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सहकारिता मंत्रालय: दिसंबर तक खोले जाएंगे 2000 जन औषधि केंद्र, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों को लेकर बड़ा फैसला

Tue, 06 Jun 2023 08:19 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Tue, 06 Jun 2023 08:19 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने देशभर में दो हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने की अनुमति देने का फैसला किया है। सहकारिता मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। 

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Govt decided to allow 2000 PACS to open PMBJAK across the country Ministry of Cooperation
सहकारिता मंत्री अमित शाह - फोटो : एएनआई

विस्तार

केंद्र सरकार ने देशभर में दो हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पीएसीएस) को प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोलने की अनुमति देने का फैसला किया है। सहकारिता मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सहकारिता मंत्री अमित शाह की रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मंडाविया के साथ आज नई दिल्ली में हुई बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोलने के लिए देशभर में 2000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों की पहचान की जाएगी। इस साल अगस्त तक 1,000 और दिसंबर तक 1,000 जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे।

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सरकार ने अरहर, उड़द, मसूर दाल की 40 फीसदी खरीद की सीमा हटाई
केंद्र सरकार ने 2023-24 फसल वर्ष (जुलाई से जून) के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत अरहर, उड़द और मसूर की दाल की 40 फीसदी खरीद सीमा हटा दी है। यह कदम घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए उठाया गया है। खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि किसान इस वर्ष पीएसएस के तहत अरहर, उड़द और मसूर के अपने उत्पादन की कितनी भी मात्रा बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। 
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इससे क्या होगा फायदा?
सरकार की ओर से इन दालों की लाभकारी कीमतों पर खरीद सुनिश्चित करने से किसानों को आगामी खरीफ और रबि बुआई के मौसम में अरहर, उड़द और मसूर के बुआई रकबे को बढ़ाने के लिए प्रेरित करने में मदद मिलेगी, ताकि उत्पादन में वृद्धि हो सके। पीएसएस के तहत तभी खरीद शुरू होती है जब कृषि उपज की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे गिर जाती हैं। बता दें कि सरकार ने दो जून को थोक बिक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों, बिग चेन दुकानदारों, मिलों और आयातकों के लिए इन दालों के भंडारण की सीमा पर लगी रोक भी हटा दी थी।

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महिला उद्यमियों को 27 करोड़ रुपये के मुद्रा ऋण दिए गए
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के नौ साल' के साथ नए युग की शुरुआत की है, जिसमें देश ने महिला उद्यमियों को 27 करोड़ रुपये के मुद्रा ऋण का वितरण कर रिकॉर्ड बनाया है, जो आज भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाते हैं। शाह ने ट्वीट किया, प्रगति के सिद्धांत को बदलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने 'महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास के नौ साल' के युग की शुरुआत की है, जिस पर दुनिया आश्चर्यचकित है। भारत ने महिलाओं उद्यमियों को 27 करोड़ रुपये का मुद्रा ऋण वितरिक रिकॉर्ड बनाया है। महिला शक्ति ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया है।  

गृहमंत्री ने खासतौर पर यह भी जिक्र किया कि नारीत्व का उत्सव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृ्त्व वाली सरकार का केवल नारा नहीं, बल्कि अब यह वास्तविकता है, जहां महिलाओं ने अंतरिक्ष से लेकर स्टार्ट-अप और रक्षा से लेकर घरेलू मामलों तक जीवन के सभी क्षेत्रों में सभी शीशों को तोड़कर नई ऊंचाइयों को छुआ है। शाह ने कहा कि 'नारी शक्ति' को लागू करने के लिए मुद्रा योजना के तहत गैर-कृषि लघु और सूक्ष्म उद्यमों के लिए महिलाओं को 27.7 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया। मुद्रा योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 अप्रैल, 2015 को लॉन्च किया था। 

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के तहत मुद्रा ऋण वाणिज्यिक बैंकों, आरआरबी, लघु वित्त बैंकों, सहकारी बैंकों, एमएफआई और एनबीएफसी द्वारा दिए जाते हैं। उधारकर्ता इनमें से किसी भी  संस्थान से संपर्क कर सकता है या इस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।  

शाह ने बताया कि कैसे मोदी सरकार ने महिला सुदृढ़ीकरण के तहत 1.45 लाख से ज्यादा महिलाओं के स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमियों को 15,922 करोड़ के ऑर्डर प्रदान करने में मदद की। मंत्री ने यह भी कहा कि 54 फीसदी महिलाओं को प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत प्रमाणित किया गया था और 80 फीसदी महिलाएं स्टार्ट-अप इंडिया के तहत लाभार्थी हैं। साथ ही 47 फीसदी स्टार्ट अप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं। 

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