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बैंकों में CCTV का सच, कहीं लगे नहीं, कहीं खराब
अमर उजाला नेटवर्क
Updated Thu, 15 Dec 2016 02:37 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों को हिदायत दी है कि 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान के बाद से 30 दिसंबर तक करेंसी चेस्ट की फुटेज सहेज कर रखें। इस बाबत अमर उजाला ने कई शहरों में हालात का जमीनी जायजा लिया।
जायजे के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों की हकीकत सामने आई। यहां कई बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगे ही नहीं हैं। कुछ बैंकों ने तो इसी महीने कैमरे लगाए हैं। ऐसे में नवंबर की फुटेज इन बैंकों से मिलना संभव नहीं है।
आरबीआई के आदेश के बाद सक्रिय हुई कानपुर पुलिस
वैसे तो हर महीने बैंक अधिकारी सीसीटीवी फुटेज और अलार्म के काम करने का प्रमाणपत्र पुलिस को देते हैं, लेकिन नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों से सीसीटीवी सुरक्षित रखने के निर्देशों के बीच कानपुर पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
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एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि कानपुर में 770 बैंकों की शाखाओं में सीसीटीवी कैमरों और अलार्म सिस्टम की जांच पुलिस नियमित करती है और इसकी रिपोर्ट संबंधित थाना और बैंक अधिकारी देते हैं। इसकी एंट्री भी थाने के रजिस्टर में नियमित होती है।
ऐसी स्थिति में बैंक चाह कर भी गोलमाल नहीं कर सकते। जिस बैंक के सीसीटीवी कैमरे ठीक होने की पुलिस रिपोर्ट लगी होगी उन बैंकों के अधिकारी सीसीटीवी कैमरा खराब होने का बहाना नहीं कर पाएंगे।
लखनऊ के ग्रामीण बैंकों में शोपीस बने सीसीटीवी
लखनऊ जिले में बैंकों की करीब 850 शाखाएं हैं। यहां अधिकतर ग्रामीण शाखाओं में सीसीसीवी शोपीस बने हुए हैं। यहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और उन्हें 24 घंटे चलाने के लिए पॉवर बैकअप तक की व्यवस्था नहीं है। मोहनलालगंज के एचडीएफसी बैंक में सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग और स्क्रीन पर विज्युल देखने तक की व्यवस्था नहीं मिली।
मोहनलालगंज के बैंक ऑफ इंडिया में आठ कैमरे लगे हैं जिन्में 4 तो खराब हैं। अलबत्ता शहर के तेलीबाग और राजाजीपुरम इलाके में बैंकों के सीसीटीवी काम करते मिले। केनरा बैंक प्रबंधक का दावा है कि उनके यहां तीन महीने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है।
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जायजे के दौरान ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों की हकीकत सामने आई। यहां कई बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगे ही नहीं हैं। कुछ बैंकों ने तो इसी महीने कैमरे लगाए हैं। ऐसे में नवंबर की फुटेज इन बैंकों से मिलना संभव नहीं है।
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आरबीआई के आदेश के बाद सक्रिय हुई कानपुर पुलिस
वैसे तो हर महीने बैंक अधिकारी सीसीटीवी फुटेज और अलार्म के काम करने का प्रमाणपत्र पुलिस को देते हैं, लेकिन नोटबंदी के बाद बैंक अधिकारियों से सीसीटीवी सुरक्षित रखने के निर्देशों के बीच कानपुर पुलिस भी सक्रिय हो गई है।
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एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि कानपुर में 770 बैंकों की शाखाओं में सीसीटीवी कैमरों और अलार्म सिस्टम की जांच पुलिस नियमित करती है और इसकी रिपोर्ट संबंधित थाना और बैंक अधिकारी देते हैं। इसकी एंट्री भी थाने के रजिस्टर में नियमित होती है।
ऐसी स्थिति में बैंक चाह कर भी गोलमाल नहीं कर सकते। जिस बैंक के सीसीटीवी कैमरे ठीक होने की पुलिस रिपोर्ट लगी होगी उन बैंकों के अधिकारी सीसीटीवी कैमरा खराब होने का बहाना नहीं कर पाएंगे।
लखनऊ के ग्रामीण बैंकों में शोपीस बने सीसीटीवी
लखनऊ जिले में बैंकों की करीब 850 शाखाएं हैं। यहां अधिकतर ग्रामीण शाखाओं में सीसीसीवी शोपीस बने हुए हैं। यहां लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और उन्हें 24 घंटे चलाने के लिए पॉवर बैकअप तक की व्यवस्था नहीं है। मोहनलालगंज के एचडीएफसी बैंक में सीसीटीवी की रिकॉर्डिंग और स्क्रीन पर विज्युल देखने तक की व्यवस्था नहीं मिली।
मोहनलालगंज के बैंक ऑफ इंडिया में आठ कैमरे लगे हैं जिन्में 4 तो खराब हैं। अलबत्ता शहर के तेलीबाग और राजाजीपुरम इलाके में बैंकों के सीसीटीवी काम करते मिले। केनरा बैंक प्रबंधक का दावा है कि उनके यहां तीन महीने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जा रही है।
पंजाब के ग्रामीण शाखाओं में सीसीटीवी ही नहीं
पंजाब के अबोहर में ग्रामीण शाखाओं में सीसीटीवी ही नहीं
पंजाब के अबोहर में कई बैंकों की ग्रामीण शाखाओं में सीसीटीवी कैमरे हैं ही नहीं। कुछ बैंकों में इसी माह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे वहां पर नोटबंदी के तत्काल बाद की कोई फुटेज उपलब्ध नहीं है। अबोहर एसबीआई के मैनेजर का दावा है कि उनके बैंक में 6 माह की फुटेज उपलब्ध है।
यहां पीएनबी की चारों और गांवों दसों शाखाओं में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। नई मंडी स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक में नवंबर तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे, लेकिन 2 दिसंबर को चोरी के बाद बैंक में कैमरे लगवाए गए जो 6 दिसंबर से चालू हो सके। ऐसे में पंजाब एंड सिंध बैंक में नवंबर की फुटेज नहीं है।
यहां ओबीसी में कैमरे तो चल रहे हैं, लेकिन रिकॉर्डिंग की जानकारी बैंक प्रबंधक को नहीं है। पंजाब के बठिंडा स्थित सतलुज ग्रामीण बैंक के मैनेजर का कहना है कि उनके बैंक की हर शाखा ने पिछले एक माह की सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखी हुई है।
चंडीगढ़ में बैंकों की बहानेबाजी शुरू
चंडीगढ़ के बैकों ने आरबीआई के निर्देश के बाद सीसीटीवी कैमरे खराब होने की बहानेबाजी शुरू कर दी है। एक बैंक मैनेजर का तो यहां तक कहना है कि उनके पास एक माह से ज्यादा पुरानी फुटेज रखने की व्यवस्था नहीं है।
कई बैंकों के प्रबंधक सीसीटीवी कैमरे ठीक करवाने की बात कर रहे हैं। कइयों का कहना है कि बत्ती गुल होने के दौरान सीसीटीवी कैमरों में रिकार्डिंग नहीं होती। इसलिए बत्ती गुल होने के दौरान की रिकॉर्डिंग नहीं मिल पाएगी।
हिमाचल के बैंकों ने संभाल रखी है एक माह की फुटेज
हिमाचल में सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं सीसीटीवी से लैस हैं। यहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थित सभी बैंकों में कैमरे लगे हुए हैं। इन बैंकों ने एक माह की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी संभाल रखी है। बैं
कों में दो से लेकर छह माह तक की रिकार्डिंग को सहेज कर रखने की व्यवस्था भी है। बिजली नहीं होने पर जेनरेटर से कैमरे चलाए जाते हैं और जहां जेनरेटर नहीं हैं, वहां यूपीएस से रिकॉर्डिंग की जा रही है।
पंजाब के अबोहर में कई बैंकों की ग्रामीण शाखाओं में सीसीटीवी कैमरे हैं ही नहीं। कुछ बैंकों में इसी माह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिससे वहां पर नोटबंदी के तत्काल बाद की कोई फुटेज उपलब्ध नहीं है। अबोहर एसबीआई के मैनेजर का दावा है कि उनके बैंक में 6 माह की फुटेज उपलब्ध है।
यहां पीएनबी की चारों और गांवों दसों शाखाओं में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। नई मंडी स्थित पंजाब एंड सिंध बैंक में नवंबर तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे, लेकिन 2 दिसंबर को चोरी के बाद बैंक में कैमरे लगवाए गए जो 6 दिसंबर से चालू हो सके। ऐसे में पंजाब एंड सिंध बैंक में नवंबर की फुटेज नहीं है।
यहां ओबीसी में कैमरे तो चल रहे हैं, लेकिन रिकॉर्डिंग की जानकारी बैंक प्रबंधक को नहीं है। पंजाब के बठिंडा स्थित सतलुज ग्रामीण बैंक के मैनेजर का कहना है कि उनके बैंक की हर शाखा ने पिछले एक माह की सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखी हुई है।
चंडीगढ़ में बैंकों की बहानेबाजी शुरू
चंडीगढ़ के बैकों ने आरबीआई के निर्देश के बाद सीसीटीवी कैमरे खराब होने की बहानेबाजी शुरू कर दी है। एक बैंक मैनेजर का तो यहां तक कहना है कि उनके पास एक माह से ज्यादा पुरानी फुटेज रखने की व्यवस्था नहीं है।
कई बैंकों के प्रबंधक सीसीटीवी कैमरे ठीक करवाने की बात कर रहे हैं। कइयों का कहना है कि बत्ती गुल होने के दौरान सीसीटीवी कैमरों में रिकार्डिंग नहीं होती। इसलिए बत्ती गुल होने के दौरान की रिकॉर्डिंग नहीं मिल पाएगी।
हिमाचल के बैंकों ने संभाल रखी है एक माह की फुटेज
हिमाचल में सभी राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं सीसीटीवी से लैस हैं। यहां शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में स्थित सभी बैंकों में कैमरे लगे हुए हैं। इन बैंकों ने एक माह की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग भी संभाल रखी है। बैं
कों में दो से लेकर छह माह तक की रिकार्डिंग को सहेज कर रखने की व्यवस्था भी है। बिजली नहीं होने पर जेनरेटर से कैमरे चलाए जाते हैं और जहां जेनरेटर नहीं हैं, वहां यूपीएस से रिकॉर्डिंग की जा रही है।
देहरादून के बैंकों में आठ नवंबर से पहले की भी रिकॉर्डिंग मौजूद
दून के बैंकों में आठ नवंबर से पहले की भी रिकॉर्डिंग मौजूद
दून के बैंकों में भी भी सीसीटीवी कैमरे चल रहे हैं और रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित है। यहां पीएनबी के पास 90 दिन पुरानी सीसीटीवी फुटेज तक मौजूद है। वहीं देहरादून एसबीआई के पास दो महीने तक की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित है।
यूनियन बैंक के अधिकारी मुकेश सिंह ने बताया कि बैंकों को सीसीटीवी का 90 दिन का बैकअप दिया गया है। लिहाजा देहरादून के बैंक आसानी से सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करा देंगे। जम्मू के अधिकांश बैंकों में पहले से ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहेजकर रखी जा रही है।
रोहतक के अधिकतर बैंकों में नोटबंदी से बाद का डाटा सुरक्षित
हरियाणा के अधिकतर जिलों में बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और इनमें नोटबंदी के बाद से अब तक का डाटा सुरक्षित है। कैथल में कुछ बैंकों के सीसीटीवी छोड़ दें तो सभी जगह कैमरे दुरुस्त हैं।
बिजली जाने की स्थिति में भी बैंकों के कामकाज पर असर नहीं पड़ता, क्योंकि लगभग सभी शाखाओं में जेनरेटर मौजूद हैं। ओबीसी राजौंद तीन सीसीटीवी कैमरे खराब हैं, उन्हें ठीक करवाने के लिए प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों को लिखा है।
(कानपुर/लखनऊ/रोहतक/बठिंडा/शिमला और जम्मू से मिले इनपुट पर आधारित)
दून के बैंकों में भी भी सीसीटीवी कैमरे चल रहे हैं और रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित है। यहां पीएनबी के पास 90 दिन पुरानी सीसीटीवी फुटेज तक मौजूद है। वहीं देहरादून एसबीआई के पास दो महीने तक की सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित है।
यूनियन बैंक के अधिकारी मुकेश सिंह ने बताया कि बैंकों को सीसीटीवी का 90 दिन का बैकअप दिया गया है। लिहाजा देहरादून के बैंक आसानी से सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध करा देंगे। जम्मू के अधिकांश बैंकों में पहले से ही सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सहेजकर रखी जा रही है।
रोहतक के अधिकतर बैंकों में नोटबंदी से बाद का डाटा सुरक्षित
हरियाणा के अधिकतर जिलों में बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और इनमें नोटबंदी के बाद से अब तक का डाटा सुरक्षित है। कैथल में कुछ बैंकों के सीसीटीवी छोड़ दें तो सभी जगह कैमरे दुरुस्त हैं।
बिजली जाने की स्थिति में भी बैंकों के कामकाज पर असर नहीं पड़ता, क्योंकि लगभग सभी शाखाओं में जेनरेटर मौजूद हैं। ओबीसी राजौंद तीन सीसीटीवी कैमरे खराब हैं, उन्हें ठीक करवाने के लिए प्रबंधन ने उच्चाधिकारियों को लिखा है।
(कानपुर/लखनऊ/रोहतक/बठिंडा/शिमला और जम्मू से मिले इनपुट पर आधारित)