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Gujrat Election: अमित शाह के बयान के बाद गरमाई भरुच की सियासत, मुस्लिम बहुल इलाके में भी भाजपा ने लगाई सेंध

Mon, 28 Nov 2022 09:31 AM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 28 Nov 2022 09:31 AM IST
सार

मुस्लिम बहुल भरुच में दो सीटों पर भाजपा को बढ़त मिलती रही है तो दो अन्य सीटों पर कांग्रेस मजबूत रही है। एक सीट पर दोनों दलों में टक्कर होती रही है। यहां आधे से ज्यादा मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से है।

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Gujarat Election 2022 Bharuch Assembly Seat Amit Shah BJP AAP Arvind Kejriwal muslim factor news and updates
भरूच में दिलचस्प होगा चुनावी समर। - फोटो : Social Media

विस्तार

गुजरात का भरुच जिला उद्योगों की नगरी के रूप में जाना जाता है। जिस तरह सूरत की पहचान कपड़ों और साड़ियों के रूप में है, उसी तरह भरुच की पहचान केमिकल्स की इंडस्ट्री के लिए है। यहां से पूरे भारत में केमिकल्स की सप्लाई की जाती है। बड़ी-बड़ी दवाइयों की कंपनियां यहां अपनी दवाओं का उत्पादन करती हैं। प्राकृतिक गैस के उत्पादन और सप्लाई के लिए भी भरूच पूरे देश में जाना जाता है। 
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भारी औद्योगिक विकास के कारण यहां युवाओं को आसानी से रोजगार मिल जाता है। ज्यादातर लोग अपने निजी व्यवसाय में जुटे हुए हैं तो कुछ विभिन्न कंपनियों में नौकरी करते हैं। गुजरात विधानसभा के इस चुनाव में यहां महंगाई या बेरोजगारी कोई बड़ा  मुद्दा नहीं है। लेकिन यहां की केमिकल कंपनियों के कारण नर्मदा नदी में जा रहा प्रदूषण लोगों के लिए भारी चिंता का कारण बना हुआ है। नर्मदा के लिए यहां के लोगों में बड़ी आस्था है, यह उनके जीवन और रोजगार से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में नर्मदा में बढ़ रहा प्रदूषण लोगों को परेशान कर रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायत है कि भारी औद्योगिक विकास में लोगों के स्वास्थ्य की उपेक्षा की जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में कैंसर और अन्य स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों की बाढ़ आ गई है। 
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स्थानीय पत्रकार बालकृष्ण पांडेय बताते हैं कि यहां का मतदाता अपेक्षाकृत शांत रहता है। वह अपने कामकाज को प्राथमिकता देता है, ज्यादा शोर-शराबा उसके स्वभाव में नहीं है। लेकिन मतदान के समय वह अपनी जिम्मेदारी समझता है और समय निकालकर अपने मनपसंद उम्मीदवार को वोट करने जाता है। स्वभाव के अनुसार इस बार भी यहां का मतदाता अपेक्षाकृत शांत है। पिछले सप्ताह बीजेपी नेता अमित शाह ने यहां की एक जनसभा के दौरान बयान दिया कि 2002 के बाद दंगे करने वाले गुजरात से बाहर चले गए। शाह के इस बयान के बाद इस मुस्लिम बहुल इलाके की सियासत गर्म हो गई है। 

भाजपा के मनसुख भाई बसावा यहां के सांसद हैं जिन्हें पार्टी गुजरात के बड़े नेता के रूप में प्रोजेक्ट कर रही है। यही कारण है कि भाजपा इस बार भी भरुच में अपना दबदबा बनाए रखना चाहती है। इसके लिए पार्टी हर संभव कोशिश कर रही है। भरुच की ही झागड़िया विधानसभा सीट से छोटू भाई बसावा छह बार विधायक चुने जा चुके हैं। उन्हें बड़े आदिवासी नेता के रूप में जाना जाता है और आदिवासी मतदाताओं पर उनकी बेहतर पकड़ चुनाव परिणाम को किसी भी दिशा में मोड़ने की ताकत रखती है।

भरुच और नर्मदा की एरिया में वे बहुत लोकप्रिय हैं। इस बार शुरुआत में वे अरविंद केजरीवाल को सपोर्ट कर रहे थे, लेकिन बाद में दोनों नेताओं के बीच सीटों के तालमेल पर बात नहीं बन पाई। अब अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी  आदिवासियों के बीच पैठ बनाकर स्वयं अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रही है। बसावा जैसे प्रसिद्ध नेता की उपस्थिति के बीच केजरीवाल की कोशिश कितनी सफल हो पाएगी, यह देखने वाली बात होगी। 

स्वास्थ्य बना मुद्दा
समाजसेवी चन्द्रभूषण भाई कथीरिया बताते हैं कि इस क्षेत्र के भारी औद्योगिक विकास की कीमत यहां के लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है, लेकिन सरकारें औद्योगिक कचरे के उचित तरीके से निबटारे को लेकर चुप हैं। कंपनियां अपना कचरा नर्मदा नदी में बहा रही हैं जिससे पूरा वातावरण प्रदूषित हो गया है। यहां के एक बड़े मछुआरा समुदाय की जिंदगी नर्मदा में आई मछलियों को बेचकर हुई आय पर निर्भर करता है, लेकिन नर्मदा में हुई गंदगी ने उनके रोजगार को प्रभावित किया है। नर्मदा के आसपास होने वाली खेती भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे यहां के लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। मछुआरा समुदाय के एक उम्मीदवार के खड़े होने के  कारण यहां भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगने से उसको नुकसान होने की आशंका भी जताई जा रही है।  

मुस्लिम बड़ा फैक्टर
भरुच जिले की वागरा विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। मुस्लिम बहुल भरुच में दो सीटों पर भाजपा को बढ़त मिलती रही है तो दो अन्य सीटों पर कांग्रेस मजबूत रही है। एक सीट पर दोनों दलों में टक्कर होती रही है। यहां आधे से ज्यादा मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से है। पारंपरिक तौर पर यह इलाका कांग्रेस के गढ़ के रूप में माना जाता है। पार्टी यहां से दस बार चुनाव जीत चुकी है, लेकिन पिछले दो विधानसभा चुनावों से यहां के समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं। इस मुस्लिम बहुल सीट पर भी भाजपा ने 2012 और 2017 में जीत दर्ज की थी। पार्टी इस बार भी अपनी जीत का दावा कर रही है और उसने वर्तमान विधायक अरूण सिंह राणा को दुबारा मैदान में उतारा है। उन्हें कांग्रेस के पिछले चुनाव में पराजित उम्मीदवार सुलेमान भाई मुसाभाई पटेल से कड़ी टक्कर मिल रही है। आम आदमी पार्टी के जयराज सिंह भी यहां से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।   

भरुच विधानसभा सीट पर 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत मिली थी। पार्टी ने अपने वर्तमान विधायक दुष्यंत भाई रजनीकांत का टिकट काटकर नया चेहरा मैदान में उतारा है। बीजेपी के नए उम्मीदवार रमेशभाई मिस्त्री अच्छी लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें कांग्रेस के जयकांत पटेल और आम आदमी पार्टी के मनहर परमार से अच्छी टक्कर मिल रही है। लेकिन मतदाताओं का समीकरण कुछ हद तक भाजपा के पक्ष में झुका हुआ है। 
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