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PIB Fact Check योजना के विरोध पर बोले आईटी मंत्री, प्रस्ताव लागू करने से पहले हितधारकों से चर्चा करेगी सरकार
Tue, 24 Jan 2023 07:55 PM IST
गुलाम अहमद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गुलाम अहमद
Updated Tue, 24 Jan 2023 07:55 PM IST
सार
PIB Fact Check: आईटी नियम 2021 में प्रस्तावित संशोधन पर सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि पीआईबी फैक्ट चेक पर हम अगले महीने की शुरुआत में अलग परामर्श आयोजित करेंगे। चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट पर परामर्श खत्म हो गया है। अब इसे अधिसूचित किया जाएगा।
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राजीव चंद्रशेखर
- फोटो : ANI
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विस्तार
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) को सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों की निगरानी का अधिकार देने की योजना को लेकर विरोध के बीच केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने मंगलवार को कहा कि प्रस्ताव लागू होने से पहले सरकार अगले महीने हितधारकों के साथ चर्चा करेगी। चंद्रशेखर ने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग को विनियमित करने के नियमों को 31 जनवरी तक अधिसूचित किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा।
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आईटी नियम 2021 में प्रस्तावित संशोधन पर सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि पीआईबी फैक्ट चेक पर हम अगले महीने की शुरुआत में अलग परामर्श आयोजित करेंगे। चंद्रशेखर ने यह भी कहा कि डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट पर परामर्श खत्म हो गया है। अब इसे अधिसूचित किया जाएगा।
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इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने पिछले सप्ताह सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम 2021 में संशोधन का मसौदा जारी किया था और इस पर सार्वजनिक परामर्श आमंत्रित किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग के लिए नियम बनाने पर परामर्श जारी है। इसमें पीआईबी या सरकार द्वारा अधिकृत किसी भी एजेंसी को झूठी, नकली या भ्रामक के रूप में पहचानी गई सामग्री को हटाने का जिम्मा देने का अनुभाग जोड़ा गया है।
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एडिटर गिल्ड ने मसौदे पर गहरी चिंता जताई
एडिटर गिल्ड ने एक बयान में कहा है कि फेक न्यूज का निर्धारण केवल सरकार के हाथों में नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका असर प्रेस की सेंसरशिप पर होगा। साथ ही गिल्ड ने सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों में संशोधन के लिए लाए गए मसौदे पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मीडिया उद्योग के साथ विचार-विमर्श के बाद प्रस्तावित संशोधन में पीआईबी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी द्वारा तथ्य जांच का विकल्प जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि बिचौलियों, मुख्य रूप से सोशल मीडिया कंपनियों ने आईटी मंत्रालय से गलत सूचना के लिए अधिसूचित तथ्य जांच प्रदान करने के लिए कहा है। हम एक ऐसी व्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं, जहां सभी बिचौलियों और तथ्य जांचकर्ताओं की जवाबदेही होनी चाहिए।