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Next CJI: जस्टिस सूर्यकांत हो सकते हैं अगले CJI, जानें कब से कब तक रहेगा कार्यकाल, नियुक्ति प्रक्रिया हुई शुरू
Thu, 23 Oct 2025 05:32 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Thu, 23 Oct 2025 05:32 PM IST
सार
Next Chief Justice Of India: भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश के चयन के लिए केंद्र सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। बता दें कि, मौजूदा सीजेआई बीआर गवई का कार्यकाल 23 नवंबर को खत्म हो रहा है। वहीं इस सूची में जस्टिस सूर्यकांत पहले नंबर पर हैं। जस्टिस सूर्यकांत के बारे में जानें...
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सीजेआई बीआर गवई और जस्टिस सूर्यकांत
- फोटो : ANI
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विस्तार
केंद्र सरकार ने गुरुवार को भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी है क्योंकि वर्तमान मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई 23 नवंबर को पद से मुक्त हो रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया से वाकिफ सूत्रों ने बताया कि न्यायमूर्ति गवई को उनके उत्तराधिकारी के नाम का अनुरोध करने वाला पत्र आज शाम या शुक्रवार को भेजा जाएगा।
यह भी पढ़ें - Supreme Court: CJI पर हमले के आरोपी वकील के खिलाफ अवमानना याचिका पर शीर्ष कोर्ट करेगी सुनवाई; ये तारीख की तय
प्रक्रिया ज्ञापन के अनुसार, जो सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति का मार्गदर्शन करने वाले दस्तावेजों का एक सेट है, में कहा गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की होनी चाहिए, जिन्हें पद धारण करने के लिए उपयुक्त माना जाए।
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कानून मंत्री मौजूदा सीजेआई से मांगेंगे सिफारिश
केंद्रीय कानून मंत्री, उचित समय पर, अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए भारत के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश से सिफारिश मांगेंगे। परंपरागत रूप से, यह पत्र वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर सेवानिवृत्त होने से एक महीने पहले भेजा जाता है।
वरिष्ठता के हिसाब सूची में पहले नंबर पर जस्टिस सूर्यकांत
न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और भारतीय न्यायपालिका के प्रमुख बनने की कतार में अगले स्थान पर हैं। नियुक्ति के बाद, न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को अगले मुख्य न्यायाधीश बनेंगे और 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने तक इस पद पर बने रहेंगे।
जस्टिस सूर्यकांत के बारे में जानें
10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म। 1981 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से स्नातक। 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से विधि स्नातक। 1984 में हिसार जिला न्यायालय में वकालत शुरू की। 1985 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत करने के लिए चंडीगढ़ गए। संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता। कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों, बैंकों और स्वयं उच्च न्यायालय का प्रतिनिधित्व किया। 7 जुलाई 2000 को हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता नियुक्त हुए। मार्च 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। 9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनकी पदोन्नति होने तक हरियाणा के महाधिवक्ता के पद पर रहे।
यह भी पढ़ें - Gaganyaan: इसरो प्रमुख बोले- गगनयान मिशन में 90% काम पूरा, 2027 की शुरुआत में अंतरिक्ष जाएगा पहला मानव मिशन
फरवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे जस्टिस सूर्यकांत
23 फरवरी 2007 को 22 फरवरी 2011 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के शासी निकाय के सदस्य के रूप में नामित किए गए। 2011 में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, कुरुक्षेत्र विवि, कुरुक्षेत्र से कानून में अपनी मास्टर डिग्री में प्रथम श्रेणी में खड़े होने का एक और गौरव प्राप्त किया। 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत, 9 फरवरी, 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।
सामाजिक मुद्दों से जुड़ी रही न्यायिक यात्रा
उनकी न्यायिक यात्रा महत्वपूर्ण मुकदमों और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी रही। वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे, पीड़ितों के अधिकार, आरक्षण और संवैधानिक संतुलन जैसे विषयों में निर्णायक और संवेदनशील दृष्टिकोण रखते रहे। उनके फैसलों ने सामाजिक न्याय, सांविधानिक मर्यादा और नागरिक अधिकारों को मजबूती दी।
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प्रक्रिया ज्ञापन के अनुसार, जो सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदोन्नति का मार्गदर्शन करने वाले दस्तावेजों का एक सेट है, में कहा गया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद पर नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश की होनी चाहिए, जिन्हें पद धारण करने के लिए उपयुक्त माना जाए।
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कानून मंत्री मौजूदा सीजेआई से मांगेंगे सिफारिश
केंद्रीय कानून मंत्री, उचित समय पर, अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए भारत के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश से सिफारिश मांगेंगे। परंपरागत रूप से, यह पत्र वर्तमान मुख्य न्यायाधीश के 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर सेवानिवृत्त होने से एक महीने पहले भेजा जाता है।
वरिष्ठता के हिसाब सूची में पहले नंबर पर जस्टिस सूर्यकांत
न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत के मुख्य न्यायाधीश के बाद सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और भारतीय न्यायपालिका के प्रमुख बनने की कतार में अगले स्थान पर हैं। नियुक्ति के बाद, न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को अगले मुख्य न्यायाधीश बनेंगे और 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने तक इस पद पर बने रहेंगे।
जस्टिस सूर्यकांत के बारे में जानें
10 फरवरी, 1962 को हरियाणा के हिसार में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म। 1981 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, हिसार से स्नातक। 1984 में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से विधि स्नातक। 1984 में हिसार जिला न्यायालय में वकालत शुरू की। 1985 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत करने के लिए चंडीगढ़ गए। संवैधानिक, सेवा और सिविल मामलों में विशेषज्ञता। कई विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों, बैंकों और स्वयं उच्च न्यायालय का प्रतिनिधित्व किया। 7 जुलाई 2000 को हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता नियुक्त हुए। मार्च 2001 में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया गया। 9 जनवरी 2004 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनकी पदोन्नति होने तक हरियाणा के महाधिवक्ता के पद पर रहे।
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फरवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे जस्टिस सूर्यकांत
23 फरवरी 2007 को 22 फरवरी 2011 तक लगातार दो कार्यकालों के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के शासी निकाय के सदस्य के रूप में नामित किए गए। 2011 में दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, कुरुक्षेत्र विवि, कुरुक्षेत्र से कानून में अपनी मास्टर डिग्री में प्रथम श्रेणी में खड़े होने का एक और गौरव प्राप्त किया। 24 मई, 2019 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत, 9 फरवरी, 2027 को सेवानिवृत्त होंगे।
सामाजिक मुद्दों से जुड़ी रही न्यायिक यात्रा
उनकी न्यायिक यात्रा महत्वपूर्ण मुकदमों और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी रही। वे सार्वजनिक संसाधनों के संरक्षण, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे, पीड़ितों के अधिकार, आरक्षण और संवैधानिक संतुलन जैसे विषयों में निर्णायक और संवेदनशील दृष्टिकोण रखते रहे। उनके फैसलों ने सामाजिक न्याय, सांविधानिक मर्यादा और नागरिक अधिकारों को मजबूती दी।