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DPDP Act: डीपीडीपी अधिनियम में कोई बदलाव नहीं करेगी सरकार; अक्सर पूछे जाने वाले सवालों पर देगी जानकारी

Fri, 08 Aug 2025 08:22 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Fri, 08 Aug 2025 08:22 PM IST
सार

DPDP Act: सरकार डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम 2023 में कोई बदलाव नहीं करेगी और जल्द ही पत्रकारों व नागरिक अधिकार समूहों के सवालों के जवाब में विस्तृत जानकारी देगी। नागरिक अधिकार व पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह कानून सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम को कमजोर कर सकता है और प्रेस की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।

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Govt to make no changes in DPDP Act; FAQs to be issued soon: Sources
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

सरकार डिजिटल व्यक्तिगत डाटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम 2023 में कोई बदलाव नहीं करेगी और जल्द ही पत्रकारों और नागरिक अधिकार समूहों की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में विस्तृत जानकारी साझा करेगी। एक आधिकारिक सूत्र ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 

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नागरिक अधिकार और पत्रकार संगठनों ने बुधवार को इस कानून को लेकर चिंता जताई थी कि इसके प्रावधान सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम को प्रभावित कर सकते हैं और प्रेस की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा कि डीपीडीपी अधिनियम संसद में पारित हो चुका है, इसलिए इसमें अब कोई बदलाव संभव नहीं है। नियम बनाए जा रहे हैं जो इस कानून के दायरे में ही होंगे। सरकार ने कहा कि डीपीडीपी अधिनियम और इसके मसौदा नियम कई स्रोतों से प्राप्त हजारों सुझावों के बाद तैयार किए गए हैं।
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सरकार जल्द ही अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) की सूची भी जारी करेगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने रविवार को आरटीआई अधिनियम से उस प्रावधान हटाए जाने की आलोचना की, जिसमें नागरिकों को विधायकों के बराबर सूचना का अधिकार दिया गया था। उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से इस संशोधन को वापस लेने का आग्रह किया।
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वैष्णव ने जयराम रमेश को जवाब देते हुए कहा कि सरकारी नियमों के तहत जिस व्यक्तिगत जानकारी का खुलासा किा जाता है, वह आरटीआई अधिनियम के तहत भी जारी रहेगी। 
 
सुप्रीम कोर्ट के वकील और न्यायिक सुधार समूह के संयोजक प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि यह कानून आरटीआई अधिनियम में संशोधन करता है, जिससे बिना सहमति के व्यक्तिगत जानकारी साझा करना बंद हो जाएगा।


नागरिक अधिकार समूहों का कहना है कि यह प्रावधान आरटीआई अधिनियम को कमजोर करता है और पत्रकारों तथा सूचना देने वालों को भ्रष्ट अधिकारियों के नाम उजागर करने से रोकता है। उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए पी शाह ने एक खुले पत्र में कहा कि डीपीडीपी अधिनियम की धारा 44(3) आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(ज) की सीमित छूट को हटा कर बहुत व्यापक प्रावधान लेकर आई है, जिससे सरकारी अधिकारियों को ‘व्यक्तिगत’ कह कर जानकारी देने से मना करने का अधिकार मिल जाता है, चाहे वह जानकारी सार्वजनिक हित में हो या न हो।

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राष्ट्रीय जन सूचना अधिकार अभियान की सह-संयोजक अंजली भारद्वाज ने बताया कि आरटीआई कानून लोगों को अपनी फाइलों की स्थिति जानने, सार्वजनिक परियोजनाओं के ठेकेदारों की जानकारी प्राप्त करने और योजना लाभार्थियों की जांच करने का अधिकार देता है। लेकिन डीपीडीपी अधिनियम के तहत व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी पर रोक लगने से यह सब बंद हो सकता है। भारद्वाज ने कहा कि इस कानून में पत्रकारों के लिए कोई विशेष छूट नहीं है, जबकि पहले के मसौदों में यह स्पष्ट था। यदि नियमों में पत्रकारों के लिए छूट नहीं दी गई तो प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी।

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