{"_id":"633f127ead8a940ac26ef051","slug":"govt-sets-up-tribunal-to-adjudicate-pfi-s-ban-justified-or-not","type":"story","status":"publish","title_hn":"PFI Ban: पीएफआई पर पाबंदी के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं, केंद्र ने किया न्यायाधिकरण का गठन","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
PFI Ban: पीएफआई पर पाबंदी के लिए पर्याप्त आधार हैं या नहीं, केंद्र ने किया न्यायाधिकरण का गठन
Thu, 06 Oct 2022 11:08 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 06 Oct 2022 11:08 PM IST
सार
पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को 28 सितंबर को आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत वैश्विक आतंकी समूहों संबंधों और देश के भीतर विध्वंसक गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया था।
विज्ञापन
पीएफआई
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्र ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश दिनेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में न्यायाधिकरण का गठन किया है, जो यह तय करेगा कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और आठ सहयोगी समूहों को गैरकानूनी घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार उपलब्ध हैं या नहीं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर ट्रिब्यूनल के गठन की घोषणा की।
विज्ञापन
28 सितंबर को आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत लगा प्रतिबंध
पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को 28 सितंबर को आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए के तहत वैश्विक आतंकी समूहों से संबंधों और देश के भीतर विध्वंसक गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित घोषित किया गया था। रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम काउंसिल (एआईआईसी), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (एनसीएचआरओ), नेशनल वुमन फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन को गैरकानूनी घोषित किया गया था।
विज्ञापन
पहली बार किसी न्यायाधिकरण का गठन
इससे पहले कानून मंत्रालय में न्याय विभाग ने एक संदेश भेजा था जिसमें कहा गया था कि न्यायमूर्ति शर्मा न्यायाधिकरण का नेतृत्व करेंगे। यूएपीए के तहत एक बार किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार द्वारा निर्णय के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं, यह तय करने के लिए किसी न्यायाधिकरण का गठन किया गया है। प्रक्रिया के अनुसार, गृह मंत्रालय कानून मंत्रालय से हाई कोर्ट के एक मौजूदा न्यायाधीश को न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी के रूप में नामित करने का अनुरोध करता है। कानून मंत्री तब संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से न्यायाधिकरण के प्रमुख के लिए एक न्यायाधीश की सिफारिश करने का अनुरोध करते हैं।
विज्ञापन
वेबसाइट बहुत ही चतुराई और सोच-समझकर डिजाइन की गई
पीएफआई की वेबसाइट बहुत ही चतुराई और सोच-समझकर डिजाइन की गई थी, जिससे यह पता लगाना मुश्किल था कि पीएफआई का किसी चरमपंथी विचारधारा के प्रति कोई झुकाव था या वह उसका समर्थन करता था। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। वेबसाइट को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार पहले ही ब्लॉक कर दिया गया है।
पीएफआई की गतिविधियों पर नजर रखने वाले एक अधिकारी ने कहा कि पीएफआई की वेबसाइट काफी सोच विचार के बाद तैयार की गई थी और यह बहुत ही संरचित और चतुराई से तैयार की गई थी। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि वेबसाइट से इस बात का जरा भी संकेत नहीं मिलता है कि संगठन चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देता है या उसका पालन करता है। पीएफआई और उसके कई सहयोगी संगठनों पर सरकार ने यूएपीए के तहत 28 सितंबर को पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। उन पर आईएसआईएस जैसे वैश्विक आतंकवादी समूहों के साथ ‘संपर्क होने और देश में सांप्रदायिक नफरत फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था।