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विजय माल्या के प्रत्यर्पण के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे : विदेश मंत्रालय

Fri, 19 Jul 2019 04:10 AM IST
संदीप भट्ट न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संदीप भट्ट Updated Fri, 19 Jul 2019 04:10 AM IST
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Govt says it's committed to extradite Vijay Mallya, will make all efforts

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और उसे ब्रिटेन से वापस लाने के लिए सभी प्रयास करेगा।

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माल्या के प्रत्यर्पण मामले की सुनवाई अगले साल फरवरी में होने पर उन्होंने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया है। मामले की अगली सुनवाई की तिथि का फैसला करना कोर्ट पर निर्भर करता है। हम केवल इतना आश्वासन दे सकते हैं कि माल्या के प्रत्यर्पण को लेकर हमारी प्रतिबद्धता बहुत ही मजबूत है और हम उसे भारत वापस लाने के प्रयास लगातार जारी रखेंगे।  

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माल्या के प्रत्यर्पण अपील पर अगले साल फरवरी में सुनवाई करेगा ब्रिटिश कोर्ट 

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की अपने प्रत्यर्पण के खिलाफ ब्रिटिश हाईकोर्ट में दायर याचिका पर अब अगले साल फरवरी में सुनवाई होगी। यह सुनवाई 11 फरवरी को शुरू होकर तीन दिन तक चलेगी। यह निर्देश कोर्ट ने बृहस्पतिवार को दिया। 

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दो जुलाई को लंदन में रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस के दो सदस्यीय पैनल ने 63 वर्षीय माल्या को निचली अदालत के प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ अपील करने की अनुमति दे दी थी। यदि उसे अपील की अनुमति नहीं मिलती तो वह इस साल के अंत तक भारत को प्रत्यर्पित किया जा सकता था।

माल्या को भारत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है और जांच एजेंसियों की याचिका पर यहां की निचली अदालत ने उसके प्रत्यर्पण का आदेश दिया है। माल्या भारतीय बैंकों के साथ 9,000 करोड़ रुपये के बकाये में धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में वांछित है। उसने सोशल मीडिया पर कई बार भारतीय बैंकों का 100 फीसदी पैसा लौटाने की बात कही है। माल्या अभी जमानत पर रहेगा। साथ ही उसकी यात्राओं पर भी पूर्ववत रोक लगी रहेगी। 

टेरीजा मे को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के मामले को और अधिक गंभीरता से संभालना चाहिए था

ब्रिटेन-इंडिया बिजनेस काउंसिल के चेयरमैन क्रिस पर्सन्स का कहना है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे को भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के मामले को और अधिक गंभीरता से संभालना चाहिए था।

माल्या को लेकर भारत की भावनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि माल्या के प्रत्यर्पण की अहमियत का इससे पता चलता है कि यह पहला मुद्दा था जिसे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मे के साथ अपनी पहली ही बैठक में उठाया था। उन्होंने कहा कि मे को इसे और अधिक गंभीरता से लेना चाहिए था।

यह मोदी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है और यदि वह इसे सिर्फ कोर्ट का मामला न बताकर खुद कोई कदम उठाती तो बेहतर रहता। उन्होंने कहा कि माल्या बहुत ही चालाक व्यक्ति है, उसने लंदन के बेहतरीन कानूनी टीम को चुनकर ब्रिटेन में ज्यादा से ज्यादा दिन रहना सुनिश्चित किया है। 

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