प्रधानमंत्री जी, गंगा स्वच्छ नहीं और मैली हुई, ये है असली हकीकत
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाने की दिशा में काफी काम होने की बात कही है लेकिन हकीकत इससे कहीं उलट है। गंगा की हालत पिछले वर्ष की अपेक्षा और ज्यादा खराब हुई है।
कुछ दिन पहले ही केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने टेनरियों और जल निगम एमडी को नोटिस भेजकर कहा था कि इन दोनों की वजह से गंगा में प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। बोर्ड की रिपोर्ट में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार कानपुर की गंगा में कॉलीफार्म (हानिकारक रासायनिक तत्व) की मात्रा बढ़ी हुई पाई गई है।
कानपुर से कन्नौज के बीच गंगा किनारे 400 से अधिक टेनरियां स्थापित हैं। इन टेनरियों को आए दिन किसी और जगह स्थापित करने की बात की जाती है। इसे लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) में सुनवाई लगातार चल रही है।
एनजीटी ने पिछली सुनवाई में हरिद्वार से लेकर कानपुर के बीच गंगा की हालत पर चिंता जताई है। तीन महीने पहले डॉ. मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली पार्लियामेंट्री बोर्ड की टीम ने भी गंगा की हालत और टेनरियों का निरीक्षण किया था। इसमें भी हालात बहुत अच्छे नहीं बताए गए थे।
उधर केंद्र सरकार के दावे के विपरीत इलाहाबाद में गंगा की स्थिति लगातार खराब हो रही है। इलाहाबाद में नालों का पानी भी सीधे गंगा में गिर रहा है। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से भी बिना ट्रीटमेंट के चोरी-छिपे गंदा पानी सीधे गंगा में गिराया जा रहा है। अब अचानक प्रधानमंत्री मोदी का मन की बात में गंगा को साफ सुथरा बता देना लोगों के गले नहीं उतर रही है।
एक साल में 10 हजार बढ़ा कॉलीफार्म
गंगा का जल स्तर घटने की वजह से पेयजल की समस्या बढ़ने के साथ ही साथ प्रदूषण में भी तेजी से इजाफा हुआ है। पिछले एक महीने के अंतराल में गंगा नदी में हानिकारक बैक्टीरिया कॉलीफार्म की मात्रा बढ़ गई है।
जनवरी में गंगा के प्रति 100 मिली पानी में कॉलीफार्म बैक्टीरिया की संख्या 69 हजार थी अब यह 79 हजार हो गई है। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लेटेस्ट रिपोर्ट में कहा गया कि बिठूर के आसपास की गंगा में कॉलीफार्म बैक्टीरिया की मात्रा में पिछले महीने से इस महीने कुछ कमी आई है, लेकिन कन्नौज और कानपुर शहर की गंगा में इसकी मात्रा तेजी से बढ़ी है।
स्किमर भी दो घाटों तक सिमटा
गंगा सफाई के लिए कुछ महीने पहले एक मशीन (स्किमर) लाई गई थी। जो बैराज से लेकर जाजमऊ के बीच गंगा घाटों के आसपास कचरा साफ करती थी। सिर्फ 25 दिन ही इस मशीन ने ठीक से काम किया। इसके बाद गंगा का जल स्तर नीचे चला गया।
इसकी वजह से स्किमर दो घाटों तक ही सिमट कर रह गया। इस समय स्किमर से सिर्फ परमट और पत्थर घाट के आसपास जैसे तैसे सफाई हो पा रही है। गंगा में अभी भी फूल और मूर्ति का विसर्जन किया जा है।
हरिद्वार में गंगा में गिर रहे 40 गंदे नाले
धर्मनगरी में जीवनदायिनी गंगा में निरंतर गिरते गंदे नाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गंगा की स्वच्छता के दावों को आइना दिखा रहे हैं। मोदी सरकार को दो साल होने को हैं। अभी भी गंदे नाले गंगा में ज्यों के त्यों के त्यों गिर रहे हैं।
अनगिनत छोटी नालियों की गंदगी गंगा में जाने से रोकना तो दूर टेपिंग के लिए चिह्नित पांच बड़े नाले गंगा नदी में गिराए जा रहे हैं। बजट नहीं मिलने के चलते दो साल से पेयजल निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) के इंजीनियर खाली बैठे हैं। केंद्र की नमामि गंगे योजना का दूर-दूर तक अता पता नहीं है।
पांच बड़े गंदे नालों की टेपिंग, पुराने टेप नालों के सुधार कार्य आदि की डीपीआर फाइलों में अटकी हुई है। कार्यदायी संस्था की ही बात को सही मान लिया जाए तो धर्मनगरी में 40 एमएलडी सीवर सीधे गंगा जा रही है।
गंगा में खनन हुआ तो केंद्र भी दोषी : शिवानंद
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने केंद्र सरकार की ओर से गंगा और उसकी पांच सहयोगी नदियों में खनन की अनुमति देने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि अगर गंगा में खनन हुआ तो केंद्र सरकार भी बराबर की जिम्मेदार होगी।
तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से हरिद्वार में गंगा और उसकी सहयोगी नदियों में खनन की अनुमति प्रदान की गई है। केंद्र सरकार के इस निर्णय का विरोध करते हुए स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जिस समय राज्य सरकार ने यह प्रस्ताव भेजा था उसी समय मातृसदन की ओर से आपत्ति दर्ज करा दी गई थी।
पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में इस पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि उनकी आपत्ति के बाद केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में दोबारा जांच कराने के आदेश भी दिए गए थे। जांच अभी जारी है। इसके बाद भी खनन की अनुमति दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।