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Airlines: उड़ानों में जीपीएस स्पूफिंग पर वैश्विक एयरलाइंस संगठन चिंतित, IATA बोला- पायलटों को सतर्क रहना होगा

Mon, 15 Dec 2025 04:06 AM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Mon, 15 Dec 2025 04:06 AM IST
सार

आईएटीए ने उड़ानों के दौरान जीपीएस स्पूफिंग और जैमिंग की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन के अनुसार, जीपीएस सिग्नल खोने के मामले तेजी से बढ़े हैं, जो विमानन सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

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GPS spoofing aviation IATA warning flights airline safety interference jamming aircraft
इंडिगो की फ्लाइट (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

दुनिया भर में उड़ानों की सुरक्षा पर एक नया और गंभीर खतरा सामने आ रहा है। वैश्विक एयरलाइंस संगठन इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन यानी आईएटीए ने उड़ानों के दौरान जीपीएस स्पूफिंग और जैमिंग की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। आईएटीए का कहना है कि इन मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है और इससे विमानों की दिशा, ऊंचाई और लोकेशन से जुड़ी जानकारी गड़बड़ा सकती है। संगठन ने पायलटों को पहले से ज्यादा सतर्क रहने की सलाह दी है।
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आईएटीए करीब 360 एयरलाइनों का प्रतिनिधित्व करता है, जो दुनिया के कुल हवाई यातायात का 80 प्रतिशत से ज्यादा संभालती हैं। इसमें एअर इंडिया, इंडिगो, एअर इंडिया एक्सप्रेस और स्पाइसजेट जैसी भारतीय एयरलाइंस भी शामिल हैं। हाल के महीनों में भारत के कई बड़े शहरों में हवाईअड्डों के आसपास जीपीएस स्पूफिंग और इंटरफेरेंस की घटनाएं दर्ज की गई हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, अमृतसर, हैदराबाद, बंगलूरू और चेन्नई जैसे हवाईअड्डों के पास ऐसी दिक्कतें सामने आ चुकी हैं, जिससे पायलटों और एयर ट्रैफिक कंट्रोल की चिंता बढ़ गई है।
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दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही घटनाएं
आईएटीए के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा कि जीपीएस स्पूफिंग और जैमिंग की घटनाएं अब केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया में देखी जा रही हैं। आईएटीए के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 में हर 1,000 उड़ानों पर जीपीएस सिग्नल खोने की दर 31 थी। यह आंकड़ा 2024 में बढ़कर 56 तक पहुंच गया है। संगठन का अनुमान है कि 2025 में यह संख्या 59 तक जा सकती है, जो साफ तौर पर बढ़ते खतरे की ओर इशारा करती है।
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क्यों गंभीर है यह समस्या?
आईएटीए ने साफ किया है कि जीपीएस सिग्नल खोने की यह बढ़ोतरी केवल उड़ानों की संख्या बढ़ने की वजह से नहीं है। असल वजह जीपीएस इंटरफेरेंस और स्पूफिंग की घटनाओं में वास्तविक इजाफा है। इससे विमान की नेविगेशन प्रणाली को गलत जानकारी मिल सकती है। ऐसी स्थिति में पायलटों को मैनुअल तरीकों और वैकल्पिक सिस्टम पर निर्भर होना पड़ता है, जिससे उड़ान संचालन और सुरक्षा पर दबाव बढ़ जाता है।


पायलटों को सतर्क रहने की सलाह
आईएटीए ने कहा है कि मौजूदा हालात को देखते हुए पायलटों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी होगी। उड़ान के दौरान नेविगेशन सिस्टम में किसी भी तरह की असामान्यता दिखने पर तुरंत वैकल्पिक प्रक्रियाओं को अपनाना जरूरी है। एयरलाइंस और नियामक एजेंसियों से भी कहा गया है कि वे इस खतरे को गंभीरता से लें और तकनीकी उपायों को मजबूत करें, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो।

क्या है जीपीएस स्पूफिंग?
जीपीएस या जीएनएसएस स्पूफिंग का मतलब है गलत या नकली सिग्नल भेजकर विमान की नेविगेशन प्रणाली को भ्रमित करना। इससे विमान को गलत लोकेशन या दिशा का संकेत मिल सकता है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन यानी आईसीएओ इसे रेडियो फ्रीक्वेंसी इंटरफेरेंस का एक रूप मानता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो यह भविष्य में विमानन सुरक्षा के लिए और भी बड़ा खतरा बन सकता है।

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