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Andhra Pradesh: जगन का आरोप- सरकारी लापरवाही से आदिवासी छात्राओं की मौत; परिवारों को 25 लाख मुआवजे की मांग

Mon, 06 Oct 2025 08:34 AM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ताडेपल्ली/ विशाखापत्तनम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ताडेपल्ली/ विशाखापत्तनम Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 06 Oct 2025 08:34 AM IST
सार

Andhra Pradesh: इस दौरान पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा को पवित्र मिशन की तरह लिया था। उन्होंने कहा, 'हमने नाडू-नेडू कार्यक्रम के तहत स्कूलों को आधुनिक बनाया था और बच्चों की सेहत के लिए हर स्कूल में आरओ प्लांट लगाए गए थे।'

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Govt responsible for Kurupam tribal girls' deaths: Jagan Mohan Reddy; demands Rs 10 lakh for bereaved families
आदिवासी लड़कियों की मौत के बाद सरकार पर बरसे जगन मोहन रेड्डी - फोटो : ANI

विस्तार

आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मन्यम जिले के कुरुपम गर्ल्स जनजातीय गुरुकुल स्कूल में दूषित पानी पीने से दो आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई और सैकड़ों छात्राएं बीमार हो गईं। इस घटना ने पूरे राज्य में हलचल मचा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने इस हादसे के लिए चंद्रबाबू नायडू की गठबंधन सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि सरकार की घोर लापरवाही ने मासूम बच्चियों की जान ले ली।
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जगन बोले- क्या यही जिम्मेदार सरकार का रवैया है?
पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि कुरुपम गर्ल्स जनजातीय गुरुकुल स्कूल में लगा आरओ प्लांट कुछ समय पहले गिर गया था, जिसके बाद छात्राओं को दूषित पानी पीना पड़ा। इसी कारण स्कूल में पीलिया फैल गया। चार दिनों के भीतर दो बच्चियों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से बीमार हैं। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या यही जिम्मेदार सरकार का रवैया है? मुख्यमंत्री और मंत्री क्या कर रहे हैं जब गरीब बच्चियां मर रही हैं? क्या उन्हें आदिवासी बेटियों का दर्द दिखाई नहीं दे रहा?'
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सीएम नायडू और मंत्री लोकेश पर लगाए आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे लोकेश, जो शिक्षा मंत्री हैं, ने निजी हितों के लिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। जगन ने कहा, 'आपकी नीतियों के कारण करीब 5 लाख बच्चे सरकारी स्कूल छोड़ चुके हैं।'

'निर्दोष बच्चियों की मौतें सरकार की सीधी हत्या हैं'
उन्होंने चेतावनी दी कि लगातार लापरवाही, जैसे होस्टल में फूड प्वाइजनिंग, आरओ प्लांट की खराबी, और असुरक्षित स्कूल परिस्थितियां, अब आम बात बन गई हैं। उन्होंने कहा, 'इन निर्दोष बच्चियों की मौतें सरकार की सीधी हत्या हैं।' जगन ने मुख्यमंत्री नायडू से नैतिक जिम्मेदारी लेने और पीड़ित परिवारों से माफी मांगने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा, 'सरकार तुरंत जागे, स्कूलों में सुरक्षित सुविधाएं बहाल करे और मृत छात्राओं के परिवारों को प्रत्येक को 25 लाख रुपये का मुआवजा दे।'

वाईएसआरसीपी नेताओं ने भी सरकार को घेरा
इधर वाईएसआरसीपी नेताओं ने पार्वतीपुरम जिले के आदिवासी आवासीय स्कूलों में फैल रहे स्वास्थ्य संकट पर गहरी चिंता जताई। पूर्व उपमुख्यमंत्री पुष्पा श्रीवाणी, अराकू सांसद तानूजा रानी, पूर्व विधायक राजन्ना डोरा और जिला परिषद अध्यक्ष माजी चिन्ना श्रीनु ने किंग जॉर्ज हॉस्पिटल (केजीएच) में भर्ती छात्राओं से मुलाकात की और सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार बताया।


120 से अधिक बच्चियां अस्पताल में भर्ती- YSRCP
उन्होंने बताया कि अनजली और कल्पना नाम की दो छात्राओं की मौत हो चुकी है, जबकि 120 से अधिक बच्चियां अस्पताल में भर्ती हैं। इस मुख्य कारण दूषित पानी, खराब सफाई व्यवस्था, और बंद पड़े आरओ प्लांट्स है। पुष्पा श्रीवाणी ने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के समय लगाए गए आरओ प्लांट्स महीनों से खराब पड़े हैं और उनकी मरम्मत नहीं हुई। उन्होंने कहा, 'छात्राओं को मजबूर होकर असुरक्षित पानी पीना पड़ा। सरकार जिम्मेदारी लेने के बजाय निचले कर्मचारियों को निलंबित कर मामला दबा रही है।'



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उन्होंने यह भी बताया कि होस्टलों में पंखे, मच्छरदानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं, और सफाई कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला। अराकू की सांसद तानूजा रानी ने कहा कि 129 छात्राएं फिलहाल पीलिया से पीड़ित हैं। उन्होंने कहा, 'बार-बार चेतावनी देने के बावजूद सरकार ने न तो शुद्ध पानी की व्यवस्था की, न ही डॉक्टरों की टीम भेजी।' उन्होंने आरोप लगाया कि जनजातीय कल्याण मंत्री सिर्फ मीडिया दबाव के बाद स्कूल पहुंचे और प्रशासन को बचाने के लिए उलझी बातें कर रहे हैं। वाईएसआरसीपी नेताओं ने कहा कि यह हादसा गठबंधन सरकार के पिछले 15 महीनों में आदिवासी कल्याण की पूरी तरह विफलता को दिखाता है। उन्होंने तुरंत कदम उठाने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
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