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Gujarat Court: दिल्ली के उपराज्यपाल की याचिका खारिज, जानें क्या है वह 20 साल से ज्यादा पुराना मामला

Tue, 09 May 2023 11:24 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, अहमदाबाद
पीटीआई, अहमदाबाद Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 09 May 2023 11:24 PM IST
सार

Gujarat Court: सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर कथित हमले के 20 साल से अधिक पुराने मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना के आवेदन को खारिज कर दिया। इसमें उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे को उनके संवैधानिक पद पर रहने तक स्थगित रखने का अनुरोध किया गया था। पाटकर के वकील ने मंगलवार को यह जानकारी दी

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Gujarat court rejects Delhi LG plea to keep trial in abeyance in 2002 assault case
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अहमदाबाद की एक अदालत ने 2002 में सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर पर हमले के मामले में दिल्ली के उपराज्यपाल (एलजी) वीके सक्सेना की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे को स्थगित रखने का अनुरोध किया गया था। मेधा के अधिवक्ता ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

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अप्रैल 2002 में एलिसब्रिज के तत्कालीन विधायक अमित शाह, वेजलपुर के तत्कालीन विधायक अमित ठाकर (दोनों भाजपा के) और कांग्रेस नेता रोहित पटेल समेत सक्सेना और तीन अन्य पर पाटेकर पर हमला करने का आरोप है। उस दौरान पाटकर गांधी आश्रम में आयोजित शांति बैठक में भाग ले रही थीं।
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सक्सेना ने याचिका दायर कर उनके खिलाफ मुकदमे पर रोक लगाने की मांग की थी, जिसे मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पीसी गोस्वामी की अदालत ने खारिज कर दिया। शाह, ठाकर और पटेल से जिरह से पूरी हो चुकी है, लेकिन जब सक्सेना की बारी आई तो उनके वकील ने उनके खिलाफ मुकदमे पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर कर दी।
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आप ने उपराज्यपाल को घेरा
आम आदमी पार्टी ने गुजरात कोर्ट के फैसले के बाद उपराज्यपाल को घेरा। आप ने दावा किया कि आपराधिक मामले में उपराज्यपाल को संविधान में अभियोग चलाने से छूट का कोई प्रावधान नहीं है। अगर उपराज्यपाल किसी आपराधिक मामले में शामिल पाए जाते हैं तो उन पर  भी मुकदमा चलाया जा सकता है। वर्ष 2002 के दौरान साबरमती आश्रम में मेधा पाटकर पर किए गए हिंसक हमले में उपराज्यपाल आरोपी हैं और गुजरात कोर्ट ने उपराज्यपाल को संविधान में कोई राहत नहीं होने का तर्क देते हुए याचिका खारिज कर दी। आप के वरिष्ठ नेता व मंत्री सौरभ भारद्वाज ने मंगलवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में उपराज्यपाल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने कोर्ट में दाखिल अपनी अर्जी में लिखा है कि उपराज्यपाल का दर्जा राज्यपाल से भी ऊपर है। इस मामले में गुजरात सरकार भी चुप रही, जबकि उसे इसका विरोध करना चाहिए था।


द्वेष से निशाना साध रही आप : भाजपा
प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज राजनीतिक द्वेष से उपराज्यपाल के खिलाफ बयान दे रहे हैं। राजनीतिक पूर्वाग्रह से वे उपराज्यपाल के राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने के मामले को महिला पर हमला करने का मामला बता रहे हैं। यह मामला दो दशक पुराना है। उपराज्यपाल ने अनेक मंत्रियों और विधायकों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले को उजागर किया है। इससे आम आदमी पार्टी बौखलाई हुई है। भारद्वाज अपनी पार्टी के विधायक अब्दुल रहमान के मामले पर चुप क्यों हैं, जिन्हें हाल ही में एक महिला स्कूल प्रिंसिपल पर हमला करने के लिए दोषी ठहराया गया है। इसके अलावा अन्य विधायक प्रकाश जारवाल, अमानतुल्ला खां, सोमनाथ भारती जो सभी महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोपी हैं पर चुप क्यों हैं।

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