और पंजाब जैसी मुफ्त बिजली, मुहल्ला क्लीनिक और अच्छे स्कूल देने की बात कर रही है। वहीं, कांग्रेस भी अपने घोषणा पत्र में 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की बात कर रही है। 

आप नेताओं का आरोप है कि गुजरात में अच्छे सरकारी स्कूल नहीं हैं। इसके चलते बच्चे प्राइवेट स्कूल में जाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा की कमी है। इसके अलावा स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। वहीं, राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था को लेकर भी मुद्दा बनाया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि इन अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी है। गुजरात में बिजली की दरों को लेकर भी आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सरकार को निशाने पर ले रही है। दोनों ही पार्टियों ने प्रति माह 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया है। 

वहीं, भाजपा ने स्कूल और बिजली के मामले में दिल्ली सरकार को ही कटघरे में खड़ा कर रही है। भाजपा का दावा है कि दिल्ली में स्कूलों की बेहतरी का फर्जी प्रचार किया जा रहा है। भाजपा ने गुजरात में नए अत्याधुनिक स्कूल खुलने का दावा किया। हाल ही में गांधीनगर में पीएम मोदी ने स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का भी शुभारंभ किया था। वहीं, बिजली को लेकर भी भाजपा आप पर पलटवार करती रही है। भाजपा का कहना है कि आप की मुफ्त योजनाएं दिल्ली को बर्बादी की ओर ले जा रहीं हैं। ये भी कहा कि देश में सबसे ज्यादा बिजली का दाम दिल्ली में है। 
 
 
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3. पेपर लीक और सरकारी भर्तियों का मामला
गुजरात में कई बार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबर आ चुकी है। इसके चलते भर्ती परीक्षा टल जाती है। इससे युवा काफी प्रभावित हैं। विपक्ष भी इसे चुनावी मुद्दा बना रहा है। इसी तरह अन्य सरकारी भर्तियों में विलंब का मुद्दा भी चुनावी रैलियों में खूब सुनने को मिल रहा है। हालांकि, भाजपा अलग दावा करती है। भाजपा का दावा है कि सरकारी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हुई है। यही कारण है कि कहीं भी कुछ गलत होने की आशंका होते ही परीक्षा रद्द कर दी जाती है। जो परीक्षाएं होती हैं, उसपर कोई दाग नहीं लगा सकता है। भाजपा रोजगार और स्वरोजगार की योजनाओं के बारे में भी प्रचार कर रही है। 
 
 

4. मोरबी पुल हादसा
30 अक्तूबर को गुजरात के मोरबी में पुल गिर जाने से 135 लोगों की मौत हो गई थी। विपक्ष ने इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव में फायदा उठाने के लिए सरकार ने बिना सोचे-समझे इस पुल को शुरू कर दिया। इसकी मरम्मत का काम जिस कंपनी को दिया गया था, उसपर भी आरोप लगे। कहा गया कि पैसे लेकर ऐसी कंपनी को पुल की मरम्मत का काम दे दिया गया, जिसके पास इसका पहले से कोई अनुभव नहीं है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस लगातार इस मुद्दे को चुनाव में उठा रही है। 

भाजपा भी इसे हादसा बता रही है। इसके अलावा इसके लिए दोषियों पर कार्रवाई की बात भी बोल रही है। यहां तक कि मोरबी के लोग भी इसे मुद्दा नहीं मानते हैं। अमर उजाला की टीम जब मोरबी पहुंची तो लोगों ने इसे हादसा बताया और कहा कि इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
 
 

5. किसानों की समस्याएं
गुजरात में भी किसानों का मुद्दा जोरशोर से उठ रहा है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी लगातार इसके जरिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। पिछले दो साल में राज्य में अत्यधिक बारिश के कारण किसानों की फसल खराब हो गई है। कहा जा रहा है कि सरकार की तरफ से मुआवजा नहीं मिला तो किसान भी आक्रोशित हो गए। राज्य में किसानों ने इसको लेकर आंदोलन भी चलाया।  

भाजपा का कहना है कि गुजरात के किसानों का सरकार ने भरपूर ख्याल रखा है। भाजपा सरकार ही हर महीने किसानों को सम्मान निधि देती है। किसानों की हर समस्याओं का निस्तारण होता है। आज किसानों की आय बढ़ने लगी है।
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