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Waqf Board: वक्फ बोर्ड एक्ट में बदलाव को किस तरह देख रहे मुस्लिम, आम मुसलमानों पर क्या होगा असर?
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वक्फ बोर्ड।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में बदलाव कर सकती है। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में नए जमाने के हिसाब से बदलाव करते हुए इसे आम मुसलमानों के लिए ज्यादा उपयोगी बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जब से यह जानकारी सामने आई है कि सरकार वक्फ बोर्ड एक्ट में बदलाव करने जा रही है, इसको लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इस संभावित बदलाव की यह कहकर आलोचना की है कि ऐसे बदलाव के पहले मुसलमानों से कोई बातचीत नहीं की गई, जबकि कई लोग वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और मुस्लिम महिलाओं की वक्फ बोर्ड में भागीदारी बढ़ाने का स्वागत कर रहे हैं। अभी सरकार ने नये एक्ट का मसौदा संसद के पटल पर नहीं रखा है, लेकिन अभी से इसके आसार दिख रहे हैं कि एक बार इसके सामने आने के बाद एक बार फिर इस मुद्दे पर सियासत जमकर गर्म होने वाली है।वक्फ बोर्ड के नाम पर विवाद क्यों
सितंबर 2022 में तमिलनाडु के वक्फ बोर्ड ने राज्य के तिरुचेंदुरई गांव की 480 एकड़ की पूरी जमीन को अपना बता दिया था। इसी गांव में एक बड़ा हिंदू मंदिर भी है। वक्फ बोर्ड ने इसे भी अपनी संपत्ति पर बनाया हुआ करार दे दिया था, जिसके बाद इस पर विवाद बढ़ गया था। महाराष्ट्र में देश के एक बड़े उद्योगपति के घर को भी वक्फ बोर्ड ने अपनी जमीन पर बना हुआ बता दिया था। इसी तरह के कई अन्य विवाद समय-समय पर आते रहे हैं।
नियमन आवश्यक क्यों?
केंद्र सरकार की राय है कि यदि वक्फ की संपत्तियों का सरकार के पास रजिस्ट्रेशन हो, तो इस तरह के विवादों से बचा जा सकेगा। वक्फ की एक बेशकीमती संपत्ति को वक्फ बोर्ड के कुछ सदस्यों के द्वारा गलत तरीके से बेचे जाने का मामला भी इस समय अदालत में लंबित है। केंद्र की राय है कि यदि वक्फ की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन होगा तो इसको गलत तरीके से बेचा-खरीदा नहीं जा सकेगा। इसका सदुपयोग गरीब मुसलमानों के हितों में किया जा सकेगा। इसे देखते हुए केंद्र सरकार वक्फ की सभी चल-अचल संपत्ति को सरकारी दस्तावेजों में लिखित करना चाहती है।
बातचीत नहीं की गई- AIMPLB
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) के प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने अमर उजाला से कहा कि वक्फ बोर्ड के लिए 1954 में पहली बार कानून बना था। इसके बाद 1995 और 2013 में भी इसमें बदलाव किया गया था। 2013 में इसमें बदलाव के पहले आम मुसलमानों से बातचीत कर इसे ज्यादा बेहतर बनाने की बात कही गई थी, लेकिन इस सरकार ने वक्फ बोर्ड में बदलाव करने के पहले किसी से कोई बातचीत नहीं की है। ऐसे में अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नए बदलावों में सरकार वक्फ बोर्ड में क्या-क्या परिवर्तन करना चाहती है। बातचीत न होने के कारण ही सरकार की मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वक्फ की संपत्ति वह जमीन-जायदाद होती है जिसे किसी के द्वारा इस्लामिक धार्मिक कार्यों (मस्जिद, कब्रिस्तान या मदरसा बनाने) के लिए दान दिया जाता है। लेकिन एक बार कोई जमीन वक्फ बोर्ड को दान करने के बाद उसे किसी निजी व्यक्ति-संस्था या सरकार के द्वारा वापस नहीं लिया जा सकता। लेकिन वक्फ किसी की संपत्ति को अपने मनमाने तौर पर अपना नहीं घोषित कर सकता है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड को लेकर कुछ गलतफहमी पैदा करने की कोशिश की जा रही है, इसे साफ करना आवश्यक है।
'महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना सही कदम'
मुस्लिम समुदाय से जुड़ी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को लेकर कई बार आलोचना होती रही है। वक्फ बोर्ड का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर यह मामला जोर पकड़ता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि सरकार केंद्र द्वारा गठित होने वाली सेंट्रल बोर्ड वक्फ बोर्ड और राज्य सरकारों द्वारा राज्य स्तर पर गठित होने वाले वक्फ बोर्ड में कम से कम दो महिलाओं की भागीदारी होने को अनिवार्य बना सकती है। मुस्लिम महिलाओं के द्वारा अभी से इस बदलाव का स्वागत किया जा रहा है।
दिल्ली हज कमेटी की चेयरमैन कौसर जहां ने अमर उजाला से कहा कि चाहे मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की बात हो या वक्फ बोर्ड की, मुस्लिम समाज के कुछ लोग इसमें महिलाओं की भागीदारी नहीं होने देना चाहते। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार जब से सत्ता में आई है, तब से हर संस्था में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने का काम कर रही है। केंद्र सरकार ने महिलाओं को देश की संसद तक में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देकर महिला सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की देखरेख में अब तक किसी मुस्लिम महिला की भागीदारी न होना गहरे सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया जाना चाहिए।
सरकार की मंशा पर शक- ओवैसी
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि जिस समय संसद का सत्र चल रहा है, सरकार ने इस वक्फ बोर्ड के बदलाव की बात संसद के पटल पर रखने से पहले मीडिया को लीक किया है। यह सरकार के इरादों पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ही संघ के एजेंडे पर चल रही है और वक्फ की संपत्तियां पहले ही भाजपा-आरएसएस के निशाने पर रही हैं। उन्होंने कहा कि जब पूरा मामला सामने आएगा, तब इसकी असलियत सामने आएगी।
पारदर्शिता जरूरी-भाजपा
भाजपा ने इस प्रस्तावित बदलावों का यह कहते हुए स्वागत किया है कि वक्फ बोर्ड के पास भारी संपत्ति है, लेकिन इससे केवल 200 करोड़ रुपये की आय दिखाई जा रही है। इससे यह साबित होता है कि कहीं न कहीं वक्फ बोर्ड के संचालन में कमी है। इसे दूर किए जाने की आवश्यकता है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के संचालन में पारदर्शिता आने से इसकी आय बढ़ेगी। आम गरीब मुसलमानों के हित में इसका प्रयोग किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि समय के साथ वक्फ बोर्ड के कामकाज में पारदर्शिता आने से यह मुसलमानों के ही हित में होगा, इसलिए इस बदलाव का स्वागत किया जाना चाहिए।
जमीअत ने व्यक्त की चिंता
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि वक्फ की स्थिति और वक्फकर्ता का उद्देश्य बदल जाए, ऐसे किसी बदलाव को कभी स्वीकार नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्डों के अधिकारों को कम या सीमित करने को भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।