सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उपकरण बनाने वाली कंपनी का दाम 50 करोड़ रुपये लगाया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत सरकार की पब्लिक सेक्टर की कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (सीईएल) जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अनेक उपकरण बनाती है, सरकार ने उसे निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर ली है। सरकार ने इतनी अहम कंपनी का दाम भी महज 50 करोड़ रुपये रखा है।
सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी को कोई भी व्यक्ति खरीद सकता है। अब देखिये शर्त भी क्या रखी है। कम से कम तीन साल पुरानी कोई भी कंपनी हो, इससे ज्यादा पुरानी कंपनी है तो वह पिछले तीन साल से लाभ में चल रही हो और यदि कोई एक कंपनी इसे नहीं खरीदना चाहे तो छोटे-मोटे उद्योग चलाने वाले 4-5 लोग मिलकर भी एसईएल को खरीद सकते हैं।
तकनीकी दक्षता नहीं है तो भी चलेगा। कर्मचारी और अधिकारी डेढ़ माह से आंदोलन कर रहे हैं कि इसे निजी हाथों में न सौंपा जाए, मगर सरकार अपने फैसले से पीछे हटती नहीं दिख रही है। सीईएल ऑफिसर्स एसोसिएशन के महासचिव नेपाल सिंह सैनी, वीरेंद्र कुमार और किरण पाल भारती ने यह बात कही है।
इनके मुताबिक, 44 साल से यह कंपनी डिफेंस के लिए अनेक सीक्रेट उपकरण बना रही है। इसके अलावा कंपनी द्वारा रेलवे सिग्नल प्रणाली, बॉर्डर एरिया और नक्सल क्षेत्र में काम आने वाले सर्विलांस उपकरण आदि बनाए जाते हैं।कंपनी ने सैन्य सुरक्षा से जुड़े करीब डेढ़ दर्जन उत्पाद, जिनका अभी तक आयात किया जाता रहा है, को विकसित करना शुरू किया है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बड़े संस्थान बीईएल व डीआरडीओ द्वारा भी इस कंपनी से कई उपकरण तैयार कराए जाते हैं।नेपाल सैनी के मुताबिक, साल 2017-18 में कंपनी का शुद लाभ 22 करोड़ रुपया था।इसके बावजूद केंद्र सरकार इस कंपनी को निजी हाथों में और वह भी गैर-तकनीकी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है।
गाजियाबाद के औधोगिक क्षेत्र साहिबाबाद स्थित सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बाहर धरने पर बैठी इंजीनियर एसोसिएशन का कहना है कि अब हमारे सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।वीरवार को एसोसिएशन ने रफ़ी मार्ग पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिक मंत्रालय के सामने इस मुद्दे को लेकर ज़ोरदार
प्रदर्शन किया था।
सोलर क्षेत्र में देश का यह सबसे अहम संस्थान है....
एसोसिएशन के महासचिव नेपाल सिंह सैनी और वीरेंद्र कुमार का कहना है कि सोलर क्षेत्र में देश का यह सबसे अहम संस्थान है।इसमें सोलर सैल, सोलर मॉडयूल व सोलर पावर प्लांट आदि का निर्माण होता है।जब देश के दूरदराज के इलाकों में कोई भी प्राइवेट संस्था जाने के लिए तैयार नहीं थी, तब इसी संस्थान ने वहाँ जाकर उन इलाकों को प्रकाशमय किया।
इस संस्थान ने रेलवे सेफ्टी के उपकरण स्वदेशी तकनीक के द्वारा पर तैयार किए हैं। इसके अलावा इस संस्थान ने रक्षा क्षेत्र में रडार में लगने वाले कुछ सीक्रेट उपकरण स्वत: रिसर्च कर तैयार किए हैं। लगभग 15 वर्षों से इस संस्थान ने रक्षा क्षेत्र में काम कर रही कम्पनी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड की मांग की लगातार आपूर्ति की है।इससे सरकार के करोड़ों रुपये बचे हैं। साथ ही सीईएल उन उत्पादों पर भी कार्य कर रही है जो आज सेना द्वारा आयात किए जाते हैं।
संस्थान का 100 करोड़ से ज्यादा रुपया बाजार में पड़ा है। फ़िलहाल 1000 करोड़ रुपए के ऑर्डर कंपनी के पास हैं।इतना सब कुछ होने के बाद भी सरकार इस संस्थान को प्राइवेट हाथों में देना चाहती है और वह भी ओने पौने दामों में।