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Report: दुनिया में आसमान छू रहे थे कच्चे तेल के दाम, तब भारत में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर रोकी महंगाई

Tue, 19 May 2026 11:20 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 19 May 2026 11:20 PM IST
सार

रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बावजूद भारत सरकार ने 2021 से 2026 तक पेट्रोल पर 27 रुपए और डीजल पर 30 रुपए की बड़ी राहत दी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया की एकमात्र ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसने वैश्विक संकट में एक्साइज ड्यूटी घटाकर उपभोक्ताओं को सीधे फायदा पहुंचाया। रिपोर्ट में गैर-भाजपा शासित राज्यों पर वैट कम न करने का भी दावा किया गया है। आइए, विस्तार से पूरी रिपोर्ट को समझते हैं...

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Government Shoulders Burden of Rising Oil Prices Prices Reduced Multiple Times Between 2021-2026 Global Crisis
रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पूरी दुनिया जब रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे बड़े संकटों से जूझ रही थी, तब भारत सरकार ने अपने नागरिकों को पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए एक बहुत ही बड़ा और अहम कदम उठाया। मंगलवार को जारी हुई एक नई रिपोर्ट 'पेट्रोल और डीजल: उपभोक्ता संरक्षण की संरचना' में यह दावा किया गया कि भारत दुनिया की इकलौती ऐसी बड़ी अर्थव्यवस्था है, जिसने दो बड़े वैश्विक ऊर्जा संकटों के दौरान तेल के दाम बढ़ाने के बजाय उनमें कटौती की। इस रिपोर्ट में साफ बताया गया है कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने के बावजूद इसका सीधा बोझ आम जनता पर नहीं पड़ने दिया, बल्कि खुद राजस्व (टैक्स के पैसे) का भारी नुकसान उठाया।

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रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर 2021 से लेकर मार्च 2026 तक भारत सरकार ने पेट्रोल पर कुल 27 रुपए और डीजल पर 30 रुपए तक की बड़ी राहत दी है। इसमें सबसे हालिया कटौती 27 मार्च 2026 को हुई थी, जब स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (एसएईडी) को घटाकर पेट्रोल और डीजल दोनों पर सीधे 10-10 रुपए प्रति लीटर की राहत दी गई। इस पूरी अवधि के दौरान जब दुनिया के कई देशों में तेल की कीमतें 10 से 90 प्रतिशत तक बढ़ गई थीं, तब भारत ने लगभग 12 हफ्तों तक अपने यहां कीमतों को पूरी तरह से स्थिर रखा। सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने भारी नुकसान सहकर आम उपभोक्ताओं को महंगाई की मार से बचाया।
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सरकार ने कब-कब दी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत?
रिपोर्ट में इस बात का पूरा ब्योरा दिया गया है कि सरकार ने अलग-अलग समय पर कैसे लोगों को राहत पहुंचाई। शुरुआत 4 नवंबर 2021 को हुई थी जब पेट्रोल पर 5 रुपए और डीजल पर 10 रुपए कम किए गए थे। इसके बाद 21 मई 2022 को पेट्रोल 8 रुपए और डीजल 6 रुपए सस्ता किया गया। 14 मार्च 2024 और अप्रैल 2025 में भी तेल कंपनियों ने दोनों ईंधनों पर 2-2 रुपए की कटौती की। इसके बाद 27 मार्च 2026 को एसएईडी घटाकर 10-10 रुपए की बड़ी राहत दी गई। हालांकि, हाल ही में 15 मई और 19 मई को पश्चिमी एशिया के संकट के कारण दामों में थोड़ी बढ़ोतरी जरूर करनी पड़ी है।


कांग्रेस के 'ओवर टैक्सेशन' के आरोपों का रिपोर्ट ने क्या जवाब दिया?
इस रिपोर्ट में कांग्रेस पार्टी के अधिक टैक्स वसूली (ओवर टैक्सेशन) वाले पुराने आरोपों का भी करारा जवाब दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यूपीए सरकार के समय तेल कंपनियों को राहत देने के लिए 'ऑयल बॉन्ड' जारी किए गए थे। इन बॉन्ड्स का सारा बोझ बाद में आने वाली सरकारों और भविष्य की पीढ़ियों के कंधों पर डाल दिया गया था। इसके ठीक विपरीत, मौजूदा सरकार ने सीधे अपनी एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) घटाकर लोगों को राहत दी। इससे उपभोक्ताओं को तुरंत फायदा मिला और भविष्य के लिए कोई अतिरिक्त कर्ज या बोझ नहीं छोड़ा गया।

राज्यों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अंतर क्यों दिखाई देता है?
रिपोर्ट में यह बात भी साफ की गई है कि पूरे देश में पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार का टैक्स (एक्साइज ड्यूटी) बिल्कुल एक समान है। इसके बावजूद अलग-अलग राज्यों में कीमतों में बड़ा अंतर इसलिए है क्योंकि हर राज्य सरकार अपना अलग 'वैट' (VAT) लगाती है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों में वैट बहुत ज्यादा है, इसलिए वहां पेट्रोल 107 रुपए प्रति लीटर से भी ऊपर बिक रहा है। वहीं, उत्तर प्रदेश, गुजरात और असम जैसे राज्यों में कीमतें कम हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केंद्र द्वारा टैक्स घटाने के बावजूद कई विपक्ष शासित राज्यों ने अपना वैट कम नहीं किया।

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