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Morbi Bridge Collapse: मोरबी ब्रिज हादसे में गुजरात की कंपनी के एमडी ने अग्रिम जमानत के लिए कोर्ट का रुख किया

Fri, 20 Jan 2023 11:53 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, मोरबी।
पीटीआई, मोरबी। Published by: देव कश्यप Updated Fri, 20 Jan 2023 11:53 PM IST
सार

मामले में अब तक अजंता मैन्युफैक्चरिंग (ओरेवा ग्रुप) के चार कर्मचारियों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें ओरेवा समूह के दो प्रबंधक और दो टिकट बुकिंग क्लर्क शामिल हैं, जो मोरबी पुल का प्रबंधन कर रहे थे।

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Gujarat company MD moves court for pre-arrest bail in Morbi bridge collapse case
मोरबी ब्रिज हादसा (फाइल फोटो)। - फोटो : Social Media

विस्तार

अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक जयसुख पटेल ने मोरबी ब्रिज हादसे में गिरफ्तारी के डर से अग्रिम जमानत के लिए यहां एक अदालत का रुख किया है। अजंता मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड वही फर्म है जिसे मोरबी शहर में हादसे का शिकार हुए सस्पेंशन ब्रिज के संचालन और रखरखाव का ठेका दिया गया था। यह ब्रिज पिछले साल 30 अक्टूबर को ढह गया था, जिसमें 135 लोगों की मौत हो गई थी। सूत्रों ने बताया कि पुल ढहने के मामले में गिरफ्तारी के डर से जयसुख पटेल ने मोरबी की सत्र अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने कहा कि याचिका पर शनिवार को सुनवाई होने की संभावना है।

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अब तक इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है
मामले में अब तक अजंता मैन्युफैक्चरिंग (ओरेवा ग्रुप) के चार कर्मचारियों सहित नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें ओरेवा समूह के दो प्रबंधक और दो टिकट बुकिंग क्लर्क शामिल हैं, जो ब्रिटिश युग के मोरबी पुल का प्रबंधन कर रहे थे। हादसे के तुरंत बाद पुलिस द्वारा दर्ज की गई पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में पटेल का नाम शामिल नहीं था। पुलिस सूत्रों ने कहा कि वे 30 जनवरी से पहले मामले में चार्जशीट दाखिल करेंगे।
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गुजरात सरकार ने स्थानीय नगरपालिका को कारण बताओ नोटिस जारी किया
मोरबी नगरपालिका के साथ हुए एक समझौते के अनुसार, मच्छू नदी पर बने सस्पेंशन ब्रिज का रखरखाव और संचालन ओरेवा समूह द्वारा किया जा रहा था। जयसुख पटेल ने अदालत का रुख ऐसे समय में किया है जब गुजरात सरकार ने स्थानीय नगरपालिका को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उसे अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहने के कारण भंग कर दिया जाए, जिसके कारण यह त्रासदी हुई।
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सरकार द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अन्य बातों के साथ-साथ पुल की मरम्मत, रखरखाव और संचालन में ओरेवा समूह की ओर से कई खामियों का हवाला दिया था। विशेष जांच दल द्वारा बताए गए खामियों में पुल तक पहुंचने वाले व्यक्तियों की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होना, टिकटों की बिक्री पर कोई अंकुश नहीं होना और पुल पर अप्रतिबंधित आवाजाही और विशेषज्ञों से परामर्श किए बिना मरम्मत करना शामिल है।

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