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Sansad Diary: कांग्रेस सांसद ने पूछा- वायु प्रदूषण से कितनी मौंते हुईं? सरकार की ओर से मिला यह जवाब
Thu, 29 Jan 2026 10:47 PM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: राहुल कुमार
Updated Thu, 29 Jan 2026 10:47 PM IST
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दिल्ली में वायु प्रदूषण
- फोटो : PTI
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केंद्र सरकार ने राज्यसभा में गुरुवार को बताया कि वायु प्रदूषण के कारण मौतें होने की बात को स्थापित करने वाला कोई निश्चित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उच्च सदन को यह जानकारी दी।
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कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सरकार से पूछा था कि हर साल क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से कितनी मौतें होती हैं और क्या वायु प्रदूषण एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण और मौतों के बीच सीधा संबंध साबित करने वाला कोई पुख्ता डाटा फिलहाल मौजूद नहीं है।
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मंत्री ने यह भी बताया कि जनवरी 2019 में शुरू किया गया राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) सकारात्मक नतीजे दिखा रहा है। यह कार्यक्रम 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 130 शहरों में लागू किया जा रहा है, जिनमें नॉन-अटेनमेंट और दस लाख से अधिक आबादी वाले शहर शामिल हैं।
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पीएम-10 प्रदूषण स्तर में कमी
सरकार के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 103 शहरों में पीएम-10 प्रदूषण स्तर में कमी दर्ज की गई है। इनमें 64 शहरों में 20 प्रतिशत से ज्यादा और 25 शहरों में 40 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है। इसके अलावा 22 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरे हैं, जहां पीएम-10 स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से कम है।
दोषसिद्धि की दर अदालतों के प्रदर्शन का प्रतिबिंब नहीं
सरकार ने राज्यसभा को बताया कि दोषसिद्धि की दर अदालतों के प्रदर्शन का सटीक प्रतिबिंब नहीं होतीं। न्याय प्रणाली के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इनका समग्र रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि पुलिस, फोरेंसिक प्रयोगशाला और वकील भी दोषसिद्धि की दर में भूमिका निभाते हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट में गिरती दोषसिद्धि दरों से संबंधित एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि न्यायालयों को कानून के अनुसार, न्याय प्रदान करने का दायित्व सौंपा गया है, जिसमें अभियुक्तों को बरी करना भी शामिल हो सकता है। न्यायालयों में न्यायाधीशों, अभियोजकों और कर्मचारियों की भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों के रिक्तियों को भरना राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी है।
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि पुलिस, फोरेंसिक प्रयोगशाला और वकील भी दोषसिद्धि की दर में भूमिका निभाते हैं। फास्ट ट्रैक कोर्ट में गिरती दोषसिद्धि दरों से संबंधित एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने कहा कि न्यायालयों को कानून के अनुसार, न्याय प्रदान करने का दायित्व सौंपा गया है, जिसमें अभियुक्तों को बरी करना भी शामिल हो सकता है। न्यायालयों में न्यायाधीशों, अभियोजकों और कर्मचारियों की भर्ती का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों के रिक्तियों को भरना राज्य या केंद्र शासित प्रदेश सरकारों और संबंधित उच्च न्यायालयों की जिम्मेदारी है।
सालभर में 2.22 करोड़ को मिला रोजगार : मांडविया
केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने संसद में बताया कि रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। बेरोजगारी दर में लगातार गिरावट आ रही है। बीते एक साल में 18,000 से अधिक रोजगार मेले आयोजित किए गए। कुल 2.22 करोड़ लोगों को रोजगार मिला।
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए मांडविया ने कहा, बेरोजगारी दर घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है, जो कई विकसित देशों से भी कम है। रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने नेशनल कॅरिअर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल को एक सिंगल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। बीते 10 वर्षों में यह पोर्टल काफी मजबूत हुआ है। इससे 55 लाख कंपनियां जुड़ी हुई हैं। सभी राज्य सरकारों के रोजगार पोर्टल भी इससे लिंक किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 6 करोड़ से अधिक युवा पंजीकरण करा चुके हैं। एनसीएस पोर्टल को ई-माइग्रेट, युवा भारत और स्किल डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, ताकि नौकरी से जुड़ी सभी सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। ब्यूरो
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों का जवाब देते हुए मांडविया ने कहा, बेरोजगारी दर घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई है, जो कई विकसित देशों से भी कम है। रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने नेशनल कॅरिअर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल को एक सिंगल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया है। बीते 10 वर्षों में यह पोर्टल काफी मजबूत हुआ है। इससे 55 लाख कंपनियां जुड़ी हुई हैं। सभी राज्य सरकारों के रोजगार पोर्टल भी इससे लिंक किए गए हैं। उन्होंने बताया कि 6 करोड़ से अधिक युवा पंजीकरण करा चुके हैं। एनसीएस पोर्टल को ई-माइग्रेट, युवा भारत और स्किल डेवलपमेंट प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है, ताकि नौकरी से जुड़ी सभी सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। ब्यूरो