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Fiscal Deficit: राजस्व घाटा प्रबंधित करने की चुनौती, लेकिन अतिरिक्त उधार नहीं लेगी सरकार 

Wed, 25 May 2022 11:10 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Wed, 25 May 2022 11:10 PM IST
सार

पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कटौती से सरकार को प्रति वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।

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Govt has no plan for additional borrowing to manage fiscal deficit: Sources
Fiscal deficit - फोटो : istock

विस्तार

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को कहा कि सरकार कोई अतिरिक्त उधार लेने की योजना नहीं बना रही है और पेट्रोलियम उत्पादों और अन्य सामान पर शुल्क में कमी के कारण राजस्व का त्याग करने के बावजूद चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित उधार लक्ष्य पर टिकी रहेगी। बढ़ती मुद्रास्फीति को रोकने के लिए सरकार ने पिछले सप्ताह पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में रिकॉर्ड 8 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 6 रुपये की कटौती की है, ताकि ईंधन की ऊंची कीमतों से जूझ रहे उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। इसके अलावा सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लगभग 9 करोड़ लाभार्थियों को एलपीजी पर 200 रुपये प्रति सिलेंडर सब्सिडी भी प्रदान की।

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पेट्रोल और डीजल पर टैक्स में कटौती से सरकार को प्रति वर्ष लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। बजट में (चालू वित्त वर्ष के लिए) 1.05 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी के अलावा सरकार ने उर्वरकों की कमी के कारण कीमतों में वृद्धि से किसानों को उबारने के लिए 1.10 लाख करोड़ रुपये प्रदान किए। यह आशंका थी कि इन रियायतों से सरकार को सकल घरेलू उत्पाद के 6.4 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पूरा करने के लिए अतिरिक्त उधारी का सहारा लेना पड़ सकता है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सरकार का इरादा शुल्क के नुकसान की भरपाई के लिए फिलहाल अतिरिक्त उधारी का सहारा लेने का नहीं है।
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सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए नियोजित अपने उधार कैलेंडर पर टिकी रहेगी। सरकार ने बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए 14.31 लाख करोड़ रुपये का सकल बाजार उधारी लक्ष्य रखा था। इसमें से 8.45 लाख करोड़ रुपये पहली छमाही या अप्रैल-सितंबर की अवधि में उधार लिए जाने का अनुमान है।
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केंद्रीय बजट दस्तावेज के अनुसार, 2022-23 के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से सकल बाजार उधार 14,95,000 करोड़ रुपये होगा। 28 जनवरी, 2022 को किए गए स्विच ऑपरेशंस को ध्यान में रखते हुए, 2022-23 के लिए दिनांकित प्रतिभूतियों के माध्यम से सकल बाजार उधार 14,31,352 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। 2021-22 के लिए सकल उधारी 12,05,500 करोड़ रुपये थी।  

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