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Naroda Assembly Seat: यहां 29 साल की पायल कुकराणी ने खिलाया कमल, माता-पिता की वजह से रही थीं सुर्खियों में

Mon, 19 Dec 2022 03:58 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 19 Dec 2022 03:58 PM IST
सार

भाजपा ने पायलबेन कुकराणी को उतारा था। पहले ही चुनाव में पायल ने आप के ओमप्रकाश तिवारी को 83,513 वोटों से बड़ी शिकस्त दी। 29 वर्षीय पायल इस विधानसभा चुनाव में जीतने वाले सबसे कम उम्र के चेहरों में से एक हैं। पायल की मां माया कोडनानी गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री रही हैं।

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Gujarat Election 2022: Naroda Assembly Seat Profile and History
गुजरात विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इस बार भारतीय जनता पार्टी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। 182 विधानसभा सीटों वाले गुजरात में भाजपा के 156 प्रत्याशी चुनाव जीत गए। कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। कांग्रेस 77 सीटों से सीधे 17 पर आ गई। मतलब कांग्रेस को 60 सीटों का नुकसान उठाना पड़ा। वहीं, इस बार सरकार बनाने का दावा करने वाली आम आदमी पार्टी के केवल पांच प्रत्याशी ही चुनाव जीत पाए। एक सीट पर सपा उम्मीदवार विजयी हुए तो बाकी तीन सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीतीं।
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गुजरात चुनाव में अहमदाबाद जिले की नरोदा सीट सत्ताधारी भाजपा के लिए सियासी तौर पर बेहद खास है। यहां पार्टी पिछले तीन दशक से भी ज्यादा समय से एक भी चुनाव नहीं हारी है। इस चुनाव के लिए भाजपा ने पायलबेन कुकराणी को उतारा था। पहले ही चुनाव में पायल ने आप के ओमप्रकाश तिवारी को 83,513 वोटों से बड़ी शिकस्त दी। 29 वर्षीय पायल इस विधानसभा चुनाव में जीतने वाले सबसे कम उम्र के चेहरों में से एक हैं। पायल की मां माया कोडनानी गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री रही हैं। माया पर नरोदा पाटिया दंगे में आरोपी रही हैं। 
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2017 में भाजपा ने यहां हासिल की थी जीत  
2017 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। इस चुनाव में भाजपा के बलराम थवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार ओम प्रकाश तिवारी को 60 हजार वोटों से शिकस्त दी थी। इस चुनाव में कुल दस उम्मीदवार मैदान में थे। भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी आठ उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी।  
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इस सीट पर भाजपा लगातार आठवीं बार जीती  
ये सीट पिछले ढाई दशक से भी ज्यादा समय से भाजपा के कब्जे में है। 1990 में भाजपा ने इस सीट पर पहली बार जीत अर्जित की थी हालांकि 1981 के उपचुनाव में भी उसे जीत मिली थी। 1967 जब यहां पहली बार चुनाव हुए थे तब से लेकर 1980 तक कांग्रेस ने लगातार चार चुनाव जीते थे। अबकी बार भी यहां भाजपा को जीत मिली जो उसकी लगातार आठवीं जीत है।

नेता कांग्रेस के लेकिन चुनाव लदा था एनसीपी की सीट पर 
2022 चुनाव के लिए इस सीट पर भाजपा ने अपने मौजूदा विधायक बलराम थवानी का टिकट काट दिया था। थवानी की जगह भाजपा ने पायलबेन मनोजकुमार कुकराणी को मैदान में उतारा था। वहीं, कांग्रेस ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारने की घोषणा की थी। दरअसल, नरोदा उन तीन सीटों में शामिल थी जिनमें एनसीपी के साथ गठबंधन करार के कारण कांग्रेस यहां वो एनसीपी का समर्थन किया था। यहां एक दिलचस्प तथ्य ये भी है कि एनसीपी उम्मीदवार मेघराज मोडवानी मूल रूप से कांग्रेस के ही नेता हैं। इस सीट पर पांच दिसंबर को दूसरे चरण में मतदान हुआ था। नतीजे आठ दिसंबर को आए। 


2017 में अहमदाबाद जिले की 15 सीटों पर जीती थी भाजपा
नरोदा सीट अहमदाबाद जिले में आती है। इस जिले में कुल 21 सीटें हैं। 2017 में जिले की 21 में से 15 सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। वहीं, छह सीटों पर कांग्रेस जीत दर्ज करने में सफल रही थी। 
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