बिना पुरुष साथी के हज जाने के मामले में केरल की महिलाएं अव्वल, दूसरे नंबर पर यूपी
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सरकार के हालिया जारी किए डाटा के अनुसार 86 प्रतिशत मुस्लिम महिलाएं भारत से हज यात्रा पर बिना पुरुष साथी (मेहरम) के सऊदी अरब गई थीं। इस साल सूची में नंबर एक पर केरल का स्थान है। 2,340 मुस्लिम महिलाओं में से 2,011 महिलाएं दक्षिणी राज्य से थी। हज यात्रा बकरीद से पहले होती है। मेहरम के तौर पर पिता, शौहर, बेटा, पिता कोई भी महिला के साथ जा सकता है।
मुस्लिम सऊदी में स्थित अपने पवित्र तीर्थस्थल मक्का मदीना के दर्शन के लिए हज यात्रा पर जाते हैं। केरल से पुरुषों के मुकाबले महिलाओं ने हज के लिए सबसे ज्यादा आवेदन किया है। राज्य से 11,000 से ज्यादा हज यात्रियों ने आवेदन किया है। जिसमें 6,959 महिलाएं बिना मेहरम के हैं। वहीं पुरुषों की संख्या 4,513 है।
पिछले साल सरकारी नियमों में हुए बदलाव के कारण 45 साल से ऊपर की उम्र वाली महिलाएं चार के समूह में बिना पुरुष साथी के हज यात्रा पर जा सकती हैं। केरल हज समिति के अधिकारी ने महिलाओं के अकेले यात्रा करने को लेकर कई कारण बताए। जिसमें साक्षरता और लिंग समानता शामिल है।
महिलाओं को पुरुष साथी के बिना यात्रा करने में सक्षम बनाने का निर्णय 2018-22 की हज नीति का हिस्सा है। आंकड़ों को देखें तो केरल की 2,011, उत्तर प्रदेश की 99, पश्चिम बंगाल की 39, तमिलनाडु की 37, महाराष्ट्र की 31, मध्यप्रदेश की 27, राजस्थान की 26 और कर्नाटक की 23 महिलाएं बिना मेहरम के हज यात्रा पर गई थीं।
वहीं दिल्ली की 12, बिहार की 9, असम की 8, झारखंड की 5, उत्तराखंड की 5, छत्तीसगढ़ की 4 और पुड्डुचेरी की 4 महिलाएं पुरुष साथी के बिना हज पर गई थीं। इस साल हज पर गई सबसे वृद्ध महिला की उम्र 87 साल थी। 80 और 82 साल की महिलाएं भी इस साल हज पर जा चुकी हैं।
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