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Manipur: सरकार ने मणिपुर हिंसा की जांच कर रही समिति को दिया अतिरिक्त समय, अब 20 नवंबर तक सौंप सकते हैं रिपोर्ट

Fri, 13 Sep 2024 09:45 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 13 Sep 2024 09:45 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने मणिपुर में हुई हिंसा की जांच पर रिपोर्ट देने के लिए गठित जांच आयोग को 20 नवंबर तक का समय दिया। बता दें कि राज्य में एक साल से ज्यादा समय से जारी हिंसा में अब तक 220 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

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Govt grants additional time to panel investigating Manipur violence to submit report
गृह मंत्रालय - फोटो : ANI

विस्तार

मणिपुर हिंसा की जांच कर रही गठित जांच आयोग को केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए अतिरिक्त समय दिया है, जानकारी के मुताबिक अब समिति 20 नवंबर तक रिपोर्ट सौंप सकती है। बता दें कि 3 जून, 2023 को गौहाटी उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया था।
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आयोग के पास हिंसा और दंगों की जांच का काम
इस पैनल में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हिमांशु शेखर दास और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी आलोक प्रभाकर भी शामिल हैं, जिन्हें 3 मई, 2023 से मणिपुर में कई समुदायों के सदस्यों को निशाना बनाकर की गई हिंसा और दंगों के कारणों और प्रसार के संबंध में जांच करने का काम सौंपा गया था। पहले जांच आयोग को अपनी रिपोर्ट जितनी जल्दी हो सके, लेकिन अपनी पहली बैठक की तारीख से छह महीने से अधिक समय बाद नहीं, केंद्र सरकार को सौंपनी थी। अब नई अधिसूचना में कहा गया है, आयोग अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द, लेकिन 20 नवंबर, 2024 से पहले केंद्र सरकार को सौंपेगा।
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जांच आयोग के कार्यक्षेत्र के अनुसार, यह उन घटनाओं के अनुक्रम की जांच करेगा, जिसके कारण ऐसी हिंसा हुई और उससे संबंधित सभी तथ्य; क्या इस संबंध में किसी जिम्मेदार अधिकारी या व्यक्ति की ओर से कोई चूक या कर्तव्य की उपेक्षा हुई और हिंसा और दंगों को रोकने और उनसे निपटने के लिए उठाए गए प्रशासनिक उपाय पर्याप्त थे।
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जांच में शिकायतों या आरोपों पर किया जाएगा गौर
वहीं आयोग की तरफ से की जाने वाली जांच में किसी व्यक्ति या संगठन की तरफ से उसके समक्ष की जाने वाली शिकायतों या आरोपों पर गौर किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की 4 जून, 2023 की अधिसूचना के अनुसार, 3 मई, 2023 को मणिपुर में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी और इसके परिणामस्वरूप राज्य के कई निवासियों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

मणिपुर सरकार की सिफारिश पर आयोग का हुआ गठन
अधिसूचना में कहा गया है कि मणिपुर सरकार ने 29 मई, 2023 को जांच आयोग अधिनियम, 1952 के प्रावधानों के तहत संकट और 3 मई, 2023 को हुई दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के कारणों और संबंधित मुद्दों की जांच करने के लिए न्यायिक जांच आयोग की स्थापना की सिफारिश की थी। मणिपुर सरकार की सिफारिश पर, केंद्र सरकार की राय है कि मणिपुर में हिंसा की घटनाओं, यानी सार्वजनिक महत्व के एक निश्चित मामले की जांच करने के उद्देश्य से एक जांच आयोग की नियुक्ति करना आवश्यक है।


पिछले साल 3 मई को राज्य में भड़की थी हिंसा
पिछले साल 3 मई को जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से मणिपुर में छिटपुट हिंसा देखी जा रही है। जातीय हिंसा पहली बार तब भड़की जब मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था।

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