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MHA: गृह मंत्रालय की बड़ी कार्रवाई, दुष्कर्म के आरोपी IAS अधिकारी को किया निलंबित; जानें पूरा मामला
Mon, 17 Oct 2022 06:31 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 17 Oct 2022 06:31 PM IST
सार
केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज 1990 बैच के आईएएस अधिकारी और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के तत्कालीन मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण को एक महिला के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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गृह मंत्रालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सोमवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में दुष्कर्म के आरोपी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी जितेंद्र नारायण को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव आशुतोष अग्निहोत्री (यूटी डिवीजन) ने कहा, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आज 1990 बैच के आईएएस अधिकारी और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के तत्कालीन मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण को एक महिला के कथित यौन उत्पीड़न के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने कानून के मुताबिक संबंधित अधिकारी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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अग्निहोत्री ने आगे कहा, केंद्र सरकार अपने अधिकारियों के अनुशासनहीन कृत्यों के प्रति जीरो टॉलरेंस सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे रैंक कुछ भी हो। अंडमान और निकोबार पुलिस की एसआईटी द्वारा आपराधिक मामले में एक अलग से प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।
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इससे पहले शनिवार को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की पुलिस द्वारा जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। इक्कीस वर्षीय युवती ने पूर्व मुख्य सचिव जितेंद्र नारायण और श्रम आयुक्त आर.एल. ऋषि पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया है। पुलिस ने अक्तूबर की शुरुआत में युवती की शिकायत पर मामला दर्ज किया था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में एसआईटी गठित
एबरडीन पुलिस थाने में यह मामला दर्ज किया गया है। नारायण के खिलाफ लगे गंभीर आरोपों की जांच के लिए एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में शनिवार को विशेष जांच दल का गठन किया गया। नारायण अभी दिल्ली वित्तीय निगम के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में तैनात हैं।
मामला विचाराधीन, टिप्पणी नहीं कर सकता: आरोपी नारायण
मामले को लेकर आईएएस अधिकारी ने शनिवार को कहा था कि वह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते, क्योंकि यह मामला विचाराधीन है। महिला ने 21 अगस्त को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें उसने दो बार अप्रैल और मई में अपने ऊपर हुए कथित यौन हमले का विस्तृत विवरण दिया था। महिला ने सबूत के लिए तत्कालीन मुख्य सचिव के आवास के सीसीटीवी फुटेज को संरक्षित करने का अनुरोध किया था। उन्होंने अधिकारी के आवास पर मौजूद कर्मचारियों के 'टेस्ट आइडेंटिफिकेशन पेरेड' का भी अनुरोध किया है।
नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप
युवती ने दावा किया कि वह नौकरी की तलाश में थी और उसे एक होटल मालिक के जरिए ऋषि से मिलवाया गया जो कथित तौर पर उसे नारायण के घर ले गया। युवती के मुताबिक, नारायण के आवास पर उसे शराब की पेशकश की गई, जिसे उसने इनकार कर दिया। युवती ने दावा किया कि उन्होंने एक सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया, लेकिन बाद में दोनों पुरुषों द्वारा यौन शोषण किया गया।
युवती को धमकी- किसी को बताया तो होंगे गंभीर परिणाम
दो हफ्ते बाद युवती ने आरोप लगाया तो उसे फिर से मुख्य सचिव के आवास पर बुलाया गया और उसके साथ दोबारा दुष्कर्म किया गया। युवती के मुताबिक, सरकारी नौकरी देने के बजाय उसे धमकी दी गई कि अगर उसने इस मामले को किसी को बताया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
गृहमंत्रालय ने नगालैंड के लिए 17.20 करोड़ रुपये जारी करने की दी मंजूरी
केंद्रीय गृहमंत्रालय ने सोमवार इस साल मानसून के मौसम में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित नगालैंड को 17.20 करोड़ रुपये की राशि जारी करने को मंजूरी दी है।
मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, यह राहत उपाय एसडीआरएफ के केंद्रीय हिस्से की दूसरी किस्त है। गृहमंत्रालय ने दूसरी किस्त के रूप में 2022-23 के लिए राहत उपाय करने के लिए 17.20 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी दी है। बयान में कहा गया है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मदद करना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार हमेशा प्रयास रहा है।
बयान में आगे कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान केंद्र सरकार पहले ही नगालैंड समते 24 राज्यों को एसडीआरएफ के केंद्रीय हिस्से की पहली किस्त के रूप में 8,764.00 करोड़ रुपये की राशि जारी कर चुकी है।