Media Report: हाथीदांत के व्यापार पर लगे बैन को हटाने से जुड़ी रिपोर्ट को सरकार ने किया खारिज, कही ये बात
13 अक्टूबर, 2022 को एक मीडिया संस्थान द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कोई भी तथ्य नहीं है। रिपोर्ट को काफी हद तक अटकलों और अफवाहों के आधार पर तैयार किया गया है। बता दें कि इस रिपोर्ट में कहा गया था कि नामीबिया ने हाथीदांत के व्यापार की अनुमति देने के अपने लंबे समय से प्रस्ताव के लिए सीआईटीईएस में समर्थन करने की प्रतिबद्धता के तहत भारत का समर्थन मांगा है।
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नामीबिया से चीतों के भारत आने के बाद कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि नामीबिया ने हांथी दांत के व्यापार पर यूएन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को हटाने के लिए भारत के समर्थन की मांग की है। इन मीडिया रिपोर्ट्स को लेकर पर्यावरण मंत्रालय ने बयान जारी किया है। मंत्रालय ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा कि नामीबिया द्वारा चीता सौदे के हिस्से के रूप में हाथी दांत के व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध को हटाने के लिए भारत के समर्थन की मांग करने वाली समाचार रिपोर्ट्स काफी हद तक अटकलों और अफवाहों पर निर्भर हैं। इन रिपोर्ट्स में कोई तथ्य नहीं है।
मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि 13 अक्टूबर, 2022 को एक मीडिया संस्थान द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में कोई भी तथ्य नहीं है। रिपोर्ट को काफी हद तक अटकलों और अफवाहों के आधार पर तैयार किया गया है। बता दें कि इस रिपोर्ट में कहा गया था कि नामीबिया ने हाथीदांत के व्यापार की अनुमति देने के अपने लंबे समय से प्रस्ताव के लिए सीआईटीईएस में समर्थन करने की प्रतिबद्धता के तहत भारत का समर्थन मांगा है।
बयान में यह भी कहा गया है कि नामीबिया गणराज्य की सरकार और भारत सरकार के बीच हुए समझौते में सहयोग के क्षेत्रों में वन्यजीव संरक्षण और टिकाऊ जैव विविधता उपयोग शामिल है, लेकिन इसे लुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार पर प्रतिबंध हटाने के समर्थन के रूप में नहीं माना जा सकता है। बयान में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार को हाथी दांत के व्यापार पर से प्रतिबंध हटाने के संबंध में नामीबिया से कोई लिखित संदेश नहीं मिला है।
वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों (CITES) के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के तहत प्रतिबंध लगा दिया गया था, लेकिन नामीबिया और कुछ अन्य देश जैसे बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका इस प्रतिबंध को खत्म करने के लिए प्रयासरत हैं। जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हाथी दांत और अन्य वन्यजीव भागों के भंडार को बेच सकें और राजस्व पैदा कर सकें।
गौरतलब है कि भारत और नामीबिया ने 20 जुलाई को 'वन्यजीव संरक्षण और सतत जैव विविधता उपयोग' को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौता ज्ञापन में कहा गया है कि दोनों देशों को अपनी सीमा क्षेत्रों में चीता के संरक्षण विशेष ध्यान देने के साथ ही जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए। इसके साथ ही दोनों देशों में चीता संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेषज्ञता और क्षमताओं का आदान-प्रदान करना चाहिए। हालांकि इस समझौते में हाथीदांत का कोई जिक्र नहीं किया गया था।