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Gujarat: 'चुनाव याचिका को पीआईएल न बनाएं', मुकेश दलाल की निर्विरोध जीत के खिलाफ याचिका पर कोर्ट की टिप्पणी
Wed, 01 May 2024 05:36 PM IST
मेघा झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मेघा झा
Updated Wed, 01 May 2024 05:36 PM IST
सार
सूरत से मुकेश दलाल के निर्विरोध जीतने के बाद गुजरात उच्च न्यायालय में निर्विरोध जीत की चुनौती पर जनहित याचिका दायर की गई थी। इस मामले की तत्काल सुनवाई को करने स इंकार कर दिया गया, उन्होंने कहा कि तत्काल सुनवाई नहीं की जा सकती।
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मुकेश दलाल।
- फोटो : ANI
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विस्तार
सूरत से मुकेश दलाल के निर्विरोध जीतने के बाद गुजरात उच्च न्यायालय में निर्विरोध जीत की चुनौती पर जनहित याचिका दायर की गई थी। इस मामले की तत्काल सुनवाई को करने स इंकार कर दिया गया, उन्होंने कहा कि तत्काल सुनवाई नहीं की जा सकती।
सूरत में कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभानी का नामांकन फॉर्म तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया था, वहीं अन्य उम्मीदवारों ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया था, जिसके बाद मुकेश दलाल को विजेता घोषित किया गया था। मुकेश दलाल के निर्विरोध निर्वाचित होने पर भावेश पटेल ने गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी मायी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उन्हें जनहित याचिका नहीं, चुनाव याचिका दायर करनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह सूरत में एक पंजीकृत मतदाता है, चुनाव आयोग ने बिना मतदान कराए ही मुकेश दलाल को विजेता घोषित कर प्रमाण पत्र दे दिया। इस कारण से वे अपने मतदान के अधिकार से वंचित रह गए।
इस पर न्यायालय ने कहा कि "यदि कोई उम्मीदवार निर्विरोध चुना जाता है, तो वह भी उसी विजेता के समान है जो कि मतदान या वोटों की गिनती के बाद विजेता घोषित होता है। निर्विरोध विजेता किसी अन्य श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि "जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान यह हुआ है। इसे जनहित याचिका का मुद्दा न बनाएं।" उन्होंने यह भी कहा कि कानून के मुताबिक, अगर कोई विवाद किसी उम्मीदवार के चुनाव को लेकर है तो उसे चुनाव याचिका दायर करनी होती है।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा अपने तर्क में आप जिस प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं, जिसके जरिए एक उम्मीदवार को निर्विरोध चुना गया है, यह तर्क चुनाव याचिका के माध्यम से एक प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह कहते हुए जल्द सुनवाई की याचिका खारिज की कि याचिकाकर्ता ने गलत जगह याचिका दायर की है, इसलिए इसमें जल्दबाजी नहीं होगी, वह इसे सामान्य तरीके से ही देखेंगी।
वकील के हाथ जोड़ने पर गुस्साई न्यायाधीश
इस मामले की जल्द सुनवाई करने को लेकर याचिकाकर्ता के वकील न्यायाधीश के सामने हाथ जोड़ रहे थे। इस पर न्यायाधीश ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि वकीलों को अदालत में हाथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्हें अपने पक्ष के अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। उनहोंने कहा कि आप अपना केस रख रहे हैं, इसके लिए हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है।
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सूरत में कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभानी का नामांकन फॉर्म तकनीकी आधार पर खारिज कर दिया गया था, वहीं अन्य उम्मीदवारों ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया था, जिसके बाद मुकेश दलाल को विजेता घोषित किया गया था। मुकेश दलाल के निर्विरोध निर्वाचित होने पर भावेश पटेल ने गुजरात उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध पी मायी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि उन्हें जनहित याचिका नहीं, चुनाव याचिका दायर करनी चाहिए थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि वह सूरत में एक पंजीकृत मतदाता है, चुनाव आयोग ने बिना मतदान कराए ही मुकेश दलाल को विजेता घोषित कर प्रमाण पत्र दे दिया। इस कारण से वे अपने मतदान के अधिकार से वंचित रह गए।
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इस पर न्यायालय ने कहा कि "यदि कोई उम्मीदवार निर्विरोध चुना जाता है, तो वह भी उसी विजेता के समान है जो कि मतदान या वोटों की गिनती के बाद विजेता घोषित होता है। निर्विरोध विजेता किसी अन्य श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि "जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधान यह हुआ है। इसे जनहित याचिका का मुद्दा न बनाएं।" उन्होंने यह भी कहा कि कानून के मुताबिक, अगर कोई विवाद किसी उम्मीदवार के चुनाव को लेकर है तो उसे चुनाव याचिका दायर करनी होती है।
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मुख्य न्यायाधीश ने कहा अपने तर्क में आप जिस प्रक्रिया का जिक्र कर रहे हैं, जिसके जरिए एक उम्मीदवार को निर्विरोध चुना गया है, यह तर्क चुनाव याचिका के माध्यम से एक प्राधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने यह कहते हुए जल्द सुनवाई की याचिका खारिज की कि याचिकाकर्ता ने गलत जगह याचिका दायर की है, इसलिए इसमें जल्दबाजी नहीं होगी, वह इसे सामान्य तरीके से ही देखेंगी।
वकील के हाथ जोड़ने पर गुस्साई न्यायाधीश
इस मामले की जल्द सुनवाई करने को लेकर याचिकाकर्ता के वकील न्यायाधीश के सामने हाथ जोड़ रहे थे। इस पर न्यायाधीश ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि वकीलों को अदालत में हाथ नहीं जोड़ना चाहिए। उन्हें अपने पक्ष के अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। उनहोंने कहा कि आप अपना केस रख रहे हैं, इसके लिए हाथ जोड़ने की जरूरत नहीं है।