{"_id":"5b578d914f1c1b6e118b5792","slug":"guidelines-for-the-control-of-the-media-itself-chief-justice","type":"story","status":"publish","title_hn":"मीडिया खुद तय करे अपने नियंत्रण के लिए गाइडलाइंस : चीफ जस्टिस","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
मीडिया खुद तय करे अपने नियंत्रण के लिए गाइडलाइंस : चीफ जस्टिस
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 25 Jul 2018 02:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक समाज में ‘सभी तरह की स्वतंत्रता की मां’ समान होती है और मीडिया को खुद पर नियंत्रण के लिए अपनी गाइडलाइंस बनानी चाहिए। ये बात भारत के मुख्य न्यायधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने मंगलवार को इंटरनेशनल लॉ एसोसिएशन के एक समारोह में अध्यक्ष के तौर पर संबोधन में कही। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य जस्टिस एएम खानविलकर भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
'मीडिया पर कुछ भी थोपा न जाए, लेकिन वह खुद अपने लिए कुछ प्रतिबंध बनाए'
सीजेआई मिश्रा ने अपने संबोधन के दौरान कहा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता राष्ट्रीय महत्व के मामलों में आम जनता की राय निर्मित करने में प्रमुख भूमिका निभाती है। साथ ही कहा कि इससे ‘जानकार नागरिक’ तैयार होते हैं। उन्होंने कहा, प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी तरह की स्वतंत्रता की मां है। इसमें कोई शक नहीं कि ये संविधान में दिए गए सबसे मूल्यवान अधिकारों में से एक है। इसमें जानने का अधिकार और सूचित करने का अधिकार भी समाहित है।
विज्ञापन
उन्होंने आगे कहा, मेरा पुख्ता यकीन है कि मीडिया के लिए कोई गाइडलाइंस नहीं होनी चाहिए। उन्हें खुद अपनी गाइडलाइंस तैयार करने के लिए छोड़ देना चाहिए और उसे (मीडिया) को उन्हीं के द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। प्रेस के व्यक्तिगत या सामूहिक दिशानिर्देशों से बेहतर कुछ भी नहीं हो सकत है। इसमें कुछ भी थोपना नहीं चाहिए, लेकिन इसमें कुछ प्रकार के स्व-प्रतिबंध होने चाहिए। सीजेआई ने आगे कहा कि मीडिया को नागरिकों की भावना को भड़काने वाले मामलों की रिपोर्टिंग करते समय निष्पक्षता बनाए रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।
विज्ञापन
तीन पायदान पर ट्रायल प्रभावित करती है मीडिया कवरेज : मेनन
इस समारोह में मशहूर विधिवेत्ता एनआर माधव मेनन ने भी ‘अदालत, मीडिया और निष्पक्ष ट्रायल गारंटी’ विषय पर लेक्चर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया कवरेज तीन पायदानों पर किसी भी मामले के निष्पक्ष ट्रायल को प्रभावित करती है- ट्रायल से पहले, ट्रायल के दौरान और ट्रायल पूरा होने के बाद। उन्होंने इस तरफ इशरा किया कि गवाहों और आरोपी की पहचान का खुल जाना कई तरीके से ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। मेनन ने कहा, मीडिया की तरफ से समानांतर ट्रायल चलाए जाने से जांच एजेंसी को गिरफ्तारी करने के लिए प्रेरित कर सकता है और गवाहों के पलट जाने का भी कारण बन सकता है। उन्होंने आगे जोड़ा कि ट्रायल खत्म हो जाने के बाद यदि मीडिया किसी जज की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाता है तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को भी खतरा पैदा होता है।