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नानी का अधिक दुलार भी नहीं ले सकता मां-बाप की जगह : बॉम्बे हाईकोर्ट

Thu, 04 Mar 2021 12:06 PM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Thu, 04 Mar 2021 12:06 PM IST
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Grandma s bond with grandchild special but she can not replace parents: Bombay HC
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को नासिक की एक 12 वर्षीय बच्ची की कस्टडी को लेकर फैसला सुनाते हुए कहा कि नानी का अपनी नातिन के प्रति विशेष लाड-दुलार होता है, लेकिन वह दुलार उसके माता-पिता की जगह नहीं ले सकता है। इसी के साथ कोर्ट ने बच्ची की कस्टडी उसके माता-पिता को दे दी।

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नासिक के एक दंपती ने इस साल की शुरुआत में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। दंपती ने अपने बच्चे को अपने साथ ले जाने के लिए उच्च न्यायालय में गुहार लगाई थी। उन्होंने अदालत में बताया कि बच्ची की मां की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी। डॉक्टर ने पूरी तरह बेडरेस्ट की सलाह दी थी, इसलिए 2019 में वह अपनी बच्ची को लेकर कुछ समय के लिए अपनी मां के घर नासिक आ गई थी। 
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इस दौरान बच्ची की पढ़ाई ना छूटे इसलिए उसका दाखिला नासिक के ही एक स्कूल में करवा दिया गया। वर्ष 2020-21 के शैक्षणिक सत्र तक महिला की तबीयत ठीक हो गई, तो उसने पुणे अपने घर लौटने की तैयारी कर ली, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते उन्हें नासिक में ही रुकना पड़ा। मई, 2020 में महिला पुणे लौट आई और बच्ची का पुणे के एक स्कूल में दाखिला करवा दिया गया, बच्ची कोविड काल में नासिक में रहते हुए ऑनलाइन कक्षाएं ले रही थी। 
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नानी ने नातिन लिए अपनाया ये हथकंडा 
दंपती कुछ समय बाद अपनी बच्ची को पुणे वापस लाने के लिए नासिक पहुंचे, तो उसकी नानी ने बच्ची को भेजने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं नानी ने बच्ची को अपने पास रखने के लिए पुलिस और बाल कल्याण समिति का इस्तेमाल किया। नानी पुलिस और बाल कल्याण समिति को बताया कि बच्ची के माता-पिता के बीच वैवाहिक संबंध सामान्य नहीं हैं, जो 12 वर्षीय मासूम पर बुरा असर डाल रहे हैं और यह बच्ची के लिए ठीक नहीं है, ऐसी स्थिति में बच्ची का नानी के पास रहना ही ठीक रहेगा। इसके बाद दंपती ने बच्ची की कस्टडी पाने के लिए अदालत का रुख किया। 

अपनी लाडली का वापस लाने के लिए दंपती ने दी ये दलील

न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और मनीष पितले की अध्यक्षता वाली बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच ने दंपती की दलील को स्वीकारते हुए बच्ची की कस्टडी उसके माता-पिता को सौंप दी। दंपती ने बच्ची को अपने साथ ले जाने के लिए अदालत में दलील दी थी कि बच्ची के पिता एक मल्टीनेशलन कंपनी में वरिष्ठ पद पर हैं, जबकि नानी शिक्षित नहीं और ना ही उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी है, ऐसी स्थिति में बच्ची के शारीरिक, नैतिक और बौद्धिक विकास, अच्छी परवरिश और अच्छे भविष्य के लिए उसे माता-पिता के साथ रहने की जरूरत है। 

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