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Karnataka: सीएम सिद्धारमैया ने कहा- राज्यपाल 'तुच्छ मामलों' पर रिपोर्ट के लिए लिख रहे पत्र, सरकार कर रही जांच
Mon, 23 Sep 2024 07:28 PM IST
पवन पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: पवन पांडेय
Updated Mon, 23 Sep 2024 07:28 PM IST
सार
राज्यपाल ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कथित आर्कावती लेआउट अधिसूचना रद्दीकरण घोटाले में केम्पन्ना आयोग की रिपोर्ट और अन्य संबंधित जानकारी की एक प्रति मांगी है, जिसमें सिद्धारमैया पर अपने पहले कार्यकाल के दौरान भूमि को अधिसूचना मुक्त करने का आरोप लगाया गया था।
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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया
- फोटो : ANI
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विस्तार
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कथित आर्कावती लेआउट घोटाले पर न्यायमूर्ति एच एस केम्पन्ना आयोग की रिपोर्ट के संबंध में पूर्ववर्ती सरकार की कथित निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर पलटवार किया और कहा कि उनकी सरकार इस संबंध में कई पहलुओं पर विचार करने के बाद रिपोर्ट पर निर्णय लेगी।
राज्यपाल ने मुख्य सचिव को लिखा है पत्र
राज्यपाल ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कथित अर्कावती लेआउट घोटाले में केम्पन्ना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति और अन्य संबंधित जानकारी मांगी है। इस कथित घोटाले में सिद्धरमैया के पिछले कार्यकाल के दौरान भूमि को गैर-अधिसूचित करने का आरोप है।
सीएम सिद्धारमैया ने पिछली भाजपा सरकार पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अर्कावती लेआउट मामले के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘मुझे नहीं पता, मैं इसे देखूंगा। भाजपा चार साल तक सत्ता में रही। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? वे सत्ता में थे, उन्होंने इसे (रिपोर्ट को) विधानसभा में क्यों नहीं पेश किया? अब सी. टी. रवि (भाजपा विधान पार्षद) ने (राज्यपाल को) एक पत्र लिखा है। वह (भाजपा सरकार में) मंत्री थे। उन्होंने तब ऐसा क्यों नहीं किया?’
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उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘क्या आप जानते हैं कि अब क्या हुआ है? इस पर केशवनारायण की अध्यक्षता वाली एक समिति (गठित) थी, इन सभी चीजों पर गौर करने की जरूरत है। इस पर गौर करने के बाद हम फैसला लेंगे।’ सी. टी. रवि ने हाल ही में राज्यपाल को पत्र लिखकर सिद्धरमैया से न्यायमूर्ति केम्पन्ना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा था।
न्यायमूर्ति केम्पन्ना आयोग का गठन 2014 में बतौर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के पहले कार्यकाल के दौरान किया गया था। आयोग की रिपोर्ट 2017 में प्रस्तुत की गई थी, उस समय भी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ही थे, लेकिन रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था।
राज्य सरकार कर रही जांच- सिद्धारमैया
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार राज्यपाल के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत करने पर विचार कर रही है, मुख्यमंत्री ने कहा, नहीं, हम जांच कर रहे हैं। राज्यपाल (छोटे मामलों पर रिपोर्ट मांगने के लिए) पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, किसी ने शिकायत की है। मैं आपको बता रहा हूं, मैसूरु के किसी व्यक्ति ने शिकायत की कि मैं हमेशा कन्नड़ में हस्ताक्षर करता था, लेकिन (कुछ दस्तावेज़ों में) मैंने अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए हैं, इसलिए कृपया इसकी जांच करें। क्या यह कोई मुद्दा है? मैं अंग्रेजी या कन्नड़ में हस्ताक्षर कर सकता हूं। कोई भी व्यक्ति जिस भाषा में चाहे हस्ताक्षर कर सकता है।
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राज्यपाल ने मुख्य सचिव को लिखा है पत्र
राज्यपाल ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को पत्र लिखकर कथित अर्कावती लेआउट घोटाले में केम्पन्ना आयोग की रिपोर्ट की एक प्रति और अन्य संबंधित जानकारी मांगी है। इस कथित घोटाले में सिद्धरमैया के पिछले कार्यकाल के दौरान भूमि को गैर-अधिसूचित करने का आरोप है।
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सीएम सिद्धारमैया ने पिछली भाजपा सरकार पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अर्कावती लेआउट मामले के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, ‘मुझे नहीं पता, मैं इसे देखूंगा। भाजपा चार साल तक सत्ता में रही। उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? वे सत्ता में थे, उन्होंने इसे (रिपोर्ट को) विधानसभा में क्यों नहीं पेश किया? अब सी. टी. रवि (भाजपा विधान पार्षद) ने (राज्यपाल को) एक पत्र लिखा है। वह (भाजपा सरकार में) मंत्री थे। उन्होंने तब ऐसा क्यों नहीं किया?’
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उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ‘क्या आप जानते हैं कि अब क्या हुआ है? इस पर केशवनारायण की अध्यक्षता वाली एक समिति (गठित) थी, इन सभी चीजों पर गौर करने की जरूरत है। इस पर गौर करने के बाद हम फैसला लेंगे।’ सी. टी. रवि ने हाल ही में राज्यपाल को पत्र लिखकर सिद्धरमैया से न्यायमूर्ति केम्पन्ना की रिपोर्ट सार्वजनिक करने को कहा था।
न्यायमूर्ति केम्पन्ना आयोग का गठन 2014 में बतौर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के पहले कार्यकाल के दौरान किया गया था। आयोग की रिपोर्ट 2017 में प्रस्तुत की गई थी, उस समय भी मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ही थे, लेकिन रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया था।
राज्य सरकार कर रही जांच- सिद्धारमैया
यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार राज्यपाल के खिलाफ राष्ट्रपति से शिकायत करने पर विचार कर रही है, मुख्यमंत्री ने कहा, नहीं, हम जांच कर रहे हैं। राज्यपाल (छोटे मामलों पर रिपोर्ट मांगने के लिए) पत्र लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, किसी ने शिकायत की है। मैं आपको बता रहा हूं, मैसूरु के किसी व्यक्ति ने शिकायत की कि मैं हमेशा कन्नड़ में हस्ताक्षर करता था, लेकिन (कुछ दस्तावेज़ों में) मैंने अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए हैं, इसलिए कृपया इसकी जांच करें। क्या यह कोई मुद्दा है? मैं अंग्रेजी या कन्नड़ में हस्ताक्षर कर सकता हूं। कोई भी व्यक्ति जिस भाषा में चाहे हस्ताक्षर कर सकता है।
भाजपा सांसद ने की कांग्रेस नेताओं की आलोचना
भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर निशाना साधने के लिए सोमवार को कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल के सामने मामलों का ढेर लगता जा रहा है, ऐसे में कांग्रेस नेता उन पर आक्षेप लगा रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा, कांग्रेस की यह पुरानी चाल है कि जब उनके कदाचार पकड़े जाते हैं और जब वे समस्या में होते हैं तो संवैधानिक प्राधिकारियों पर हमला करते हैं। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल को निशाना बनाना शुरू कर दिया है क्योंकि गहलोत के सामने कांग्रेस के भ्रष्टाचार के अनेक मामले जमा हो रहे हैं।
राज्ससभा सदस्य सिरोया ने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय मुडा घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर फैसला सुनाने वाला है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में राज्यपाल और अदालतों के समक्ष भ्रष्टाचार के और भी मामले आ सकते हैं। सिरोया ने कहा कि भाजपा नेताओं ने लोकायुक्त की नाराजगी का सामना किया, लेकिन कभी संस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की।
भाजपा सांसद लहर सिंह सिरोया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर निशाना साधने के लिए सोमवार को कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस को आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि जब राज्यपाल के सामने मामलों का ढेर लगता जा रहा है, ऐसे में कांग्रेस नेता उन पर आक्षेप लगा रहे हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा, कांग्रेस की यह पुरानी चाल है कि जब उनके कदाचार पकड़े जाते हैं और जब वे समस्या में होते हैं तो संवैधानिक प्राधिकारियों पर हमला करते हैं। कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्यपाल को निशाना बनाना शुरू कर दिया है क्योंकि गहलोत के सामने कांग्रेस के भ्रष्टाचार के अनेक मामले जमा हो रहे हैं।
राज्ससभा सदस्य सिरोया ने कहा कि कर्नाटक उच्च न्यायालय मुडा घोटाले के मामले में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी पर फैसला सुनाने वाला है। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में राज्यपाल और अदालतों के समक्ष भ्रष्टाचार के और भी मामले आ सकते हैं। सिरोया ने कहा कि भाजपा नेताओं ने लोकायुक्त की नाराजगी का सामना किया, लेकिन कभी संस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं की।
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