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शेल कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार की सख्ती, ई-फाइलिंग समेत ये काम जरूरी

Sat, 23 Feb 2019 02:43 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Sat, 23 Feb 2019 02:43 PM IST
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Government regulations for shell companies
प्रतीकात्मक तस्वीर

सरकार ने शेल कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए उनपर सख्ती बढ़ाने का फैसला लिया है। अब कंपनियों के लिए ई-फाइलिंग करना अनिवार्य होगा। साथ ही कंपनियों को अपने रजिस्टर्ड ऑफिस और डायरेक्टरों की जानकारी भी ऑनलाइन देनी पड़ेगी। कंपनी के ऑडिटर्स और मैनेजमेंट के प्रमुख अधिकारियों को पहली बार डिटेल के साथ रजिस्टर्ड ऑफिस की फोटो जमा करने को कहा गया है। अब कंपनियों को अपने ऑफिस का अक्षांश-देशांतर (लैटिट्यूड-लॉन्गिट्यूड) भी बताना होगा। 

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क्यों उठे सख्त कदम?

सरकार ने कंपनियों पर सख्त कदम इसलिए उठाया है क्योंकि शेल कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई में अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कई कंपनियां एक ही पते को अपना रजिस्टर्ड ऑफिस बता रही हैं। लेकिन वास्तव में इन कंपनियों में कोई काम नहीं होता है। देश में इस वक्त करीब 12 लाख से अधिक रजिस्टर्ड कंपनियां हैं। इन्हीं सब पर लगाम लगाने के लिए कंपनी मामलों के मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है।

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अधिसूचना के अनुसार सभी कंपनियों को एक्टिव नाम का ई-फॉर्म भरना होगा। इस फॉर्म को भरने की आखिरी तारीख 25 अप्रैल 2019 है। जो कंपनी इस दौरान अपनी ई-फाइलिंग का काम नहीं करेंगी उनपर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा कंपनी पर कुछ अन्य पाबंदियां भी लग सकती हैं। इस फॉर्म को भरने से पहले 2017-2018 का सालाना रिटर्न भी जमा कराना होगा। बता दें जिस कंपनी का रजिस्ट्रेशन खत्म हो गया है उसे एक्टिव फर्म भरना होगा।

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वीडियो क्लिप देना भी जरूरी 

बीते साल कंपनी मामलों के मंत्रालय ने ही केवाईसी नियम जारी किया था। जिससे करीब 33 लाख डायरेक्टर प्रभावित हुए थे। अब नए नियम के अनुसार डायरेक्टरों के लिए अपना मोबाइल नंबर, ईमेल, पैन जैसी व्यक्तिगत जानकारियों की ई-फाइलिंग करना भी जरूरी होगा। इसके साथ ही डायरेक्टरों के लिए 30 सेकेंड का वीडियो क्लिप अपलोड करना भी अनिवार्य होगा। इस वीडियो क्लिप में उन्हें अपने बारे में बताना होगा।

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