Tripura: "35% लोगों को बजट का 2.70% हिस्सा", टिपरा मोथा प्रमुख बोले- ये 'सबका साथ सबका, विकास' नहीं भेदभाव है
Tripura: देबबर्मा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले एक जुलाई को उन्होंने नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी और उनसे ''ग्रेटर टिपरालैंड'' की अपनी मांग का ''संवैधानिक समाधान'' करने का अनुरोध किया था।
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त्रिपुरा में मुख्य विपक्षी दल टिपरा मोथा ने रविवार को दावा किया है कि ग्रेटर टिपरालैंड राज्य मूल निवासियों के भविष्य को सुरक्षित करेगा। पार्टी के पहले पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए टिपरा मोथा सुप्रीमो प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने पूर्वोत्तर राज्य में आदिवासी बहुल क्षेत्र के लिए और धन की भी मांग की है। उन्होंने कहा, 'ग्रेटर टिपरालैंड को हासिल करने की मांग उठाई गई है क्योंकि यह तिप्रासा (मूल निवासियों) लोगों के हितों की रक्षा करेगा। उन्होंने त्रिपुरा की राजधानी अगरतला से 20 किलोमीटर दूर खुमुल्वांग में कहा, "मैं राज्य कांग्रेस का अध्यक्ष और सिक्किम का प्रभारी था लेकिन मैंने एनआरसी के मुद्दे पर पद छोड़ने का फैसला किया।"
देबबर्मा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब कुछ दिन पहले एक जुलाई को उन्होंने नयी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी और उनसे ''ग्रेटर टिपरालैंड'' की अपनी मांग का ''संवैधानिक समाधान'' करने का अनुरोध किया था। उन्होंने मार्च में भगवा पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद इस मुद्दे पर शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ भी चर्चा की थी।
ग्रेटर तिपरालैंड राज्य की अवधारणा को निर्दिष्ट नहीं किया गया है, हालांकि इसमें त्रिपुरा के अलावा कई अन्य पूर्वोत्तर राज्यों और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों को शामिल किया जाना है। त्रिपुरा के पूर्व शाही परिवार के वंशज देबबर्मा ने 2019 में कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद टिपरा मोथा का गठन किया था। भाजपा शासित राज्य में 60 सदस्यीय विधानसभा में क्षेत्रीय पार्टी के अब 13 विधायक हैं।
राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए देबबर्मा ने आरोप लगाया कि त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) क्षेत्र जो राज्य क्षेत्र का दो-तिहाई है और आदिवासियों का घर है, उसे राज्य के वार्षिक बजट का केवल एक छोटा सा हिस्सा मिलता है।
उन्होंने कहा, "टीटीएएडीसी क्षेत्र में कुल मिलाकर 15 लाख टिपरासा लोग रहते हैं। 35 प्रतिशत लोगों के लिए केवल 2.70 प्रतिशत निधि स्वीकृत की जाती है जबकि 65 प्रतिशत आबादी को राज्य के बजट का 98 प्रतिशत मिलता है। यह सबका साथ सबका विकास नहीं बल्कि भेदभाव है।"