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Central Govt: केंद्र ने 100 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय क्लब की मान्यता रद्द की, अवैध गतिविधियों का लगा आरोप

Thu, 26 Feb 2026 11:23 PM IST
Shivam Garg न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Thu, 26 Feb 2026 11:23 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने 100 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय क्लब की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। डीओपीटी ने अवैध गतिविधियों, जुए, शराब सेवन और वित्तीय अनियमितताओं का हवाला दिया।

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Govt Revokes Recognition of 100-Year-Old Central Secretariat Club Over Illegitimate Activities
डीओपीटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली स्थित 100 वर्ष से अधिक पुराने सेंट्रल सेक्रेटेरिएट क्लब की मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी आदेश में क्लब परिसर में अवैध और अनुचित गतिविधियों के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने की बात कही गई है।

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सरकारी आदेश के मुताबिक, क्लब में कार्यकारिणी समिति के कामकाज को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। इनमें शराब सेवन के दौरान एक सेवानिवृत्त कर्मचारी की मौत, अवैध जुआ, पार्किंग क्षेत्र में निजी शराब का सेवन और वित्तीय अनियमितताओं जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
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1919 में हुई थी स्थापना, कर्मचारियों के कल्याण के लिए बना था क्लब
साल 1919 में स्थापित यह क्लब नई दिल्ली के तालकटोरा रोड पर 2.8 एकड़ सरकारी भूमि पर स्थित है। इसे मुख्य रूप से केंद्र सरकार के निम्न और मध्य स्तर के अधिकारियों के कल्याण, मनोरंजन और सामाजिक समन्वय के उद्देश्य से शुरू किया गया था। वर्तमान में राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में हजारों केंद्रीय कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन आदेश के अनुसार क्लब की सक्रिय सदस्य संख्या सीमित है और नियमित गतिविधियों में बहुत कम सदस्य भाग लेते हैं। सरकार ने आरोप लगाया है कि कार्यकारिणी समिति ने जानबूझकर सदस्यता को सीमित रखा, ताकि चुनिंदा लोग ही नियंत्रण बनाए रखें। इससे क्लब अपने मूल उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों के कल्याण को पूरा करने में विफल रहा।
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चुनाव प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
आदेश के मुताबिक, क्लब के संविधान के अनुसार हर वर्ष चुनाव होना अनिवार्य है, लेकिन 2013 के बाद लंबे समय तक चुनाव नहीं कराए गए। 1998, 2002, 2006 और 2013 में ही चुनाव आयोजित हुए थे। 2023 में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने क्लब के संचालन को सुव्यवस्थित करने के लिए एक एड-हॉक प्रशासनिक समिति गठित की थी। जुलाई 2024 में चुनाव हुए और नई कार्यकारिणी बनी, जिसमें विभाग के तीन नामित सदस्य भी शामिल थे। इसके बावजूद, नई समिति पर भी पद के दुरुपयोग, वित्तीय अनियमितता और अनुशासनहीनता के आरोप लगे।

सरकारी आदेशों की अनदेखी का आरोप

  • 12 अगस्त 2024 को कार्मिक विभाग ने क्लब की कार्यकारिणी को संविधान के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। हालांकि, शिकायतों का सिलसिला जारी रहा।
  • सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 14 जुलाई 2025 के बाद कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल समाप्त हो गया था। इसके बाद भी समिति के किसी सदस्य को क्लब संचालन का वैध अधिकार नहीं था।
  • शिकायतों में आंतरिक झगड़े, सदस्यता में देरी, अवैध कैंटीन संचालन, सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण और निचले कर्मचारियों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दे भी शामिल रहे।

पहले भी दो बार रद्द हो चुकी है मान्यता
गौरतलब है कि क्लब की मान्यता पहले भी 1971 और 1983 में अनियमितताओं के कारण रद्द की जा चुकी है। हालांकि बाद में 1972 और दिसंबर 2005 में समीक्षा के बाद इसे बहाल कर दिया गया था। लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि लगातार उल्लंघनों और गंभीर अवैध गतिविधियों को देखते हुए मान्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाती है।



क्लब में वर्तमान में लगभग 650 सदस्य हैं, जिनमें कार्यरत और सेवानिवृत्त केंद्रीय कर्मचारी शामिल हैं। क्लब का प्रबंधन हर वर्ष चुनी जाने वाली कार्यकारिणी समिति के हाथ में होता है। सरकार का कहना है कि क्लब का उद्देश्य कर्मचारियों के हितों की रक्षा और कल्याण था, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह संस्था अपनी साख खो चुकी है।

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