बार-बार सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से भड़की सरकार, अदालत ने दिया यह जवाब
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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि भारत एक विकासशील देश है और यहां कई तरह की समस्याएं हैं ऐसे में किसी मसले पर विचार करने केदौरान कोर्ट को सरकार के पूरे शासनतंत्र के खिलाफ किसी तरह की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। मालूम हो कि पिछले दिनों प्रदूषण, पर्यावरण, ताजमहल, सीलिंग सहित कई अन्य मामलों को लेकर दाखिल जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सरकार केकामकाज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त टिप्पणी की है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ केसमक्ष पिछले दिनों अखबारों में सरकार के खिलाफ की गई पीठ द्वारा की गई टिप्पणियों का जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह टिप्पणी करते वक्त जज को इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि हो सकता है कि उन्हें समस्याओं के हर पहलू के बारे में जानकारी न हो। उन्होंने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है।
भारत विकासशीलय या पिछड़ा देश है, जहां कई तरह की समस्याएं हैं। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जब किसी खास मसले पर जनहित याचिका दायर की जाती है तो सुप्रीम कोर्ट को नि:संदेह उस पर परीक्षण करना चाहिए और आदेश पारित करना चाहिए। लेकिन अदालत को इस बात भी गौर करना चाहिए कि कुछ आदेशों का अप्रत्यक्ष रूप से भी प्रभाव पड़ता है। इन आदेशों के कई परिणाम होते हैं क्योंकि इससे दूसरे का अधिकार प्रभावित होता है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, टूजी का लाइसेंस रद्द करने के कारण विदेशी निवेश पर असर पड़ा। उसी तरह हाईवे किनारे से शराब की दुकानों को हटाने केआदेश के कारण भारी वित्तीय नुकसान हुआ। कई लोगों की आजीविका छीन गई। वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि अदालत का हर आदेश संतुलित होना चाहिए क्योंकि 1.3 अरब जनसंख्या वाले भारत में कई तरह की समस्याएं हैं। देश में गरीबी, निरक्षरता, जागरूकता का अभाव गंभीर समस्या है और सरकार को पहले उन लोगों के बारे में सोचने की जरूरत है जो एक दिन में 100 रुपये तक नहीं कमा पाते।
अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पीठ को हर-हमेशा सरकार की आलोचना नहीं करनी चाहिए। अदालत को दूसरे सेक्टर में हो रहे विकास पर भी ध्यान देना चाहिए। यह कहना सही नहीं है कि सरकार कुछ नहीं कर रही है। हर चीज नगेटिव नहीं है। जवाब में न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर ने अटॉर्नी जनरल से कहा, %मैं आपको एक बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम सरकार की आलोचना नहीं करते। हम भी देश केनागरिक हैं और हमें भी देश की समस्याओं केबारे में पता है।
हम सिर्फ लोगों का अधिकार सुनिश्चित करना चाहते हैं। हम अनुच्छेद-21 को अमल करना चाहते हैं। कई चीजों तो हमारे आदेशों की बदौलत ही होते हैं। हम सिर्फ चाहते हैं कि संसद द्वारा बनाए गए कानून का पालन हो।’ जस्टिस लोकुर ने यह भी कहा कि उपकर केजरिए सरकार ने 100000 करोड़ जमा किए हैं लेकिन इस रकम पर बैठी हुई है। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि आज के जमाने में यह रकम कुछ भी नहीं है। साथ ही केंद्र सरकार को यह रकम नहीं खर्च करनी है।
रकम राज्यों को खर्च करनी है और इसकेलिए राज्यों को लेकर लगातार संवाद किया जाता है। इस पर पीठ ने कहा कि फिर भी यह रकम उतनी जरूर है कि शेल्टर होम की स्थिति ठीक हो सकती है, विधवाओं का पुनर्वास हो सकता है और जेलों को बेहतर बनाया जा सकता है। वास्तव में अटॉर्नी जनरल जेलों में कैदियों की भरमार और उनकी दयनीय स्थिति से संबंधित एक मामले में पेश हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने जेल-सुधार को लेकर एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का फैसला किया है। कमेटी की सहायता केलिए दो सरकारी अधिकारी भी होंगे। कमेटी समय-समय पर अदालत को रिपोर्ट सौपेगी।