{"_id":"603040e56e0fd5303701bd92","slug":"government-will-introduce-policy-of-geospatial-data-and-mapping","type":"story","status":"publish","title_hn":"उदार भूस्थानिक डाटा नियम से 2030 तक होगी देश को एक लाख करोड़ की आय","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
उदार भूस्थानिक डाटा नियम से 2030 तक होगी देश को एक लाख करोड़ की आय
Sat, 20 Feb 2021 04:22 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 20 Feb 2021 04:22 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : istock
केंद्र सरकार की तरफ से हाल ही में की गई देश के मानचित्रण मानकों को उदार बनाने की घोषणा से कई क्षेत्रों को व्यापक लाभ की उम्मीदें नजर आ रही हैं।
विज्ञापन
डीएसटी सचिव आशुतोष शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि सरकार जल्द ही भूस्थानिक डाटा व मानचित्रण की नीति पेश करेगी। इस नीति में यह दिशानिर्देश तय किए जाएंगे कि कैसे भूस्थानिक डाटा लिया जा सकता है, कौन इसे ले सकता है।
विज्ञापन
साथ ही इसके उपयोग और साझा करने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इसकी मदद से उपलब्ध होने वाले उत्पादों से देश ने साल 2030 तक एक लाख करोड़ की आय का लक्ष्य रखा है।
विज्ञापन
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने शुक्रवार को भूस्थानिक डाटा से जुड़े हितधारकों की बैठक आयोजित की। बैठक में बताया गया कि बदले नियमों की बदौलत भारत 2030 तक एक लाख करोड़ रुपये की आय अर्जित करने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ेगा, जिससे सांइस और प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी देश के आर्थिक विकास में महती भूमिका का निर्वाह कर सकेगा।
बैठक में देश के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर वी. राघवन ने कहा कि भूस्थानिक डाटा सेवाओं के उपयोग पर लगे सभी प्रतिबंध समाप्त हो गए हैं। यह उद्योगों के लिए ऑक्सीजन का काम करेंगा। इसकी मदद से अगली पीढ़ी मानचित्रण प्रौद्योगिकियों को विकसित कर सकेगी।
साथ ही भारतीय नवाचारों को उच्चतम तकनीक और नक्शे आसानी से उपलब्ध होंगे, जो उन्हें सशक्त बनाएंगे। केंद्रीय विज्ञान व तकनीक विभाग (डीएसटी) के सचिव आशुतोष शर्मा ने कहा कि नए नियम आत्मनिर्भर भारत को और अधिक सशक्त और मजबूत बनाएंगे। इससे देश के आर्थिक विकास में साइंस और प्रौद्योगिकी का और अधिक प्रभावी योगदान सुनिश्चित होगा।
अंतरिक्ष विभाग के सचिव के. सीवन ने नए नियमों को लागू कराने में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। प्रधान आर्थिक सलाहकार संजीव नील ने कहा कि यह ऐतिहासिक पल हैं और भारतीय कंपनियां इसका उपयोग समाज और देश के विकास के लिए कर सकती हैं।