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अदालतों तक पहुंच रहे जीएसटी से जुड़े मामले, नई टैक्स व्यवस्था समझने में जुटे जज
एजेंसी, नई दिल्ली
Updated Mon, 20 Nov 2017 12:50 AM IST
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देश की विभिन्न अदालतों में अब गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) से जुड़े मसले भी आने लगे हैं। इसे देखते हुए देश के 12 उच्च न्यायालयों के 20 जजों ने विशेषज्ञों और सरकार के अधिकारियों के साथ नई टैक्स व्यवस्था की उन जटिलताओं को समझने का प्रयास किया जिनकी वजह से आने वाले दिनों में मुकदमों की संख्या बढ़ सकती है।
सार्वजनिक दस्तावेजों के मुताबिक, टॉप डोमेन एक्सपर्ट्स, जीएसटी इंटेलिजेंस व सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज और कस्टम्स (सीबीईसी) अधिकारियों ने जजों को नई टैक्स व्यवस्था के बारे में बताया। भोपाल की नेशनल जुडिशियल अकादमी द्वारा नई जीएसटी व्यवस्था पर उच्च न्यायालायों के जजों के लिए यह बातचीत आयोजित की गई थी। इसका आयोजन नेशनल जुडिशियल कॉन्फ्रेंस में हुआ।
पढ़ें- सूरत में जीएसटी के खिलाफ कपड़ा व्यापारियों का प्रदर्शन
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बैठक के दौरान जीएसटी से जुडे़ टकरावों के संभावित क्षेत्रों, ‘सेंट्रल एक्साइज की तुलना में जीएसटी, सेवाकर और वैट’ जैसे मसलों पर बातचीत हुई। विधि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अकादमी नई टैक्स व्यवस्था के बारे में न्यायपालिका को संवेदनशील कर रही है।
उल्लेखनीय है कि अभी पिछले हफ्ते ही दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में केंद्र से पूछा था कि यदि बिंदी, सिंदूर और काजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है तो सेनेटरी नैपकीन को क्यों नहीं। यही नहीं कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने 31 सदस्यीय जीएसटी परिषद में किसी महिला के नहीं होने पर भी नाराजगी जताई थी। अदालत नैपकीन पर 12 फीसदी जीएसटी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इलाहाबाद, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर सहित कई उच्च न्यायालयों के जजों ने पूछे सवाल
तीन दिन की इस कार्यशाला के दौरान इलाहाबाद, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश और मद्रास हाईकोर्ट्स के न्यायाधीशों ने जीएसटी के नौ विशेषज्ञों से सवाल-जवाब किया।
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सार्वजनिक दस्तावेजों के मुताबिक, टॉप डोमेन एक्सपर्ट्स, जीएसटी इंटेलिजेंस व सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज और कस्टम्स (सीबीईसी) अधिकारियों ने जजों को नई टैक्स व्यवस्था के बारे में बताया। भोपाल की नेशनल जुडिशियल अकादमी द्वारा नई जीएसटी व्यवस्था पर उच्च न्यायालायों के जजों के लिए यह बातचीत आयोजित की गई थी। इसका आयोजन नेशनल जुडिशियल कॉन्फ्रेंस में हुआ।
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बैठक के दौरान जीएसटी से जुडे़ टकरावों के संभावित क्षेत्रों, ‘सेंट्रल एक्साइज की तुलना में जीएसटी, सेवाकर और वैट’ जैसे मसलों पर बातचीत हुई। विधि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अकादमी नई टैक्स व्यवस्था के बारे में न्यायपालिका को संवेदनशील कर रही है।
उल्लेखनीय है कि अभी पिछले हफ्ते ही दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में केंद्र से पूछा था कि यदि बिंदी, सिंदूर और काजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है तो सेनेटरी नैपकीन को क्यों नहीं। यही नहीं कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ ने 31 सदस्यीय जीएसटी परिषद में किसी महिला के नहीं होने पर भी नाराजगी जताई थी। अदालत नैपकीन पर 12 फीसदी जीएसटी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
इलाहाबाद, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर सहित कई उच्च न्यायालयों के जजों ने पूछे सवाल
तीन दिन की इस कार्यशाला के दौरान इलाहाबाद, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, आंध्र प्रदेश, बॉम्बे, कलकत्ता, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश और मद्रास हाईकोर्ट्स के न्यायाधीशों ने जीएसटी के नौ विशेषज्ञों से सवाल-जवाब किया।